
फर्जी डिग्री से नौकरी करने वाले शिक्षक का भंडाफोड़
शिक्षा विभाग ने एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए उस शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है, जो कथित रूप से फर्जी बीएड डिग्री के आधार पर वर्षों से नौकरी कर रहा था। विभागीय जांच के बाद प्रमाणित हुआ कि उसकी डिग्री मान्य नहीं है। अब शिक्षक को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है और आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
कैसे हुआ फर्जी डिग्री का खुलासा?
जिले के शिक्षा विभाग को कई शिकायतें मिली थीं कि कुछ शिक्षक फर्जी प्रमाणपत्र के सहारे नौकरी कर रहे हैं। इसी क्रम में संबंधित शिक्षक की डिग्री की जांच कराई गई। सत्यापन के लिए जिस विश्वविद्यालय का नाम प्रस्तुत किया गया था, वहां से जवाब आया कि उक्त डिग्री फर्जी है और उनके रिकॉर्ड में इसका कोई उल्लेख नहीं है।

कितने साल से कर रहा था नौकरी?
जांच रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षक पिछले कई वर्षों से इस स्कूल में कार्यरत था। उसे सरकारी वेतनमान भी मिल रहा था। फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नियुक्ति पाना न केवल धोखाधड़ी है, बल्कि सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग भी है।
शिक्षा विभाग का रुख
शिक्षा विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षक को नोटिस जारी किया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यदि शिक्षक संतोषजनक जवाब नहीं दे पाता, तो उसकी नियुक्ति रद्द कर दी जाएगी और रिकवरी की कार्रवाई भी की जाएगी।
कानूनी कार्रवाई की तैयारी
विभाग ने संकेत दिया है कि यह केवल बर्खास्तगी का मामला नहीं है, बल्कि धोखाधड़ी और जालसाजी के तहत मुकदमा भी दर्ज किया जा सकता है। फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करना भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं के अंतर्गत अपराध है।
अन्य शिक्षकों के लिए चेतावनी
इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने अन्य शिक्षकों को भी चेतावनी दी है कि जो भी फर्जी डिग्री या प्रमाणपत्र का इस्तेमाल कर रहे हैं, वे स्वयं सामने आकर सत्यापन करवा लें। अन्यथा सख्त कार्रवाई तय है।
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
फर्जी डिग्रियों के सहारे नौकरी पाने का यह मामला शिक्षा व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े करता है। ऐसे शिक्षक न केवल छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हैं, बल्कि शिक्षण प्रणाली की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करते हैं।
जाँच की प्रक्रिया
1. शिकायत दर्ज होने के बाद विभाग ने प्राथमिक जांच करवाई।
2. विश्वविद्यालय से डिग्री की प्रामाणिकता की पुष्टि की गई।
3. विश्वविद्यालय ने साफ किया कि उक्त डिग्री फर्जी है।
4. शिक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
5. जवाब आने के बाद अंतिम कार्रवाई होगी।

आगे क्या होगा?
अब शिक्षक को निर्धारित समय में अपना पक्ष रखना होगा। यदि वह यह साबित करने में असफल रहता है कि उसकी डिग्री वैध है, तो उसकी नौकरी समाप्त की जाएगी और उससे वेतन की रिकवरी भी संभव है। साथ ही उसे ब्लैकलिस्ट कर भविष्य में किसी भी शैक्षणिक संस्थान में नौकरी से वंचित किया जा सकता है।
समाज पर असर
फर्जी डिग्री से नौकरी करने वाले शिक्षक न केवल शिक्षा प्रणाली को कमजोर करते हैं, बल्कि मेहनत से पढ़ाई करने वाले वास्तविक उम्मीदवारों के अवसर भी छीन लेते हैं। यह युवाओं में बेरोजगारी की समस्या को और बढ़ावा देता है।
फर्जी डिग्री का इस्तेमाल करके सरकारी नौकरी पाना एक गंभीर अपराध है। यह मामला शिक्षा विभाग की सतर्कता का परिणाम है और आने वाले समय में ऐसे मामलों पर और भी कठोर कार्रवाई होने की संभावना है।

