
पटना. बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। जनसुराज आंदोलन के संस्थापक प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने एक बार फिर अपने रणनीतिक अंदाज़ से सियासी चर्चाओं को हवा दे दी है। कयास लगाए जा रहे थे कि वह उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के खिलाफ राघोपुर सीट (Raghopur Seat) से चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन अब जनसुराज पार्टी ने इस अटकल पर विराम लगा दिया है। पार्टी ने औपचारिक रूप से राघोपुर विधानसभा क्षेत्र से अपने उम्मीदवार का ऐलान कर दिया है।
राघोपुर से जनसुराज का उम्मीदवार कौन है?
जनसुराज पार्टी ने मंगलवार को जारी की गई अपनी नई सूची में रामजी यादव को राघोपुर से उम्मीदवार घोषित किया है। रामजी यादव जनसुराज आंदोलन से शुरुआत से जुड़े हुए हैं और उन्होंने इस क्षेत्र में लंबे समय तक संगठन को मजबूत करने का काम किया है। प्रशांत
किशोर ने खुद प्रेस वार्ता में कहा,
“हमारा उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को हराना नहीं, बल्कि बिहार को बदलना है। राघोपुर से हमारा उम्मीदवार संगठन का प्रतिबद्ध साथी है।”
इस घोषणा के साथ ही यह साफ हो गया है कि प्रशांत किशोर खुद राघोपुर से चुनाव नहीं लड़ेंगे, जैसा कि राजनीतिक गलियारों में पहले चर्चा थी।

राघोपुर सीट का राजनीतिक महत्व
राघोपुर विधानसभा क्षेत्र बिहार की राजनीति में बेहद अहम माना जाता है। यह सीट लंबे समय से लालू प्रसाद यादव परिवार का गढ़ रही है। लालू प्रसाद यादव खुद भी यहां से विधायक रह चुके हैं और बाद में तेजस्वी यादव ने इस पर कब्जा बनाए रखा है।
इस सीट से आरजेडी (RJD) की पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती है। ऐसे में जनसुराज पार्टी का यहां उम्मीदवार उतारना पार्टी की रणनीति को लेकर कई सवाल खड़े करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज इस सीट पर अपनी राजनीतिक पैठ का परीक्षण करना चाहती है।
प्रशांत किशोर ने क्या कहा?
प्रशांत किशोर ने कहा,
“हमारी लड़ाई किसी नेता से नहीं, व्यवस्था से है। तेजस्वी यादव हों या कोई और, सभी को जवाब देना होगा कि उन्होंने बिहार को बेहतर बनाने के लिए क्या किया। राघोपुर हमारी राजनीति का केंद्र नहीं, बल्कि बिहार के हर गांव और हर पंचायत में बदलाव की शुरुआत है।”
उन्होंने यह भी कहा कि जनसुराज पार्टी 243 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी और पार्टी का लक्ष्य केवल सत्ता नहीं, बल्कि “जन परिवर्तन” है।
जनसुराज का राजनीतिक समीकरण
जनसुराज ने अब तक तीन सूचियां जारी कर दी हैं और कुल 200 से अधिक प्रत्याशियों के नाम घोषित किए जा चुके हैं। पार्टी जातीय और सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति पर काम कर रही है।
विशेष रूप से पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग से आने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जा रही है।
राघोपुर में भी उम्मीदवार रामजी यादव इसी वर्ग से आते हैं, जिससे जनसुराज का मकसद स्पष्ट होता है — सामाजिक न्याय के नए मॉडल को बढ़ावा देना।

तेजस्वी यादव पर परोक्ष हमला
हालांकि प्रशांत किशोर ने तेजस्वी यादव का नाम सीधे नहीं लिया, लेकिन उनके बयान में परोक्ष निशाना साफ झलक रहा था। उन्होंने कहा,
“15 साल आरजेडी और 15 साल एनडीए ने बिहार को चलाया, लेकिन स्थिति जस की तस है। बिहार को अब नई सोच और नई दिशा की जरूरत है।”
जनसुराज के इस बयान से यह भी साफ है कि पार्टी खुद को परंपरागत राजनीतिक दलों से अलग दिखाना चाहती है।
राघोपुर में मुकाबला दिलचस्प होगा
राघोपुर में अब मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना है।
आरजेडी से तेजस्वी यादव
जनसुराज से रामजी यादव
एनडीए की ओर से अभी नाम तय नहीं हुआ है, लेकिन भाजपा-जदयू गठबंधन इस सीट पर मजबूत दावेदार की तलाश में है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि भले ही प्रशांत किशोर खुद मैदान में नहीं उतर रहे हैं, लेकिन जनसुराज का यहां प्रत्याशी उतारना तेजस्वी यादव के लिए प्रतीकात्मक चुनौती है।
जनता का मूड क्या कहता है?
राघोपुर के मतदाता इस बार बदलाव की बात जरूर कर रहे हैं, लेकिन आरजेडी की पकड़ को कमतर नहीं आंका जा सकता। प्रशांत किशोर का संगठन ग्रामीण इलाकों में घर-घर जाकर संवाद कर रहा है।
जनसुराज के कार्यकर्ता “बदलाव बिहार का हक है” जैसे नारे के साथ अभियान चला रहे हैं।
यह भी कहा जा रहा है कि जनसुराज का यह प्रयोग बिहार की पारंपरिक राजनीति के लिए नई दिशा तय कर सकता है।
प्रशांत किशोर का राघोपुर से चुनाव न लड़ना भले ही कुछ समर्थकों को निराश करे, लेकिन राजनीतिक रूप से यह कदम रणनीतिक माना जा रहा है। इससे पार्टी के अन्य नेताओं को मौका मिलेगा और संगठनात्मक ढांचा मजबूत होगा।
राघोपुर सीट इस चुनाव में फिर से सुर्खियों में रहने वाली है, क्योंकि यहां अब “तेजस्वी बनाम जनसुराज” की नई लड़ाई तय मानी जा रही है।

