Deoghar: श्रावणी मेला के दौरान देवघर शहर में मांस-मछली की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध, 11 जुलाई से 9 अगस्त तक लागू रहेगा आदेश।

देवघर। विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेला के मद्देनज़र देवघर जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए 11 जुलाई से 9 अगस्त 2025 तक देवघर शहरी क्षेत्र और कांवरियों के मार्गों में मांस, मछली, मुर्गा और अंडा आदि की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह निर्णय श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं और शांति-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी श्री नमन प्रियेश लकड़ा ने जानकारी देते हुए बताया कि श्रावणी मेला में देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु कांवर लेकर बाबा बैद्यनाथधाम पहुंचते हैं। ये कांवरिये बेहद श्रद्धा और सात्विक भाव से देवघर आते हैं, जहाँ वे पूजा-अर्चना से पूर्व केवल शुद्ध और सात्विक भोजन का ही सेवन करते हैं। इस धार्मिक परंपरा और भावनाओं को देखते हुए, मांसाहार की बिक्री से उनकी भावनाएं आहत हो सकती हैं, जिससे शांति व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है।
इसी को लेकर अनुमंडल पदाधिकारी-सह-अनुमंडल दंडाधिकारी, देवघर द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163(0) के तहत प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए यह आदेश पारित किया गया है। आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस अवधि के दौरान कोई भी व्यक्ति, दुकानदार या प्रतिष्ठान देवघर शहर और कांवरियों के मार्ग में किसी भी प्रकार का मांस, मछली, मुर्गा या अंडा बेच नहीं सकेगा। आदेश उल्लंघन की स्थिति में संबंधित के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
देवघर प्रशासन ने व्यवसायियों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि यह निर्णय केवल एक धार्मिक आयोजन की मर्यादा बनाए रखने के लिए लिया गया है। मेला क्षेत्र की गरिमा और श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
श्रावणी मेला एक माह तक चलने वाला वह पर्व है, जिसमें लाखों कांवरिये विभिन्न राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा और नेपाल तक से आकर सुल्तानगंज से गंगा जल लेकर लगभग 105 किमी की पैदल यात्रा कर बाबा बैद्यनाथधाम पहुंचते हैं। इस दौरान देवघर की आबादी कई गुना बढ़ जाती है और पूरे शहर में सात्विकता, श्रद्धा और अनुशासन की मिसाल देखने को मिलती है।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधित अवधि में नगर निगम, पुलिस प्रशासन, खाद्य सुरक्षा विभाग समेत संबंधित विभागों की टीमें लगातार निगरानी करेंगी और आदेश के उल्लंघन की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही शहर के होटल, ढाबों और रेस्तराओं को भी स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे इन प्रतिबंधित खाद्य सामग्रियों की न तो बिक्री करें और न ही इनका उपयोग भोजन में करें। साथ ही आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे मेला अवधि के दौरान प्रशासन का सहयोग करें और अपने शहर की धार्मिक गरिमा बनाए रखने में भागीदारी निभाएं।
निष्कर्षतः, देवघर प्रशासन का यह कदम धार्मिक परंपराओं और श्रद्धालुओं की आस्था की रक्षा के उद्देश्य से उठाया गया है, जो मेला की सफलता और शांति-व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगा।


