गुजरात की राजनीति में गुरुवार को बड़ा भूचाल देखने को मिला। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व वाली सरकार में सभी मंत्रियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया है, जबकि मुख्यमंत्री अपने पद पर बने हुए हैं। इस अप्रत्याशित कदम से पूरे राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। माना जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व जल्द ही एक बड़े मंत्रिमंडलीय फेरबदल (Cabinet Reshuffle) की तैयारी कर रहा है।
अचानक क्यों दिए गए इस्तीफे?
सूत्रों के अनुसार, भाजपा हाईकमान लंबे समय से राज्य के कुछ विभागों के कामकाज से असंतुष्ट था। पार्टी संगठन को भी यह फीडबैक मिला था कि कई मंत्री अपने क्षेत्रों में जनता के बीच कमजोर उपस्थिति बनाए हुए हैं। ऐसे में 2027 विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने अब नई टीम तैयार करने का फैसला लिया है।भाजपा के अंदर यह परंपरा रही है कि ‘परफॉर्मेंस आधारित फेरबदल’ (Performance-Based Reshuffle) के जरिए संगठन को मजबूत किया जाए। यही वजह है कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को बनाए रखते हुए सभी मंत्रियों से इस्तीफा लिया गया है, ताकि नए चेहरों को मौका मिल सके।
भाजपा हाईकमान की भूमिका
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस कदम के पीछे दिल्ली दरबार की सीधी भूमिका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह गुजरात की राजनीति पर विशेष नजर रखते हैं। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं की सहमति के बाद ही पूरे मंत्रिमंडल का इस्तीफा लिया गया है।भाजपा सूत्रों के मुताबिक, नई मंत्रिपरिषद में युवा और तकनीकी रूप से दक्ष चेहरों को शामिल किया जा सकता है। साथ ही महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी विचार चल रहा है।
भूपेंद्र पटेल की भूमिका बरकरार
हालांकि, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस्तीफा नहीं दिया है। पार्टी नेतृत्व ने उनके कामकाज पर संतोष जताया है और उन्हें नई टीम के गठन का जिम्मा सौंपा गया है।
भूपेंद्र पटेल ने इस्तीफों की पुष्टि करते हुए कहा,
“हम सब पार्टी के निर्णय का सम्मान करते हैं। भाजपा में व्यक्तिगत महत्व नहीं, संगठन सर्वोपरि है। नई टीम जल्द ही जनता की सेवा के लिए काम शुरू करेगी।”
नई टीम में कौन-कौन हो सकता है शामिल?
भाजपा संगठन सूत्रों का कहना है कि पार्टी ‘विकास’, ‘युवाओं’ और ‘सामाजिक संतुलन’ के फार्मूले पर काम कर रही है।
संभावना है कि नई टीम में:
ओबीसी वर्ग से अधिक प्रतिनिधित्व,
महिला नेताओं की बढ़ी हुई हिस्सेदारी,
और कुछ नए चेहरों को संगठन से सीधा मंत्रालय में जगह मिलेगी।
साथ ही कुछ अनुभवी मंत्रियों को संगठन में नई भूमिका दी जा सकती है।
राजनीतिक मायने
गुजरात भाजपा का गढ़ माना जाता है, लेकिन हाल के दिनों में स्थानीय स्तर पर पार्टी को कुछ असंतोष का सामना करना पड़ा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम भविष्य की सियासत को स्थिर और सक्रिय बनाने की कोशिश है।
2027 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा चाहती है कि जनता में नया उत्साह और भरोसा पैदा किया जाए। इसके अलावा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बढ़ते प्रचार अभियान ने भी भाजपा को संगठनात्मक रूप से सक्रिय होने पर मजबूर किया है।
ऐसा पहले भी हो चुका है
यह पहला मौका नहीं है जब गुजरात में मंत्रिमंडल ने सामूहिक इस्तीफा दिया हो। 2021 में भी विजय रूपाणी के कार्यकाल में पूरे मंत्रिपरिषद ने इस्तीफा देकर जगह बनाई थी, जिसके बाद भूपेंद्र पटेल को मुख्यमंत्री बनाया गया था।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा का यह कदम ‘गुजरात मॉडल’ की परंपरा को आगे बढ़ाता है, जहां संगठन हमेशा नई ऊर्जा के साथ सरकार में बदलाव करता रहता है।
विपक्ष का रुख
कांग्रेस ने इस सामूहिक इस्तीफे पर तंज कसते हुए कहा है कि भाजपा सरकार जनता से कट चुकी है, इसलिए उसे अपने मंत्रियों को बदलना पड़ रहा है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा,
“यह इस्तीफे नहीं, भाजपा की नाकामी की स्वीकारोक्ति है। जनता ने विकास नहीं, निराशा देखी है।”
वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी ट्वीट करते हुए लिखा कि भाजपा को गुजरात की जनता का मूड समझ में आ गया है, इसलिए जल्दबाजी में चेहरे बदले जा रहे हैं।
आगे की प्रक्रिया क्या होगी?
राजभवन से मिली जानकारी के अनुसार, मंत्रियों के इस्तीफे औपचारिक रूप से स्वीकृत कर लिए जाएंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री नई मंत्रिपरिषद की सूची राज्यपाल को सौंपेंगे। उम्मीद है कि दो से तीन दिनों के भीतर नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। नई कैबिनेट में लगभग 20-22 मंत्री शामिल हो सकते हैं। इनमें कुछ अनुभवी चेहरों के साथ-साथ पहली बार विधायक बने नेताओं को भी मौका मिल सकता है।गुजरात की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में भाजपा एक नई टीम के साथ राज्य में विकास की गाथा को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी। वहीं विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा की ‘राजनीतिक कमजोरी’ के रूप में पेश करने में जुट गया है।
अब देखना यह होगा कि नई टीम जनता की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है और क्या यह फेरबदल भाजपा को 2027 में फिर से सत्ता में वापसी दिला पाएगा।

