CBSE ने लागू किए Internal Exams में Open-Book Assessments — कक्षा 9 में 2026-27 से बदलाव

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने हाल ही में कक्षा 9 के लिए आंतरिक परीक्षाओं (Internal Exams) में एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है। बोर्ड ने ओपन-बुक असेसमेंट (Open-Book Assessment – OBA) प्रारूप को 2026-27 शैक्षणिक सत्र से लागू करने का निर्णय लिया है ।
प्रस्तावना और पृष्ठभूमि
यह फैसला NEP 2020 और NCFSE 2023 की सिफारिशों के अनुरूप है, जो शिक्षा में रटंत से हटकर विश्लेषणात्मक क्षमता, अवधारणा-बोध, और व्यावहारिक कौशल पर ज़ोर देती हैं ।
पहले भी, CBSE ने 2014 से 2017-18 तक OTBA (Open Text Based Assessment) प्रारूप लागू किया था, लेकिन इसे सीमित असर और रचनात्मकता ना बढ़ाने के कारण स्थगित कर दिया गया था ।
पायलट अध्ययन और निर्णय प्रक्रिया
दिसंबर 2023 में पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुआ, जिसमें कक्षा 9 से 12 तक की कक्षाओं में विभिन्न विषयों पर ओपन-बुक परीक्षण किए गए थे। इस दौरान शिक्षक और छात्रों की प्रतिक्रियाएँ, परीक्षा की अवधि और व्यवहार्यता जैसी पहलुओं का विश्लेषण किया गया ।
जून 2025 में CBSE की Governing Body ने इसे मंजूर कर लिया, जिसके बाद अब यह बदलाव 2026-27 में लागू होगा ।

नया फ्रेमवर्क — क्या, कैसे, और कौन-कौन?
विषय क्षेत्र: भाषा, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे मुख्य विषयों पर ओपन-बुक असेसमेंट लागू होगा ।
शैक्षिक स्थापनाएँ: यह प्रारूप स्कूलों द्वारा आंतरिक परीक्षाओं के हिस्से के रूप में लागू किया जाएगा, जो प्रत्येक सत्र में तीन पेपर-पेन परीक्षाओं में शामिल होगा ।
वैकल्पिक प्रकृति: यह अनिवार्य नहीं होगा—जो स्कूल चाहें, इस फ्रेमवर्क को अपना सकते हैं; बोर्ड मार्गदर्शन और नमूना प्रश्नावली उपलब्ध कराएगा ।
उद्देश्य और लाभ
घाटे हुए तनाव और रटंत से मुक्ति: छात्रों पर बोझ कम होगा, क्योंकि उन्हें केवल तथ्यों याद रखने की बजाय समझ और विश्लेषण पर ध्यान देना होगा ।
उच्च-स्तरीय सोच और अभ्यास-आधारित मूल्यांकन: प्रश्न अब सिर्फ तथ्यों पर आधारित नहीं, बल्कि अवधारणाएं व्यावहारिक परिप्रेक्ष्य में लागू करने होंगे ।
शिक्षकों का समर्थन: पायलट अध्ययन में शिक्षकों ने इस प्रारूप को सकारात्मक रूप से स्वीकार किया, जो इस पहल की सफलता की कुंजी है ।
प्रतिक्रिया और चुनौतियाँ
शैक्षणिक तैयारियाँ: नोएडा और गाजियाबाद के स्कूलों के प्रधानाचार्यों ने स्वागत करते हुए कहा कि सवाल विश्लेषणात्मक और आवेदन-आधारित होने चाहिए; अन्यथा छात्र सिर्फ किताबों से उत्तर कॉपी कर सकते हैं ।
असमान तैयारियाँ: DLF स्कूल की Seema Jerath ने कहा कि शिक्षण संस्थाएँ पूरी तरह से तैयार नहीं हैं और इस बदलाव को लागू करने में जोखिम है — शिक्षकों को समय और प्रशिक्षण की आवश्यकता है ।
नैतिकता और निष्पक्षता: Grad International School की प्रधानाचार्या Aditi Basu Roy ने जोर दिया कि परीक्षा प्रक्रिया में ईमानदारी बनाए रखना ज़रूरी है पुस्तक पहुंच सुविधा का उपयोग एक शॉर्टकट नहीं बनना चाहिए ।
CBSE द्वारा प्रस्तावित यह बदलाव—कक्षा 9 के आंतरिक परीक्षाओं में ओपन-बुक असेसमेंट—रटंत से हटकर अवधारणा-आधारित, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक शिक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालांकि इसे अब अनिवार्य नहीं किया गया है, परंतु मार्गदर्शन, नमूना प्रश्नपत्र और शिक्षक प्रशिक्षण के साथ, यह मॉडल शिक्षण और मूल्यांकन प्रणाली में सुधार कर सकता है। इस पहल का उद्देश्य है छात्रों में सृजनात्मक सोच, समझ का विस्तार, और संकट-समाधान की क्षमता बढ़ाना, ताकि वे 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए बेहतर ढंग से तैयार हों।

