By: Vikash Kumar (vicky)
आज की डिजिटल दुनिया में मोबाइल, लैपटॉप और टीवी हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऑफिस का काम हो, ऑनलाइन क्लास, कॉलेज असाइनमेंट या फिर मनोरंजन—हर काम स्क्रीन के जरिए ही हो रहा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि घंटों स्क्रीन के सामने बैठना आपकी गर्दन, पीठ और दिमाग पर कितना भारी पड़ सकता है? लगातार स्क्रीन टाइम न सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है बल्कि रीढ़ की हड्डी, गर्दन और मांसपेशियों पर भी गंभीर असर डाल सकता है। अगर समय रहते सावधानी न बरती जाए तो यह समस्या क्रॉनिक दर्द और हड्डियों की कमजोरी तक पहुंच सकती है।

क्यों खतरनाक है बढ़ता स्क्रीन टाइम
डॉक्टर बताते हैं कि लंबे समय तक स्क्रीन देखने से दिमाग को लगातार विजुअल इनपुट मिलता रहता है, जिससे मानसिक थकान बढ़ती है। स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट नींद के पैटर्न को बिगाड़ देती है और शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी पर असर डालती है।
इसके अलावा, मोबाइल या लैपटॉप को नीचे रखकर देखने की आदत से गर्दन झुकी रहती है, जिससे रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यह धीरे-धीरे “टेक नेक” जैसी समस्या का रूप ले लेता है, जिसमें गर्दन में जकड़न, दर्द और सिरदर्द तक हो सकता है।

दिमाग पर स्क्रीन टाइम का असर
सोचने और याद रखने की क्षमता पर प्रभाव
लगातार स्क्रीन देखने से दिमाग थका हुआ महसूस करता है। इससे ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है और नई जानकारी को समझने की क्षमता कम हो सकती है। लंबे समय तक यह आदत याददाश्त पर भी असर डाल सकती है।
ध्यान भटकना और चिड़चिड़ापन
स्क्रीन पर लगातार स्क्रॉल करने से दिमाग को बार-बार नई जानकारी मिलती है। इससे किसी एक काम पर फोकस करना मुश्किल हो जाता है। धीरे-धीरे व्यक्ति में चिड़चिड़ापन और अधीरता बढ़ सकती है।
नींद की समस्या
ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को कम करती है, जो नींद लाने में मदद करता है। परिणामस्वरूप नींद देर से आती है, नींद की गुणवत्ता खराब होती है और दिनभर थकान बनी रहती है।

भावनात्मक बदलाव
बच्चों और किशोरों में ज्यादा स्क्रीन टाइम तनाव, चिंता और गुस्से की प्रवृत्ति बढ़ा सकता है। वे अपनी भावनाओं को संतुलित तरीके से व्यक्त नहीं कर पाते।
गर्दन और पीठ पर गंभीर प्रभाव
मोबाइल देखते समय लगातार गर्दन झुकाने से सर्वाइकल स्पाइन पर अतिरिक्त वजन पड़ता है। इससे गर्दन दर्द, कंधों में जकड़न और कभी-कभी हाथों में झनझनाहट भी हो सकती है।
कमर दर्द और मांसपेशियों पर दबाव
गलत पॉश्चर में बैठने से कंधे आगे की ओर झुक जाते हैं और कमर पर दबाव बढ़ता है। यह लंबे समय तक चलने वाला पीठ दर्द बन सकता है, जो रोजमर्रा के कामों को प्रभावित करता है।
हड्डियों की कमजोरी
लगातार बैठे रहने से शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है, जिससे हड्डियों की मजबूती घटने लगती है। कम उम्र में ही हड्डियों के कमजोर होने और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है।

ऐसे करें बचाव
20-20-20 नियम अपनाएं
हर 20 मिनट बाद 20 फीट दूर रखी किसी वस्तु को कम से कम 20 सेकंड तक देखें। इससे आंखों और दिमाग को आराम मिलता है।
नियमित ब्रेक लें
हर 45 मिनट काम करने के बाद 5 मिनट का ब्रेक लें। इस दौरान खड़े होकर चलें-फिरें और हल्की स्ट्रेचिंग करें।
सही पॉश्चर बनाए रखें
स्क्रीन को आई-लेवल पर रखें ताकि गर्दन झुकानी न पड़े। ऐसी कुर्सी का उपयोग करें जिसमें कमर को सपोर्ट मिले और हाथ टिकाने की सुविधा हो। बैठते समय रीढ़ सीधी रखें।
नियमित व्यायाम करें
रीढ़ और मांसपेशियों को मजबूत रखने के लिए हल्का व्यायाम, योग या वॉक को दिनचर्या में शामिल करें। बिना ट्रेनर के भारी वर्कआउट से बचें।
सोने से पहले स्क्रीन बंद करें
सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल और टीवी बंद कर दें। खाली समय में आउटडोर एक्टिविटी या किताब पढ़ने की आदत डालें।
क्यों जरूरी है समय रहते सावधानी
आज स्क्रीन से पूरी तरह दूरी बनाना संभव नहीं है, लेकिन सही आदतें अपनाकर इसके दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है। लगातार गर्दन और पीठ दर्द को नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर समस्या बन सकता है। यदि दर्द लंबे समय तक बना रहे तो विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।
यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी पर आधारित है। किसी भी प्रकार के लगातार दर्द, नींद की समस्या या मानसिक तनाव की स्थिति में योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

