
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को करीब चार साल का समय हो चुका है, लेकिन अब तक इसका कोई हल निकलता नज़र नहीं आ रहा है। हर बीतते दिन के साथ हालात और भी भयावह होते जा रहे हैं। ताज़ा घटनाक्रम में रूस ने पहली बार यूक्रेन की कैबिनेट बिल्डिंग को निशाना बनाया है। यह हमला राजधानी कीव में किया गया और इससे पूरे यूरोप में चिंता की लहर दौड़ गई है।
दूसरी ओर, यूक्रेन ने भी रूस को करारा जवाब दिया और रूस की एक अहम ऑयल पाइपलाइन को टारगेट करके बड़ा नुकसान पहुंचाया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह हमला युद्ध को और ज्यादा खतरनाक मोड़ पर ले जा सकता है।
रूस का बड़ा हमला: कैबिनेट बिल्डिंग बनी निशाना
यूक्रेन की कैबिनेट बिल्डिंग पर रूसी एयरस्ट्राइक युद्ध की अब तक की सबसे बड़ी घटनाओं में गिनी जा रही है। अब तक रूस ने सैन्य ठिकानों, हथियारों के भंडार और ऊर्जा संरचनाओं को निशाना बनाया था, लेकिन पहली बार किसी प्रमुख सरकारी इमारत पर सीधा हमला किया गया है।
हमले के समय इमारत में दर्जनों सरकारी अधिकारी मौजूद थे। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में कई लोग घायल हुए हैं और भारी नुकसान भी हुआ है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों ने उच्च अधिकारियों को सुरक्षित निकालने में सफलता पाई।
यूक्रेन का पलटवार: रूस की ऑयल पाइपलाइन पर हमला
इस हमले के तुरंत बाद यूक्रेन ने रूस की ऑयल पाइपलाइन को टारगेट किया। यह पाइपलाइन रूस की ऊर्जा सप्लाई और अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। यूक्रेन की सेना का दावा है कि इस हमले से रूस को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है और तेल सप्लाई बाधित हो गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऊर्जा संसाधनों पर हमला करना रूस के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। इससे न केवल रूस की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी बल्कि यूरोप और एशिया तक तेल की सप्लाई पर असर पड़ेगा।

यूरोप और नाटो की चिंता बढ़ी

यूरोप और नाटो की चिंता बढ़ी
कैबिनेट बिल्डिंग पर हमला और उसके जवाब में ऑयल पाइपलाइन का नुकसान, यूरोप के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर रहा है। नाटो (NATO) ने इसे बेहद खतरनाक घटनाक्रम बताया है। पश्चिमी देशों को आशंका है कि अगर यह सिलसिला बढ़ा तो युद्ध का दायरा और बढ़ सकता है।
अमेरिका और यूरोपीय देशों ने एक बार फिर रूस से पीछे हटने और बातचीत की टेबल पर आने की अपील की है। वहीं, रूस का कहना है कि जब तक यूक्रेन “पश्चिमी ताकतों” के इशारे पर चलता रहेगा, तब तक शांति असंभव है।
चार साल बाद भी युद्ध का अंत दूर
रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत फरवरी 2022 में हुई थी, जब रूस ने यूक्रेन पर सैन्य अभियान छेड़ा था। शुरुआत में यह माना जा रहा था कि यह जंग कुछ हफ्तों या महीनों में खत्म हो जाएगी, लेकिन अब चार साल का लंबा समय बीत चुका है।
इस दौरान लाखों लोग मारे गए हैं, करोड़ों लोग शरणार्थी बनकर दूसरे देशों में चले गए हैं और यूक्रेन के कई शहर खंडहर बन चुके हैं। रूस पर लगातार आर्थिक प्रतिबंध लगे हैं लेकिन इसके बावजूद उसने सैन्य अभियान को जारी रखा है।
युद्ध के नए चरण में प्रवेश
कैबिनेट बिल्डिंग और ऑयल पाइपलाइन पर हमले ने यह साफ कर दिया है कि यह युद्ध अब नए चरण में प्रवेश कर चुका है। पहले यह संघर्ष सैन्य ठिकानों तक सीमित था, लेकिन अब यह सीधे सरकारी संस्थानों और आर्थिक ढांचे तक पहुंच चुका है।
इससे यह संभावना बढ़ गई है कि आने वाले समय में दोनों देश एक-दूसरे पर और बड़े हमले कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह स्थिति बेहद गंभीर है क्योंकि यह युद्ध वैश्विक ऊर्जा संकट और आर्थिक मंदी को और गहरा कर सकता है।
रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ी यह जंग लगातार और अधिक खूनी और विनाशकारी होती जा रही है। रूस का कैबिनेट बिल्डिंग पर हमला और यूक्रेन का ऑयल पाइपलाइन पर जवाबी हमला साबित करता है कि दोनों ही देश अब किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
युद्ध कब और कैसे खत्म होगा, यह कोई नहीं जानता। लेकिन इतना तय है कि इसके असर से केवल रूस और यूक्रेन ही नहीं बल्कि पूरा विश्व समुदाय प्रभावित होगा। अब सारी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या आने वाले दिनों में कोई शांति वार्ता शुरू होती है या यह संघर्ष और लंबा खिंचता है।


