पटना / पूर्णिया, लोकसभा सांसद पप्पू यादव ने महागठबंधन में सीट-बंटवारे (seat sharing) को लेकर अपनी तीखी नाराज़गी जाहिर की है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह हर बार गठबंधन में अपना बल झलकाती है, लेकिन अंततः वही पार्टी कट-छाँट और “क़ुर्बानी” करती रहती है।
बिंदुवार घटनाक्रम और आरोप
पप्पू यादव ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा गठबंधन धर्म निभाया है, लेकिन बार-बार “क़ुर्बानी की मांग” की जाती रही है।
वे यह भी पूछते हैं कि “कब तक” कांग्रेस इस तरह का झेला करती रहेगी — यह सवाल गठबंधन की आंतरिक दरारों को उजागर करता है।
यह विवाद ऐसे समय पर सामने आया है, जब बिहार के आगामी विधानसभा चुनावों के लिए महागठबंधन (Opposition bloc / INDIA / Mahagathbandhan) में सीट-बंटवारे को लेकर लगातार गतिरोध बनता जा रहा है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि – सीट-बंटवारे का जटिल समीकरण
कांग्रेस अपने हाथ में लगभग 65 सीटों की मांग उठाए हुए है, जबकि RJD 58 से अधिक देने के पक्ष में नहीं है, जिससे गठबंधन में गतिरोध की स्थिति बनी है।
गठबंधन की मीटिंग्स में कई पार्टियों में सीटों की मांग और समीक्षा-विवाद हो रहे हैं, जिससे बैठकों की नियमितता और निर्णय की गति प्रभावित हो रही है।
बाईं पार्टियों (CPI, CPI-ML, CPM) को भी अभी तक विस्तार से जानकारी नहीं मिली है।
पप्पू यादव का राजनीतिक गणित
पप्पू यादव, जो पूर्णिया से सांसद हैं, महागठबंधन के भीतर कांग्रेस के रुख से असंतुष्ट हैं।
वे यह भी इशारा करते हैं कि कांग्रेस के इस व्यवहार से अन्य साझेदारों में हताशा बढ़ सकती है और गठबंधन की छवि धूमिल हो सकती है।
यादव का यह मोर्चा केवल एक सीट विवाद नहीं है — यह सत्ता-संवैधानिक सम्मान, आत्मसम्मान और गठबंधन के भीतर विश्वास की समस्या को लेकर है।
संभावित राजनीतिक प्रभाव
1. गठबंधन में दरार की संभावना
यदि पप्पू यादव की नाराज़गी और कांग्रेस की अड़चनों को न सुलझाया गया, तो यह गठबंधन में मतभेद का कारण बन सकती है।
2. छवि और जनविश्वास को ठेस
जनता यह देख सकती है कि विपक्षी दल एक दूसरे पर आरोप लगाने में समय बिता रहे हैं, बजाय यह दिखाने कि वे सत्ता विकल्प के रूप में सक्षम हैं।
3. स्थान-समझौते की बाधा
सीट-बंटवारे का समुचित समायोजन नहीं होने पर साथी दल अपने नामांकी (ticket) दावों को लेकर हठधर्मी हो सकते हैं और चुनावी रणनीति प्रभावित हो सकती है।
पप्पू यादव की नाराज़गी महागठबंधन के अंदर आंतरिक तनाव और सीट-बंटवारे की जटिलता को दर्शाती है। कांग्रेस यदि इस बात को गंभीरता से न ले और समय रहते मध्यस्थता न करे, तो गठबंधन की एकजुटता और समन्वय पर प्रश्नचिन्ह लग सकता है।
चुनाव नजदीक हैं, और समय कम है — इस विवाद का राजनीतिक समाधान नहीं निकलता तो यह विपक्ष के लिए रणनीतिक समस्या बन सकती है।

