
रांची: झारखंड में फोरेंसिक साइंस के क्षेत्र में लंबे समय से चल रही सुस्ती अब खत्म होती नजर आ रही है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने झारखंड हाईकोर्ट को सूचित किया है कि राज्य में फोरेंसिक साइंस को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसके साथ ही विशेषज्ञों की भर्ती, आधुनिक उपकरणों की खरीदारी और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को गति देने की दिशा में पहल की जा रही है। इस पहल से न केवल आपराधिक मामलों की जांच में तेजी आएगी, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया भी सशक्त होगी।
फोरेंसिक साइंस की मौजूदा स्थिति
झारखंड में फोरेंसिक साइंस की मौजूदा व्यवस्था कई वर्षों से संसाधनों की कमी और विशेषज्ञ कर्मचारियों के अभाव से जूझ रही है। अपराधों की जांच में देरी का एक बड़ा कारण फोरेंसिक रिपोर्ट्स में होने वाली देरी रही है। कई मामलों में DNA टेस्ट, नार्को एनालिसिस, फिंगरप्रिंट जांच और अन्य वैज्ञानिक परीक्षण समय पर नहीं हो पाते, जिससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है।
हाईकोर्ट ने कई बार राज्य सरकार से इस मुद्दे पर जवाब मांगा था। अब जेपीएससी की ओर से दी गई जानकारी से उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में यह स्थिति बदलेगी।

जेपीएससी की ओर से दी गई जानकारी

जेपीएससी की ओर से दी गई जानकारी
झारखंड लोक सेवा आयोग ने हाईकोर्ट में दायर हलफनामे में कहा कि फोरेंसिक साइंस प्रयोगशालाओं में विशेषज्ञ पदों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके तहत वैज्ञानिक अधिकारी, तकनीकी सहायक, लैब एनालिस्ट और DNA विशेषज्ञों के पदों पर जल्द नियुक्तियां होंगी।
साथ ही, आयोग ने बताया कि फोरेंसिक साइंस प्रयोगशालाओं को अत्याधुनिक उपकरणों से लैस करने की प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है। आने वाले समय में हर जिला मुख्यालय में फोरेंसिक यूनिट स्थापित करने की योजना है।
अपराध जांच में फोरेंसिक साइंस का महत्व
फोरेंसिक साइंस अपराध जांच की रीढ़ मानी जाती है। इसके माध्यम से अपराध स्थलों से मिले सबूतों की वैज्ञानिक जांच होती है, जो न्यायालय में मजबूत साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं। फोरेंसिक रिपोर्ट्स के आधार पर कई गंभीर मामलों में आरोपियों को सजा दिलाने में मदद मिलती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड जैसे खनिज संपन्न और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण राज्य में अपराधों का स्वरूप भी जटिल होता है। हत्या, दुष्कर्म, साइबर क्राइम और नक्सल घटनाओं की जांच में फोरेंसिक साइंस अहम भूमिका निभा सकती है।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद बढ़ी रफ्तार
झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि अपराधों की जांच और न्याय प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए फोरेंसिक सुविधाओं को मजबूत करना बेहद जरूरी है। इसके बाद ही जेपीएससी और संबंधित विभागों ने तेजी से कार्रवाई शुरू की।
विशेषज्ञों की कमी होगी दूर
वर्तमान में झारखंड के पास फोरेंसिक विशेषज्ञों की संख्या बेहद कम है। कई बार मामलों को पड़ोसी राज्यों जैसे बिहार, पश्चिम बंगाल या दिल्ली की प्रयोगशालाओं में भेजना पड़ता है, जिससे जांच में महीनों की देरी हो जाती है। नई भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
प्रशिक्षण और अनुसंधान पर भी जोर
जेपीएससी ने हाईकोर्ट को बताया कि भर्ती के साथ-साथ फोरेंसिक साइंस के क्षेत्र में प्रशिक्षण और अनुसंधान को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं के साथ समझौते किए जाने पर विचार चल रहा है।

जनता को होगा लाभ
फोरेंसिक साइंस की सुविधाओं के विस्तार से आम जनता को सीधा लाभ मिलेगा। तेज और सटीक जांच से निर्दोष लोगों को बेवजह के आरोपों से राहत मिलेगी, जबकि असली अपराधियों को सजा मिलने में देरी नहीं होगी। इससे कानून-व्यवस्था पर लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा।
राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व
राज्य सरकार इस पहल को अपने प्रशासनिक सुधारों के हिस्से के रूप में भी देख रही है। फोरेंसिक साइंस की मजबूती न केवल अपराधों की रोकथाम में सहायक होगी, बल्कि सरकार की छवि को भी सुधारने में मदद करेगी।

