
भागलपुर। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की आहट के बीच भागलपुर का मशहूर भागलपुरी सिल्क (Bhagalpuri Silk) और लिनेन फैब्रिक एक बार फिर सुर्खियों में है। चुनावी मौसम में नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं तक सभी के बीच पारंपरिक और आकर्षक पहनावे की मांग तेजी से बढ़ रही है। खासकर रैलियों, जनसभाओं और पार्टी मीटिंग्स में नेता और समर्थक अपनी अलग पहचान बनाने के लिए भागलपुरी सिल्क की ओर रुख कर रहे हैं।
चुनावी फैशन में भागलपुरी सिल्क का क्रेज
भागलपुर को सदियों से “सिल्क सिटी” के नाम से जाना जाता है। यहां का सिल्क न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी अपनी खास पहचान रखता है। इस बार चुनावी माहौल में खासकर भागलपुरी सिल्क की कुर्ता-पायजामा, स्टोल और साड़ी की मांग बढ़ गई है। पार्टी कार्यकर्ता भी अपने रंगों और झंडों से मेल खाते परिधान सिलवाने के लिए कतार में हैं।
स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि इस बार की बिक्री पिछले चुनावों की तुलना में कई गुना ज्यादा है। विशेषकर नेताओं की पसंद लाइटवेट लिनेन कुर्ते और भागलपुरी सिल्क के स्टोल बन रहे हैं।

लिनेन फैब्रिक बना स्टाइल स्टेटमेंट
जहां पारंपरिक नेता भागलपुरी सिल्क को प्राथमिकता देते हैं, वहीं युवा और आधुनिक नेता व कार्यकर्ता लिनेन फैब्रिक को अपना रहे हैं। यह कपड़ा हल्का, आरामदायक और मौसम के अनुकूल है। इसके चलते छोटे शहरों से लेकर पटना और दिल्ली तक इसकी डिमांड लगातार बढ़ रही है।
भागलपुर के कपड़ा कारोबारियों का कहना है कि “लिनेन फैब्रिक की मांग पिछले दो सालों में दोगुनी हो चुकी है। खासकर चुनावी मौसम में ग्राहक पहले से ही बुकिंग करा रहे हैं।”
सिल्क सिटी के बुनकरों को मिला सहारा
भागलपुर के बुनकर और सिल्क उद्योग से जुड़े कारीगर इस बढ़ती मांग से बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि चुनावी मौसम उनके लिए त्योहारी सीजन जैसा होता है। इस दौरान न केवल बिक्री बढ़ती है बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होते हैं।
करीब 30 हजार से अधिक परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से भागलपुरी सिल्क उद्योग से जुड़े हुए हैं। कपड़े की बढ़ती डिमांड से इन परिवारों की आमदनी में इजाफा हुआ है।

राजनीति और परंपरा का संगम
विशेषज्ञों का कहना है कि नेताओं के लिए परिधान सिर्फ कपड़ा नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश भी होते हैं। सफेद लिनेन कुर्ता सादगी और ईमानदारी का प्रतीक माना जाता है, जबकि रंग-बिरंगे सिल्क स्टोल और साड़ियां सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाते हैं। यही वजह है कि भागलपुरी सिल्क और लिनेन चुनावी प्रचार में एक अहम भूमिका निभा रहे हैं।
ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों जगह बढ़ी बिक्री
डिजिटल दौर में अब सिर्फ स्थानीय बाजार ही नहीं बल्कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भी भागलपुरी सिल्क और लिनेन की बिक्री में तेजी आई है। देशभर से ग्राहक वेबसाइट्स और सोशल मीडिया के जरिए सीधे भागलपुर से संपर्क कर रहे हैं।
एक स्थानीय व्यापारी के अनुसार, “अब हमारी बिक्री सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और यहां तक कि अमेरिका और यूरोप से भी ऑर्डर आ रहे हैं। लेकिन चुनावी सीजन में बिहार की डिमांड सबसे ज्यादा रहती है।”
सरकार और उद्योग की भूमिका
भागलपुरी सिल्क को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए सरकार भी कई योजनाएं चला रही है। “जीआई टैग” मिलने के बाद इसकी पहचान और मजबूत हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार और उद्योग जगत मिलकर कार्य करें तो भागलपुरी सिल्क और लिनेन न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में “फैशन आइकन” बन सकता है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले भागलपुरी सिल्क और लिनेन फैब्रिक की डिमांड में आई तेजी यह दर्शाती है कि कपड़े सिर्फ फैशन का हिस्सा नहीं बल्कि राजनीति का भी एक महत्वपूर्ण पहलू हैं। नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए यह परिधान उनकी पहचान और संदेश का माध्यम बन गए हैं।
भागलपुर की धरती से निकलने वाला यह सिल्क और लिनेन न केवल चुनावी प्रचार को रंगीन बना रहा है बल्कि हजारों परिवारों के जीवन में भी उजाला फैला रहा है। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे चुनावी हलचल तेज होगी, वैसे-वैसे इनकी मांग और बढ़ने की संभावना है।

