पटना:बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियों में कांग्रेस पार्टी ने अपनी पहली उम्मीदवार सूची जारी कर दी है। इस सूची में 11 प्रत्याशियों के नाम शामिल हैं। पार्टी ने इस बार नए चेहरों और अनुभवी नेताओं का संतुलन साधने की कोशिश की है। सबसे चर्चित नाम बेगूसराय से पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेत्री अमिता भूषण का है, जिन्हें एक बार फिर विधानसभा चुनाव के मैदान में उतारा गया है।
कांग्रेस ने इस सूची के जरिए यह संकेत देने की कोशिश की है कि वह बिहार में संगठन को मजबूत करने और जातीय समीकरणों को साधने की दिशा में गंभीर है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि कांग्रेस इस बार ‘नए जोश और नए सोच’ के साथ चुनाव मैदान में उतर रही है।
पहली सूची में शामिल 11 उम्मीदवारों के नाम
कांग्रेस की ओर से जारी सूची में जिन उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है, वे हैं—
1. अमिता भूषण – बेगूसराय
2. अनिल शर्मा – गया (शहरी)
3. राजेश कुमार – सिवान
4. नेहा पांडेय – पटना साहिब
5. अरुण यादव – दरभंगा ग्रामीण
6. सुभाष सिंह – भागलपुर
7. संगीता कुमारी – नवादा
8. अब्दुल हलीम – कटिहार
9. रविंद्र झा – मधुबनी
10. मनीष मिश्रा – मुजफ्फरपुर
11. रीना कुमारी – पूर्णिया
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने इस सूची को जारी करने से पहले महागठबंधन के घटक दलों के साथ चर्चा की थी। पार्टी ने दावा किया है कि बाकी सीटों पर भी जल्द ही सहमति बन जाएगी।
अमिता भूषण पर कांग्रेस का भरोसा क्यों?
बेगूसराय की सीट इस बार खास वजहों से चर्चा में है। 2019 के लोकसभा चुनाव में यहां कड़ा मुकाबला देखने को मिला था, जब भाजपा के गिरिराज सिंह ने इस सीट से जीत दर्ज की थी। अब कांग्रेस ने एक बार फिर अमिता भूषण को मौका दिया है।
अमिता भूषण लंबे समय से बेगूसराय में सक्रिय हैं और सामाजिक कार्यों के जरिए जनता के बीच अपनी मजबूत पकड़ बना चुकी हैं। पार्टी को उम्मीद है कि वे महिला मतदाताओं और युवा वर्ग के बीच अच्छी पकड़ बना पाएंगी।
महागठबंधन में सीट बंटवारे की रणनीति
कांग्रेस बिहार में महागठबंधन की प्रमुख घटक दल है, जिसमें राजद, कांग्रेस, वाम दल और अन्य छोटे दल शामिल हैं। सीट बंटवारे के फॉर्मूले पर चर्चा जारी है।
कांग्रेस को उम्मीद है कि उसे इस बार करीब 60 से 65 सीटें मिल सकती हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता मानते हैं कि अगर टिकट वितरण में संतुलन और पारदर्शिता रखी गई, तो कांग्रेस राज्य में अपनी खोई जमीन वापस पा सकती है।
कांग्रेस का फोकस—युवा और महिला उम्मीदवारों पर
पहली सूची से यह साफ झलकता है कि कांग्रेस इस बार युवा और महिला चेहरों पर दांव लगा रही है।
बेगूसराय, नवादा और दरभंगा जैसी सीटों पर महिला प्रत्याशियों को मौका देकर पार्टी ने यह संकेत दिया है कि वह ‘नारी शक्ति’ और ‘युवा जोश’ दोनों को साथ लेकर चलना चाहती है।
राजनीतिक समीकरण और चुनावी माहौल
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प होने जा रहा है।
एक ओर जहां एनडीए (भाजपा+जदयू+हम) ने अपनी रणनीति तेज कर दी है, वहीं दूसरी ओर महागठबंधन भी जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटा है।
कांग्रेस का लक्ष्य इस बार सिर्फ सीटें जीतना नहीं, बल्कि संगठन को पुनर्जीवित करना और विपक्ष के रूप में एक मजबूत विकल्प पेश करना है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की पहली सूची में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन पर विशेष ध्यान दिया गया है।
बेगूसराय से अमिता भूषण को टिकट देना इस बात का संकेत है कि पार्टी स्थानीय नेतृत्व को प्राथमिकता देना चाहती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कांग्रेस अगर अपनी प्रचार रणनीति को जमीन पर उतार पाई तो उसे कुछ क्षेत्रों में उल्लेखनीय बढ़त मिल सकती है।
अमिता भूषण का बयान
टिकट मिलने के बाद अमिता भूषण ने मीडिया से कहा—
“मुझे पार्टी ने जो भरोसा जताया है, उसके लिए मैं आभारी हूं। बेगूसराय की जनता ने हमेशा मेरा साथ दिया है। इस बार भी मैं जनसमस्याओं और विकास के मुद्दों को लेकर चुनाव मैदान में उतरूंगी।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस न्याय, रोजगार और शिक्षा के मुद्दों पर चुनाव लड़ेगी।
आगे की रणनीति
कांग्रेस जल्द ही अपने स्टार प्रचारकों की सूची जारी करेगी। इसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, और मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे बड़े नेता शामिल होंगे।
पार्टी का फोकस ग्रामीण क्षेत्रों और युवाओं को जोड़ने पर रहेगा।
अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि आने वाले दिनों में कांग्रेस का घोषणापत्र भी जारी किया जाएगा, जिसमें रोजगार, महिला सुरक्षा, शिक्षा और किसानों के कल्याण पर जोर दिया जाएगा।
कांग्रेस की पहली सूची से यह साफ है कि पार्टी बिहार चुनाव 2025 में गंभीर और रणनीतिक रूप से तैयार है।
अमिता भूषण जैसे चेहरे कांग्रेस को न केवल बेगूसराय में बल्कि पूरे राज्य में नई पहचान दिला सकते हैं।
अब देखना यह होगा कि क्या यह नई रणनीति कांग्रेस को सत्ता की ओर ले जाएगी या विपक्ष की भूमिका को और मजबूत बनाएगी।

