कई बार ऐसा देखा जाता है कि व्यक्ति खूब मेहनत करता है, आमदनी भी ठीक-ठाक होती है, लेकिन फिर भी पैसा हाथ में टिकता नहीं। खर्च अचानक बढ़ जाते हैं, सेविंग नहीं बन पाती और आर्थिक तनाव बना रहता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इसका एक बड़ा कारण घर में बाथरूम या टॉयलेट की गलत दिशा भी हो सकती है। खासतौर पर अगर घर में साउथ-ईस्ट यानी आग्नेय कोण में टॉयलेट बना हुआ है, तो यह धन हानि और आर्थिक अस्थिरता का कारण बन सकता है। आइए जानते हैं क्यों यह दिशा संवेदनशील मानी जाती है और कैसे कुछ आसान वास्तु उपाय अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
साउथ-ईस्ट दिशा क्यों मानी जाती है महत्वपूर्ण
वास्तु शास्त्र में साउथ-ईस्ट दिशा को अग्नि तत्व की दिशा माना गया है। इस दिशा का संबंध ऊर्जा, धन प्रवाह, आत्मविश्वास और आर्थिक वृद्धि से होता है। जब इसी दिशा में टॉयलेट या बाथरूम बना होता है, तो अग्नि तत्व और जल तत्व के टकराव से नकारात्मक ऊर्जा पैदा होती है। इसका असर सीधे व्यक्ति की आमदनी, खर्च और मानसिक स्थिति पर पड़ सकता है। कई बार बिना किसी स्पष्ट कारण के पैसे की निकासी बढ़ जाती है।
साउथ-ईस्ट में टॉयलेट होने के संकेत
अगर आपके घर में यह वास्तु दोष है, तो इसके कुछ सामान्य संकेत हो सकते हैं। जैसे मेहनत के बावजूद आर्थिक तंगी, बार-बार अनचाहे खर्च, बिजनेस या नौकरी में रुकावट, घर के सदस्यों में चिड़चिड़ापन और मानसिक तनाव। ऐसे में समय रहते उपाय करना जरूरी माना जाता है।
लाल टेप से करें सरल उपाय
वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, साउथ-ईस्ट दिशा में बने टॉयलेट के दरवाजे या कमोड के आसपास लाल रंग की टेप लगाना लाभकारी हो सकता है। लाल रंग अग्नि तत्व का प्रतीक है और यह नकारात्मक ऊर्जा को संतुलित करने में मदद करता है। ध्यान रखें कि टेप साफ और सही तरीके से लगाई जाए।
साफ-सफाई का रखें विशेष ध्यान
वास्तु में साफ-सफाई को सबसे बड़ा उपाय माना गया है। साउथ-ईस्ट दिशा में अगर टॉयलेट है, तो उसे हमेशा साफ और सूखा रखें। गंदगी, पानी का रिसाव या बदबू नकारात्मक ऊर्जा को और बढ़ा सकती है। नियमित सफाई से वास्तु दोष का प्रभाव काफी हद तक कम हो सकता है।
छोटे पौधे या हरियाली अपनाएं
यदि संभव हो तो बाथरूम में या उसके पास छोटे हरे पौधे रखें। पौधे नकारात्मक ऊर्जा को सोखने में मदद करते हैं और वातावरण को सकारात्मक बनाते हैं। ध्यान रखें कि पौधा सूखा या मुरझाया हुआ न हो, वरना इसका उल्टा असर भी हो सकता है।
धातु के छोटे आइटम भी होते हैं असरदार
वास्तु शास्त्र में धातु को ऊर्जा संतुलन का माध्यम माना गया है। साउथ-ईस्ट दिशा में टॉयलेट होने पर आप वहां छोटे धातु के बाउल, तांबे का पात्र या स्टील की कोई सजावटी वस्तु रख सकते हैं। इससे अग्नि और जल तत्व के बीच संतुलन बनाने में सहायता मिलती है।
दरवाजा हमेशा रखें बंद
एक और बेहद आसान लेकिन प्रभावी उपाय है कि टॉयलेट का दरवाजा हमेशा बंद रखें। इससे नकारात्मक ऊर्जा घर के अन्य हिस्सों में फैलने से रुकती है और आर्थिक नुकसान की संभावना कम होती है।
यह जानकारी वास्तु शास्त्र की सामान्य मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। वास्तु उपाय व्यक्ति की आस्था और अनुभव पर निर्भर करते हैं। किसी भी बड़े वास्तु परिवर्तन से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
Vikash Kumar (Vicky)

