देवघर। शहर में साइबर अपराध के मामलों पर सख्ती बरतते हुए देवघर साइबर थाना पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने मोबाइल झपट्टा मारकर उसके जरिए बैंक खाते से 1.11 लाख रुपये उड़ाने वाले दो साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार दोनों आरोपी सगे भाई हैं — अमन कुमार चौधरी और विजय कुमार चौधरी, जो शहर के भुरभुरा मोड़ हनुमान मंदिर के पास के रहने वाले बताए जा रहे हैं। पुलिस ने उनके पास से वारदात में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन, सिम कार्ड और बुलेट बाइक बरामद की है। साइबर डीएसपी राजा मित्रा ने प्रेसवार्ता में बताया कि यह गिरफ्तारी देवघर पुलिस की त्वरित कार्रवाई और तकनीकी जांच की बदौलत संभव हो सकी।
कैसे हुआ पूरा मामला
घटना 15 अक्टूबर की है। कृष्णापुरी मोहल्ले के निवासी राकेश रोशन अपने घर से कहीं जा रहे थे, तभी दो बदमाशों ने अचानक उनका मोबाइल झपट्टा मार लिया और बुलेट बाइक से फरार हो गए। पहले तो यह एक सामान्य मोबाइल चोरी का मामला लग रहा था, लेकिन जब कुछ ही घंटों बाद पीड़ित राकेश को अपने बैंक खाते से 80 हजार रुपये निकलने की सूचना मिली, तब मामला गंभीर हो गया। इसके बाद अपराधियों ने चालाकी से राकेश की पत्नी के बैंक खाते से भी 11,418 रुपये निकाल लिए। दोनों खातों से कुल 1.11 लाख रुपये की निकासी कर अपराधियों ने रकम को दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिया।
पुलिस ने कैसे सुलझाई गुत्थी
मामला दर्ज होने के बाद साइबर थाना प्रभारी सहदेव प्रसाद, नगर थानेदार राजीव कुमार, इंस्पेक्टर हरदियुस टोप्पो, दारोगा घनश्याम गंजु और सशस्त्र बल की टीम को जांच में लगाया गया।
तकनीकी साक्ष्यों की मदद से पुलिस ने मोबाइल के लोकेशन और इस्तेमाल किए गए सिम की डिटेल खंगाली।
जांच में सामने आया कि चोरी किए गए मोबाइल से लगातार ऑनलाइन बैंकिंग और ओटीपी वेरिफिकेशन की गतिविधियां की जा रही थीं। टीम ने साइबर सेल के सहयोग से संदिग्ध नंबरों की पहचान की और तकनीकी निगरानी के आधार पर भुरभुरा मोड़ क्षेत्र में छापेमारी की।
पुलिस ने दोनों भाइयों अमन कुमार चौधरी और विजय कुमार चौधरी को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के दौरान उनके पास से वारदात में प्रयुक्त मोबाइल फोन, सिम कार्ड और बुलेट बाइक जब्त की गई।
अपराधियों ने कैसे किया था फ्रॉड
पुलिस पूछताछ में दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने राकेश रोशन का मोबाइल झपट्टा मारा था। उसके बाद उन्होंने फोन में सेव बैंक ऐप और मैसेज के जरिए खाते तक पहुंच बनाई। ओटीपी वेरिफिकेशन के जरिए उन्होंने नेट बैंकिंग में लॉगिन कर रकम ट्रांसफर की। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह पिछले कुछ महीनों से देवघर, जसीडीह और पास के इलाकों में इसी तरह की वारदातों को अंजाम दे रहा था।
साइबर डीएसपी राजा मित्रा ने दी जानकारी
डीएसपी राजा मित्रा ने बताया कि दोनों अपराधियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और अब उनके नेटवर्क की जांच की जा रही है।
उन्होंने कहा —
“देवघर पुलिस लगातार ऐसे मामलों पर नजर रखे हुए है। आम लोगों से अपील है कि अपने मोबाइल में बैंकिंग ऐप या ओटीपी सेव न रखें और मोबाइल चोरी होने पर तुरंत सिम ब्लॉक करवा दें।”
देवघर पुलिस की सख्ती से घबराए साइबर अपराधी
देवघर जिले में पिछले कुछ महीनों में साइबर अपराध के कई मामलों का खुलासा हुआ है।
साइबर थाना की सक्रियता से अब अपराधी दबाव में हैं।
पिछले महीने ही पुलिस ने दो अन्य गिरोहों को पकड़ा था जो यूपी और बिहार से जुड़े हुए थे।
यह हालिया गिरफ्तारी यह साबित करती है कि देवघर पुलिस साइबर अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है।
क्या करें अगर आपका मोबाइल चोरी हो जाए
1. तुरंत सिम ब्लॉक कराएं — अपने मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर को कॉल कर सिम ब्लॉक करवाएं।
2. बैंक को सूचित करें — अपने बैंक की हेल्पलाइन पर कॉल कर इंटरनेट बैंकिंग और यूपीआई को अस्थायी रूप से फ्रीज़ कराएं।
3. थाने में प्राथमिकी दर्ज कराएं — मोबाइल की आईएमईआई डिटेल के साथ शिकायत दर्ज करवाएं।
4. साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें — यह राष्ट्रीय हेल्पलाइन तुरंत कार्रवाई में मदद करती है।
5. पासवर्ड बदलें — अपने सभी ईमेल, बैंकिंग और सोशल मीडिया खातों के पासवर्ड बदल दें।
देवघर पुलिस की अपील
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और ओटीपी किसी को भी शेयर न करें।
साथ ही, बैंकिंग ऐप्स को सुरक्षित रखने के लिए फिंगरप्रिंट लॉक या फेस लॉक का उपयोग करें।
देवघर में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच पुलिस की यह कार्रवाई राहत की खबर है। दोनों सहोदर भाइयों की गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया है कि तकनीक के सहारे अपराधी चाहे जितनी चालाकी करें,
पुलिस के जाल से बचना अब आसान नहीं।
फिलहाल पुलिस इस गिरोह के अन्य साथियों की तलाश में जुटी हुई है।

