रांची। झारखंड में अब 8वीं, 9वीं और 11वीं कक्षा की परीक्षाओं को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2025 तक इन तीनों कक्षाओं की परीक्षा झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) ही आयोजित करेगी। हालांकि, वर्ष 2026 से इन कक्षाओं की परीक्षाएं लिखित पद्धति से होंगी, यानी विद्यार्थियों को अब इंटरनल मूल्यांकन के बजाय बोर्ड पैटर्न की परीक्षा देनी होगी। शिक्षा विभाग ने इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।
इस फैसले के साथ झारखंड सरकार ने राज्य के स्कूली शिक्षा तंत्र में एक अहम बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाया है। राज्यभर के सरकारी और निजी स्कूलों में अब इस निर्णय को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला
झारखंड शिक्षा परियोजना और झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) के बीच पिछले कई महीनों से परीक्षा व्यवस्था को लेकर बातचीत चल रही थी। शिक्षा विभाग ने अंततः निर्णय लिया है कि 8वीं, 9वीं और 11वीं की वार्षिक परीक्षाएं 2025 तक JAC के अधीन ही रहेंगी।
विभाग के अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल मूल्यांकन प्रक्रिया में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों और शिक्षकों को नई प्रणाली के अनुरूप ढलने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। हालांकि, वर्ष 2026 से परीक्षा पूरी तरह से लिखित स्वरूप में आयोजित होगी।
बोर्ड जैसी लिखित परीक्षा की तैयारी
2026 से लागू होने वाली नई व्यवस्था के तहत छात्रों को अब हर विषय में निर्धारित अंक लिखित परीक्षा के माध्यम से अर्जित करने होंगे। JAC की ओर से परीक्षा का पैटर्न, प्रश्नपत्र, मूल्यांकन प्रक्रिया और अंक वितरण प्रणाली पहले से निर्धारित की जाएगी।
राज्य के शिक्षा निदेशक ने कहा कि “नई प्रणाली से विद्यार्थियों में प्रतियोगी भावना बढ़ेगी और परीक्षा की पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी।” उन्होंने यह भी बताया कि विभाग इस परिवर्तन को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगा, ताकि ग्रामीण इलाकों के स्कूलों को भी पर्याप्त तैयारी का मौका मिले।
2025 तक JAC के अधीन ही रहेगी परीक्षा
शिक्षा विभाग के अनुसार, वर्ष 2025 की परीक्षा पहले की तरह JAC द्वारा ही कराई जाएगी। इसमें मूल्यांकन प्रक्रिया स्कूल स्तर पर होगी, लेकिन प्रश्नपत्र JAC द्वारा तैयार किया जाएगा। इससे परीक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलेगी और छात्रों को बोर्ड परीक्षा जैसा अनुभव मिलेगा।
झारखंड के कई शिक्षकों और अभिभावकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे राज्य के शिक्षा स्तर में सुधार होगा और बच्चों को उच्च कक्षाओं के लिए बेहतर तैयारी करने का मौका मिलेगा।
शिक्षकों और छात्रों की प्रतिक्रिया
रांची के एक सरकारी स्कूल की शिक्षिका रीता सिंह ने कहा, “बोर्ड जैसी परीक्षा से विद्यार्थियों की पढ़ाई में गंभीरता बढ़ेगी। अभी तक कई छात्र इंटरनल मूल्यांकन के कारण तैयारी में लापरवाही कर देते हैं, लेकिन लिखित परीक्षा से उनमें अनुशासन आएगा।”
वहीं 9वीं कक्षा के छात्र आदित्य कुमार ने कहा, “अगर परीक्षा बोर्ड जैसी होगी तो हमें शुरू से मेहनत करनी होगी। इससे 10वीं की परीक्षा का डर भी कम होगा।”
JAC की भूमिका बनी रहेगी अहम
झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) इस बदलाव में प्रमुख भूमिका निभाएगी। परिषद न केवल प्रश्नपत्र तैयार करेगी बल्कि मूल्यांकन मानदंड भी तय करेगी। साथ ही परीक्षा परिणाम की निगरानी और मॉडरेशन का काम भी परिषद ही करेगी।
JAC के अध्यक्ष ने कहा, “हमारा उद्देश्य है कि राज्य के सभी जिलों में शिक्षा की गुणवत्ता समान हो। लिखित परीक्षा से पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों की वास्तविक क्षमता सामने आएगी।”
नए सिलेबस और पैटर्न की तैयारी
शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि 2026 की लिखित परीक्षा के लिए नया सिलेबस और प्रश्नपत्र पैटर्न तैयार किया जा रहा है। सिलेबस को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के अनुरूप बनाया जाएगा ताकि राज्य के छात्र राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम बन सकें।
राज्यभर के शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए जाएंगे ताकि वे नई परीक्षा पद्धति को प्रभावी रूप से लागू कर सकें।
क्यों जरूरी था यह बदलाव?
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड में अब तक 8वीं, 9वीं और 11वीं की परीक्षा स्कूल स्तर पर आयोजित होती थी, जिससे मूल्यांकन में एकरूपता नहीं थी। कई बार स्कूलों में मनमाने अंक दिए जाने की शिकायतें भी आती थीं।
लिखित परीक्षा लागू करने से न केवल छात्रों की वास्तविक योग्यता का पता चलेगा बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।
अभिभावकों में उत्साह, छात्रों में उत्सुकता
कई अभिभावकों का मानना है कि यह फैसला बच्चों के भविष्य के लिए अच्छा कदम है। बोर्ड जैसी परीक्षा से वे आगे की पढ़ाई के लिए मानसिक रूप से तैयार रहेंगे। धनबाद की निवासी नीलम देवी कहती हैं, “अक्सर बच्चे स्कूल परीक्षा को हल्के में लेते हैं, लेकिन अब जब बोर्ड जैसी परीक्षा होगी तो वे शुरू से ही पढ़ाई में मन लगाएंगे।
आगे की राह
वर्ष 2026 में जब यह व्यवस्था लागू होगी, तब JAC की जिम्मेदारी और बढ़ जाएगी। परिषद को प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर मूल्यांकन प्रक्रिया तक की मॉनिटरिंग करनी होगी। राज्य के 24 जिलों के स्कूलों को परीक्षा केंद्र के रूप में तैयार किया जाएगा।
शिक्षा विभाग ने संकेत दिया है कि आगे चलकर 6वीं से 11वीं तक की सभी कक्षाओं में एक समान मूल्यांकन मानक लागू करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
झारखंड सरकार का यह निर्णय राज्य के शिक्षा ढांचे में एक सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। वर्ष 2026 से 8वीं, 9वीं और 11वीं की लिखित परीक्षा लागू होने से न केवल विद्यार्थियों की गुणवत्ता में सुधार होगा बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।

