
बिहार की राजनीति में इन दिनों छठ पर्व को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। जन अधिकार पार्टी (JAP) के प्रमुख और मधेपुरा से सांसद रहे पप्पू यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर (PK) पर तीखे शब्दों में हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि “प्रधानमंत्री मोदी को 11 सालों में छठ की याद क्यों नहीं आई?”। साथ ही पप्पू यादव ने ओवैसी और प्रशांत किशोर पर भी बिहार के लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया।
छठ महापर्व और बिहार की राजनीति
छठ महापर्व बिहार की पहचान माना जाता है। यह पर्व लोक आस्था, विश्वास और त्याग का प्रतीक है। लाखों लोग छठ व्रत करके सूर्य देव और छठी मैया की पूजा करते हैं। ऐसे में जब भी कोई नेता या राजनीतिक दल छठ का जिक्र करता है तो वह सीधे तौर पर बिहार की भावनाओं से जुड़ता है। यही वजह है कि छठ को लेकर राजनीति का माहौल गरमा जाता है।
पप्पू यादव ने इसी भावनात्मक मुद्दे को उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि 11 सालों से केंद्र की सत्ता में रहने के बावजूद प्रधानमंत्री ने छठ पर्व पर कोई खास संदेश नहीं दिया और न ही बिहार के इस बड़े पर्व के महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा दिया।

पप्पू यादव का मोदी पर वार
पप्पू यादव ने कहा कि जब चुनाव आते हैं तो प्रधानमंत्री बिहार की जनता से जुड़ने के लिए कई तरह के भाषण देते हैं, लेकिन छठ जैसे बड़े पर्व की अनदेखी क्यों की जाती है? उन्होंने सवाल किया –
“क्या छठ बिहार और पूर्वांचल की पहचान नहीं है? प्रधानमंत्री जी ने कभी इसे राष्ट्रीय पर्व का दर्जा देने पर विचार क्यों नहीं किया?”
पप्पू यादव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी बढ़ रही है। ऐसे में उनका यह हमला प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर सकता है।
ओवैसी पर तंज
पप्पू यादव ने एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि ओवैसी केवल बिहार और उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक राजनीति करने आते हैं। उनका उद्देश्य सिर्फ मुस्लिम वोटों को बांटना है। पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि ओवैसी की वजह से कई बार धर्मनिरपेक्ष वोटों का बंटवारा होता है जिससे बीजेपी को फायदा मिलता है।
उन्होंने कहा –
“ओवैसी साहब बिहार की गरीबी, बेरोजगारी और स्वास्थ्य संकट पर क्यों नहीं बोलते? क्या उनका एजेंडा सिर्फ धार्मिक राजनीति करना है?”
प्रशांत किशोर पर निशाना
प्रशांत किशोर (PK) जो चुनावी रणनीतिकार से नेता बने हैं, उन पर भी पप्पू यादव ने सीधा वार किया। उन्होंने कहा कि पीके लगातार बिहार के गांव-गांव जाकर जनसंपर्क कर रहे हैं, लेकिन उनका मकसद साफ नहीं है।
पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि –
“प्रशांत किशोर लोगों को सपनों का जाल दिखाते हैं, लेकिन उनका कोई ठोस राजनीतिक आधार नहीं है। वे सिर्फ अपनी इमेज बनाने और लोगों को गुमराह करने का काम कर रहे हैं।”

बिहार की जनता के मुद्दे बनाम राजनीतिक बयानबाजी
बिहार की राजनीति में अक्सर जाति, धर्म और त्यौहारों के नाम पर वोटों की गोलबंदी होती है। पप्पू यादव ने इसी पर जोर देते हुए कहा कि असली मुद्दे –
बेरोजगारी
शिक्षा
स्वास्थ्य
उद्योग
किसानों की समस्या
इन पर कोई चर्चा नहीं करता। नेता केवल भावनात्मक मुद्दे उठाकर जनता को बरगलाने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने कहा कि छठ जैसे पर्व की आड़ में नेताओं को बिहारियों की असल समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
चुनावी समीकरण और छठ का महत्व
बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। छठ महापर्व के दौरान अगर कोई नेता इस पर्व को लेकर बड़ा ऐलान करता है तो उसका सीधा असर वोट बैंक पर पड़ सकता है। खासकर पूर्वांचल और बिहार के प्रवासी लोग जो पूरे देश और विदेश में छठ मनाते हैं, उनकी भावनाओं को समझना किसी भी राजनीतिक दल के लिए बेहद जरूरी है।
विपक्ष की रणनीति
पप्पू यादव का यह बयान विपक्षी खेमे की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें वे बीजेपी और प्रधानमंत्री मोदी को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस और आरजेडी पहले ही केंद्र सरकार पर बिहार की उपेक्षा का आरोप लगाते रहे हैं। अब पप्पू यादव का छठ वाला मुद्दा विपक्ष को और मजबूत करने का काम कर सकता है।
ओवैसी और PK की भूमिका
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओवैसी और प्रशांत किशोर दोनों ही बिहार की राजनीति में नए फैक्टर के रूप में उभर रहे हैं। जहां ओवैसी मुस्लिम वोटों में सेंध लगाने की कोशिश करते हैं, वहीं प्रशांत किशोर युवाओं और पढ़े-लिखे वर्ग को जोड़ने की रणनीति बना रहे हैं।
पप्पू यादव ने दोनों पर निशाना साधकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे बिहार के हितैषी नहीं, बल्कि केवल अपने-अपने स्वार्थ के लिए राजनीति कर रहे हैं।
छठ महापर्व बिहार और पूर्वांचल की आत्मा से जुड़ा त्योहार है। ऐसे में इस पर्व को लेकर राजनीति होना लाजमी है। पप्पू यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, असदुद्दीन ओवैसी और प्रशांत किशोर पर जो सवाल खड़े किए हैं, वह आने वाले चुनावी माहौल को और गरमा सकते हैं।
अब देखना यह होगा कि प्रधानमंत्री मोदी या बीजेपी की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है और क्या विपक्ष इस मुद्दे को चुनावी हथियार बना पाएगा।

