By – Vikash Kumar (Vicky)
शीशा और वास्तु का गहरा संबंध
Vastu Tips: वास्तु शास्त्र में घर की हर छोटी-बड़ी वस्तु का विशेष महत्व बताया गया है। दीवारों का रंग, दरवाजों की दिशा, फर्नीचर की स्थिति और शीशा लगाने की जगह—ये सभी चीजें घर की ऊर्जा को प्रभावित करती हैं। वास्तु के अनुसार शीशा केवल देखने का साधन नहीं, बल्कि ऊर्जा को परावर्तित करने वाला माध्यम होता है। सही दिशा में लगाया गया शीशा सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है, जबकि गलत दिशा में लगा शीशा वास्तु दोष का कारण बन सकता है।
उत्तर दिशा में शीशा क्यों माना जाता है शुभ
वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर दिशा को धन के देवता कुबेर की दिशा माना जाता है। यदि घर में उत्तर दिशा की दीवार पर शीशा लगाया जाए, तो यह आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में सहायक माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि इस दिशा में लगा शीशा धन से जुड़ी रुकावटों को दूर करता है और आय के नए अवसर पैदा करता है। जिन लोगों को लगातार पैसों की कमी या खर्चों की समस्या रहती है, उनके लिए यह उपाय लाभकारी माना जाता है।
पूर्व दिशा में शीशा लगाने के फायदे
पूर्व दिशा सूर्य की दिशा मानी जाती है, जो ऊर्जा, स्वास्थ्य और उन्नति का प्रतीक है। वास्तु शास्त्र के अनुसार इस दिशा में शीशा लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है। इससे घर के सदस्यों के स्वास्थ्य में सुधार, पढ़ाई में एकाग्रता और करियर में आगे बढ़ने के योग बनते हैं। पूर्व दिशा का शीशा घर के माहौल को भी उज्ज्वल और सकारात्मक बनाए रखता है।
दक्षिण और पश्चिम दिशा में शीशा क्यों होता है अशुभ
वास्तु शास्त्र में दक्षिण और पश्चिम दिशा में शीशा लगाने को अशुभ माना गया है। इन दिशाओं में लगा शीशा नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकता है, जिससे आर्थिक नुकसान, अनावश्यक खर्च और मानसिक तनाव की स्थिति बन सकती है। विशेष रूप से दक्षिण दिशा में शीशा घर की स्थिरता और शांति को प्रभावित कर सकता है, इसलिए इन दिशाओं से बचने की सलाह दी जाती है।
बेडरूम में शीशा लगाते समय रखें सावधानी
बेडरूम में शीशा लगाते समय वास्तु नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है। वास्तु के अनुसार सोते समय व्यक्ति का प्रतिबिंब शीशे में दिखाई नहीं देना चाहिए। ऐसा होने पर तनाव, नींद की कमी और पति-पत्नी के संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। अगर अलमारी पर शीशा लगा हो, तो रात के समय उसे कपड़े से ढक देना शुभ माना जाता है।
मुख्य द्वार के सामने शीशा लगाने से बचें
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के मुख्य द्वार के ठीक सामने शीशा नहीं लगाना चाहिए। माना जाता है कि मुख्य द्वार से प्रवेश करने वाली सकारात्मक ऊर्जा शीशे से टकराकर वापस चली जाती है। इससे घर में सुख-समृद्धि टिक नहीं पाती और मेहनत के बावजूद परिणाम कमजोर हो सकते हैं।
टूटा या गंदा शीशा बढ़ा सकता है दुर्भाग्य
वास्तु शास्त्र में साफ और सही स्थिति वाले शीशे को ही शुभ माना गया है। टूटा, चटक या धुंधला शीशा नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकता है। इससे घर में तनाव, बाधाएं और दुर्भाग्य बढ़ सकता है। इसलिए समय-समय पर शीशों की सफाई और टूटे शीशे को तुरंत हटाने की सलाह दी जाती है।
छोटे वास्तु बदलाव से हो सकते हैं बड़े लाभ
अगर आप लंबे समय से आर्थिक तंगी, करियर में रुकावट या पारिवारिक तनाव से जूझ रहे हैं, तो घर में लगे शीशों की दिशा और स्थिति जरूर जांचें। कई बार छोटे-से वास्तु सुधार से जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।
यह लेख वास्तु शास्त्र की सामान्य मान्यताओं और पारंपरिक जानकारियों पर आधारित है। Newsbag.in इसकी पूर्ण वैज्ञानिक पुष्टि या सटीकता का दावा नहीं करता। किसी भी बड़े बदलाव या निर्णय से पहले वास्तु विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

