By: Vikash Kumar (Vicky)
ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आने के बाद पाकिस्तान में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। देश के कई बड़े शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं और ईरान के समर्थन में नारेबाजी कर रहे हैं। विरोध प्रदर्शन कई जगह हिंसक हो गए हैं, जिससे कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

पाकिस्तान के कराची, लाहौर, इस्लामाबाद और क्वेटा जैसे शहरों में प्रदर्शनकारियों ने जुलूस निकाले, टायर जलाए और मुख्य सड़कों को जाम कर दिया। कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुईं। सुरक्षा बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और कुछ इलाकों में धारा 144 लागू कर दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान में बड़ी शिया आबादी ईरान के साथ धार्मिक और वैचारिक जुड़ाव रखती है। अली खामेनेई को न सिर्फ ईरान बल्कि दुनियाभर के शिया समुदाय में एक प्रभावशाली धार्मिक नेता के रूप में देखा जाता था। उनकी मौत की खबर ने पाकिस्तान के शिया समुदाय में गहरा असर डाला है, जिसके चलते भावनात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान की सेना और सरकार की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर पर आरोप लग रहे हैं कि उनका झुकाव अमेरिका की ओर है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान की विदेश नीति में अमेरिका के साथ नजदीकी बढ़ाने के कारण ईरान के मुद्दे पर सरकार स्पष्ट रुख नहीं ले पा रही है।
कुछ संगठनों ने खुलकर कहा है कि पाकिस्तान को ईरान के साथ खड़ा होना चाहिए और क्षेत्रीय राजनीति में स्वतंत्र नीति अपनानी चाहिए। सोशल मीडिया पर भी #StandWithIran और #PakistanProtests जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान की संघीय सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। गृह मंत्रालय ने सभी प्रांतीय प्रशासन को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह घटनाक्रम पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति और विदेश नीति दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। एक तरफ जहां जनता का एक वर्ग ईरान के समर्थन में खुलकर सामने आ रहा है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान की कूटनीतिक मजबूरियां उसे संतुलित रुख अपनाने के लिए मजबूर कर रही हैं।

ईरान और अमेरिका के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। ऐसे में खामेनेई की मौत के बाद क्षेत्रीय समीकरण बदल सकते हैं। पाकिस्तान को इस स्थिति में बेहद सावधानी से कदम उठाने होंगे ताकि आंतरिक शांति और अंतरराष्ट्रीय संबंध दोनों प्रभावित न हों।

फिलहाल पाकिस्तान के कई शहरों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। हालांकि विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

