By: Vikash, Mala Mandal
देवघर। जिले में विधिक जागरूकता को मजबूत करने और आम जनता को उनके अधिकारों के प्रति सजग बनाने के उद्देश्य से समाहरणालय सभागार में एक दिवसीय विधिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यशाला की संयुक्त अध्यक्षता माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार श्री कौशल किशोर झा, उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी श्री नमन प्रियेश लकड़ा एवं पुलिस अधीक्षक श्री सौरभ द्वारा की गई।

इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य कानून से जुड़ी जटिलताओं को सरल तरीके से समझाना, प्रशासनिक और न्यायिक प्रणाली के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा अधिकारियों और आम नागरिकों को विधिक रूप से जागरूक बनाना था।
विधिक साक्षरता पर विशेष जोर
कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री कौशल किशोर झा ने कहा कि कानून की जानकारी केवल न्यायाधीशों और वकीलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि हर नागरिक को अपने अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि “विधिक साक्षरता एक ऐसा सशक्त माध्यम है, जिसके जरिए आम लोग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर न्याय प्राप्त कर सकते हैं।” उन्होंने विशेष रूप से निःशुल्क कानूनी सहायता और मध्यस्थता (Mediation) के माध्यम से मामलों के त्वरित निपटारे की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा जरूरतमंद लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान की जाती है, जिससे समाज के कमजोर वर्गों को न्याय मिल सके।

न्यायपालिका और प्रशासन के बीच समन्वय
कार्यशाला में न्यायपालिका और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। न्यायाधीश ने कहा कि यदि प्रशासन और न्यायपालिका एक साथ मिलकर कार्य करें, तो पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सकता है और मामलों का निष्पादन भी तेजी से संभव होगा।
खनन कानूनों पर विस्तृत चर्चा
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में “माइनिंग मिनरल कानूनी नियमावली” पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें अवैध खनन, खनिजों के अवैध उत्खनन और उससे जुड़े कानूनी प्रावधानों के बारे में अधिकारियों को जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि अवैध खनन न केवल सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है। इसलिए इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है।

एफआईआर और शिकायत प्रक्रिया की जानकारी
कार्यशाला के दौरान अधिकारियों को एफआईआर दर्ज कराने की सही प्रक्रिया, शिकायत दर्ज करने के तरीके और संबंधित धाराओं के उपयोग के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। इससे प्रशासनिक अधिकारियों को कानून के सही क्रियान्वयन में मदद मिलेगी।
महिलाओं के अधिकारों पर जागरूकता
कार्यशाला में घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों पर विशेष चर्चा की गई। “घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005” के तहत महिलाओं को मिलने वाले अधिकारों जैसे निवास का अधिकार, भरण-पोषण और सुरक्षा के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। महिलाओं को यह भी बताया गया कि वे घरेलू हिंसा की स्थिति में हेल्पलाइन नंबर 181 और 1091 पर शिकायत दर्ज करा सकती हैं। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें।

नशा मुक्ति और NDPS एक्ट पर चर्चा
कार्यशाला में नशा मुक्ति और NDPS एक्ट (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट) पर भी विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों को नशे के दुष्प्रभावों और इससे जुड़े अपराधों के बारे में जानकारी दी गई। बताया गया कि NDPS एक्ट के तहत नशे से संबंधित अपराधों पर कड़ी सजा का प्रावधान है और समाज को नशा मुक्त बनाने के लिए प्रशासन और पुलिस को मिलकर काम करना होगा।
हिट एंड रन मामलों पर दिशा-निर्देश
कार्यशाला में हिट एंड रन मामलों के त्वरित निष्पादन और पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों को बताया गया कि ऐसे मामलों में देरी से न्याय मिलने पर पीड़ितों को भारी नुकसान होता है, इसलिए त्वरित कार्रवाई जरूरी है।

उपायुक्त का संबोधन: विकास और कानून का संबंध
उपायुक्त श्री नमन प्रियेश लकड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि विकास और कानून एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कहा कि “कानून केवल दंड देने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह विकास को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का एक सशक्त उपकरण है।” उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में कानूनी प्रावधानों का सख्ती से पालन करें, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और जनता का विश्वास प्रशासन पर मजबूत हो।
पुलिस अधीक्षक का संदेश: विश्वास का सेतु
पुलिस अधीक्षक श्री सौरभ ने पुलिस और जनता के बीच विश्वास को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जनता का सहयोग बेहद जरूरी है। उन्होंने जनसुरक्षा से जुड़े तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पुलिस को संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ कार्य करना चाहिए।

कई अधिकारी और संस्थाएं रही मौजूद
कार्यशाला में उप विकास आयुक्त श्री पीयूष सिन्हा, अनुमंडल पदाधिकारी देवघर श्री रवि कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी मधुपुर श्री राजीव कुमार, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला कल्याण पदाधिकारी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, जिला खनन पदाधिकारी, श्रम अधीक्षक सहित कई विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

इसके अलावा बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, डालसा, चाइल्ड हेल्पलाइन, सखी वन-स्टॉप सेंटर, PCI-UNICEF और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
यह कार्यशाला न केवल अधिकारियों के लिए ज्ञानवर्धक साबित हुई, बल्कि यह समाज में विधिक जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। इस तरह के आयोजन से आम जनता को कानून की जानकारी मिलेगी और वे अपने अधिकारों के प्रति अधिक जागरूक बन सकेंगे।

