

परीक्षा की तैयारी में बच्चे ने 14 घंटे तक की लगातार पढ़ाई
थकावट और डिहाइड्रेशन से बिगड़ी तबीयत, डॉक्टरों ने तुरंत किया भर्ती
शिक्षा विशेषज्ञ बोले – बच्चों पर दबाव नहीं डालें, संतुलित दिनचर्या जरूरी
WHO की रिपोर्ट: अत्यधिक पढ़ाई और स्क्रीन टाइम बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक
रांची: शिक्षा की होड़ और अभिभावकों की अपेक्षाओं के दबाव में एक 11 वर्षीय बच्चे को 14 घंटे लगातार पढ़ाई करने के बाद अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। बच्चा परीक्षा की तैयारी में लगातार किताबों और कॉपियों में डूबा रहा। लंबे समय तक पढ़ाई के कारण उसे थकावट, सिरदर्द और डिहाइड्रेशन की समस्या हुई। परिवार ने तुरंत उसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने स्पष्ट कहा कि बच्चों पर इस तरह का दबाव खतरनाक हो सकता है।
घटना कैसे हुई?
जानकारी के अनुसार, 11 वर्षीय बच्चा कक्षा 6 का छात्र है। आने वाली परीक्षाओं में अच्छे अंक लाने के लिए उसने सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक लगातार पढ़ाई की। बीच-बीच में उसने सिर्फ खाना और पानी लिया लेकिन आराम नहीं किया। देर रात अचानक उसे तेज सिरदर्द और उल्टी की शिकायत हुई। परिजन घबरा गए और तुरंत उसे नजदीकी अस्पताल लेकर पहुंचे।
डॉक्टरों की रिपोर्ट
डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चे को थकावट (Fatigue), डिहाइड्रेशन और माइग्रेन अटैक हुआ। लगातार लंबे समय तक पढ़ाई और नींद की कमी से उसकी स्थिति बिगड़ी। डॉक्टरों ने उसे आराम, सही आहार और संतुलित दिनचर्या अपनाने की सलाह दी है।
डॉ. अजय कुमार, न्यूरोलॉजिस्ट, रांची:
“बच्चों के मस्तिष्क का विकास हो रहा होता है। लगातार 14 घंटे पढ़ाई करना उनके लिए शारीरिक और मानसिक दोनों दृष्टि से खतरनाक है। 10-12 साल के बच्चों को रोजाना कम से कम 8-10 घंटे की नींद और बीच-बीच में खेलकूद जरूरी है।”
शिक्षा विशेषज्ञों की राय
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा के डर और अभिभावकों की अपेक्षाओं के कारण बच्चे पढ़ाई में अति कर जाते हैं। यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य को बिगाड़ती है बल्कि पढ़ाई की क्षमता को भी घटा देती है।
संतुलित समय सारणी बनाना जरूरी है।
हर 1-2 घंटे बाद ब्रेक देना चाहिए।
बच्चों को खेलकूद और क्रिएटिव गतिविधियों के लिए समय देना जरूरी है।
पैरेंट्स के लिए जरूरी सलाह
1. बच्चों को पढ़ाई का अत्यधिक दबाव न दें।
2. स्टडी टाइम टेबल को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटें।
3. बच्चों की नींद और खानपान का विशेष ध्यान रखें।
4. स्क्रीन टाइम और किताबों का बैलेंस बनाएँ।
5. बच्चों को आउटडोर गेम्स और मनोरंजन के लिए प्रेरित करें।
बैकग्राउंड और रिसर्च
WHO की रिपोर्ट (2023): 10 से 15 साल के बच्चों को औसतन 8–10 घंटे की नींद जरूरी।
NCERT सर्वे: 70% बच्चे परीक्षा के दौरान तनाव महसूस करते हैं।
AIIMS स्टडी: अत्यधिक पढ़ाई और तनाव बच्चों में डिप्रेशन और माइग्रेन का कारण बन सकता है।
यह घटना बताती है कि पढ़ाई जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी है संतुलित जीवनशैली। बच्चों को लंबे समय तक किताबों में डूबो देना उनकी सेहत के लिए घातक हो सकता है। पढ़ाई, नींद, खेलकूद और परिवार के साथ समय – सभी का सही संतुलन ही बच्चे को स्वस्थ और सफल बना सकता है।



