By: Vikash Kumar (Vicky)
नई वित्तीय वर्ष की शुरुआत 1 अप्रैल से होने जा रही है और इसके साथ ही हाउस रेंट अलाउंस (HRA) क्लेम करने को लेकर नियमों में सख्ती बढ़ने की तैयारी है। खासतौर पर उन कर्मचारियों के लिए यह खबर बेहद महत्वपूर्ण है, जो अपने माता-पिता या अन्य रिश्तेदारों को किराया देकर HRA क्लेम करते हैं। आयकर विभाग ने ऐसे मामलों में पारदर्शिता और वैधता सुनिश्चित करने के लिए कुछ प्रक्रियात्मक कड़ाई करने के संकेत दिए हैं। अगर आप भी सैलरीड कर्मचारी हैं और HRA का लाभ लेते हैं, तो 1 अप्रैल से पहले इन जरूरी बातों को समझ लेना आपके लिए बेहद जरूरी है, वरना आपका क्लेम खारिज भी हो सकता है।

क्या है HRA और कैसे मिलता है लाभ?
हाउस रेंट अलाउंस (HRA) वेतनभोगी कर्मचारियों को मिलने वाला एक भत्ता है, जो किराए के मकान में रहने की स्थिति में टैक्स छूट दिलाता है। आयकर अधिनियम की धारा 10(13A) के तहत HRA पर टैक्स छूट मिलती है।
HRA छूट की गणना तीन शर्तों में से जो सबसे कम हो, उसके आधार पर की जाती है:
वास्तविक प्राप्त HRA
वेतन (बेसिक + DA) का 50% (मेट्रो शहरों में) या 40% (नॉन-मेट्रो में)
वास्तविक किराया – वेतन का 10%
इन तीनों में जो राशि सबसे कम होती है, वही टैक्स छूट के रूप में मान्य होती है।

रिश्तेदारों को किराया देकर HRA क्लेम: क्या है नियम?
आयकर कानून में ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है कि आप अपने माता-पिता या अन्य रिश्तेदार को किराया नहीं दे सकते। यदि आप वास्तव में उनके घर में किराए पर रह रहे हैं और बैंक ट्रांसफर या अन्य वैध माध्यम से किराया चुका रहे हैं, तो आप HRA क्लेम कर सकते हैं।
लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि:
घर का मालिक (जैसे माता-पिता) उस किराए को अपनी आय में दिखाएं।
किराया भुगतान बैंकिंग चैनल से हो।
रेंट एग्रीमेंट मौजूद हो।
PAN विवरण (यदि वार्षिक किराया 1 लाख से अधिक है) अनिवार्य हो।

1 अप्रैल से क्या बदल सकता है?
सूत्रों के अनुसार, आयकर विभाग अब फर्जी HRA क्लेम पर सख्ती करने जा रहा है। कई मामलों में देखा गया है कि कर्मचारी केवल टैक्स बचाने के लिए काल्पनिक रेंट एग्रीमेंट बनाकर HRA क्लेम कर लेते हैं।
1 अप्रैल से निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष निगरानी हो सकती है:
किराए की राशि का बैंक स्टेटमेंट से मिलान
मकान मालिक के ITR में किराए की आय की जांच
PAN और आधार लिंकिंग की पुष्टि
डिजिटल रेंट एग्रीमेंट की मांग
यदि इन दस्तावेजों में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो HRA छूट रद्द की जा सकती है और जुर्माना भी लग सकता है।

किन दस्तावेजों की होगी जरूरत?
HRA क्लेम को सुरक्षित रखने के लिए निम्न दस्तावेज तैयार रखें:
विधिवत रेंट एग्रीमेंट
मासिक किराया रसीद
बैंक ट्रांजेक्शन प्रूफ
मकान मालिक का PAN (यदि लागू)
मकान मालिक द्वारा किराए की आय को ITR में दर्शाना
यदि आप अपने माता-पिता को किराया देते हैं, तो यह भी सुनिश्चित करें कि वे उस आय पर आवश्यक टैक्स का भुगतान करें।
किन गलतियों से बचें?
नकद भुगतान से बचें
बिना एग्रीमेंट के क्लेम न करें
फर्जी पते या गलत जानकारी न दें
एक ही संपत्ति पर दो लोगों द्वारा HRA क्लेम से बचें
याद रखें, आयकर विभाग अब डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल वेरिफिकेशन का उपयोग कर रहा है। ऐसे में किसी भी तरह की गड़बड़ी आसानी से पकड़ी जा सकती है।

क्या पति-पत्नी एक-दूसरे को किराया देकर HRA ले सकते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, पति-पत्नी के बीच किराए का लेनदेन आमतौर पर संदेह की दृष्टि से देखा जाता है। यदि संपत्ति संयुक्त नाम पर है, तो HRA क्लेम करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे मामलों में स्पष्ट कानूनी सलाह लेना बेहतर है।
टैक्सपेयर्स के लिए सलाह
1 अप्रैल से पहले अपने सभी दस्तावेज अपडेट करें।
यदि किराया माता-पिता को दे रहे हैं, तो उन्हें भी आयकर रिटर्न फाइल करने के लिए कहें।
सैलरी स्ट्रक्चर और HRA घटक की समीक्षा करें।
जरूरत पड़े तो टैक्स कंसल्टेंट से सलाह लें।
नई वित्तीय वर्ष के साथ HRA क्लेम को लेकर पारदर्शिता और कड़ाई बढ़ने वाली है। यदि आप रिश्तेदारों को किराया देकर HRA का लाभ ले रहे हैं, तो 1 अप्रैल से पहले सभी दस्तावेजों को व्यवस्थित कर लें। सही तरीके से किया गया क्लेम पूरी तरह वैध है, लेकिन जरा सी लापरवाही आपको टैक्स नोटिस तक पहुंचा सकती है।
इसलिए समय रहते तैयारी कर लें और नियमों के अनुरूप ही HRA क्लेम करें।

