नई दिल्ली: दीपावली के बाद एक बार फिर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर खतरनाक सीमा को पार कर चुका है। पटाखों के धुएं और पराली जलाने से हवा इतनी जहरीली हो गई है कि राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 450 के पार पहुंच गया है। दिल्ली-एनसीआर के आसमान में धुंध की मोटी चादर छाई हुई है, जिसके चलते लोगों को आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी और गले में खराश जैसी समस्याएं हो रही हैं। दिल्ली सरकार ने हालात को देखते हुए आर्टिफिशियल रेन (कृत्रिम वर्षा) की योजना को फिर से सक्रिय कर दिया है। पर्यावरण विभाग, IIT कानपुर और मौसम विभाग के विशेषज्ञों के साथ मिलकर यह आकलन किया जा रहा है कि कब तक कृत्रिम बारिश संभव है और इससे कितनी राहत मिलेगी।
दीपावली के बाद बिगड़ा हवा का हाल
हर साल की तरह इस बार भी दीपावली के बाद दिल्ली की हवा जहरीली हो गई है। त्योहार के दौरान पटाखों के धुएं ने पहले से मौजूद धूल और प्रदूषण को और बढ़ा दिया। इसके साथ ही पड़ोसी राज्यों पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, दीपावली के अगले दिन दिल्ली का औसत AQI 470 दर्ज किया गया, जो कि ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है।
स्कूल बंद और निर्माण कार्य पर रोक
दिल्ली सरकार ने बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए GRAP (Graded Response Action Plan) के तहत कई सख्त कदम उठाए हैं।
स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद करने का निर्देश दिया गया है।
दिल्ली में निर्माण कार्यों पर रोक लगाई गई है।
सार्वजनिक स्थलों पर कचरा जलाने और पटाखों के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
इसके बावजूद प्रदूषण के स्तर में खास कमी नहीं आई है।
क्या है आर्टिफिशियल रेन योजना?
आर्टिफिशियल रेन यानी कृत्रिम वर्षा एक ऐसी वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें बादलों में रासायनिक पदार्थ (जैसे सिल्वर आयोडाइड, सोडियम क्लोराइड या पोटैशियम क्लोराइड) का छिड़काव किया जाता है। इससे बादलों में मौजूद नमी एकत्र होकर बारिश का रूप ले लेती है।
इस प्रक्रिया के लिए आमतौर पर एयरक्राफ्ट या ड्रोन की मदद ली जाती है। दिल्ली सरकार और IIT कानपुर ने इस तकनीक पर पहले भी काम किया था। अब फिर से इसे लागू करने की तैयारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मौसम में पर्याप्त बादल मौजूद रहे तो नवंबर के पहले हफ्ते में कृत्रिम बारिश संभव हो सकती है।
कब तक हो सकती है बारिश?
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अगले 3 से 4 दिनों में दिल्ली-एनसीआर में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने की संभावना है। यदि इस दौरान आसमान में बादलों की स्थिति अनुकूल रहती है, तो नवंबर के शुरुआती सप्ताह में आर्टिफिशियल रेन की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
यह योजना मुख्य रूप से प्रदूषण से राहत दिलाने और हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए बनाई गई है।
विशेषज्ञों की राय
IIT कानपुर के पर्यावरण वैज्ञानिकों का कहना है कि “कृत्रिम वर्षा तभी सफल हो सकती है जब मौसम अनुकूल हो। हवा में पर्याप्त नमी और बादलों की मोटाई जरूरी है।”
दिल्ली पर्यावरण मंत्री ने बताया, “हम IIT कानपुर और IMD के साथ लगातार संपर्क में हैं। जैसे ही तकनीकी रिपोर्ट अनुकूल होगी, हम तुरंत आर्टिफिशियल रेन का प्रयोग करेंगे।”
जनजीवन पर प्रदूषण का असर
दिल्लीवासियों की परेशानी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। सुबह-शाम धुंध की मोटी परत के कारण दृश्यता घट गई है। कई इलाकों में ट्रैफिक धीमा पड़ गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से घर से बाहर निकलने से पहले N95 या N99 मास्क पहनने की सलाह दी है। इसके अलावा, बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की चेतावनी दी गई है।
सरकार की अपील
दिल्ली सरकार ने नागरिकों से सहयोग की अपील की है। मुख्यमंत्री ने कहा, “प्रदूषण पर काबू पाना सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। हम सब मिलकर ही हवा को साफ बना सकते हैं।”
उन्होंने लोगों से वाहन साझा करने, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाने और कचरा जलाने से बचने की अपील की।
बारिश से कितनी राहत मिलेगी?
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर कृत्रिम बारिश सफल रहती है तो दिल्ली के प्रदूषण स्तर में 30 से 40 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 कण नीचे बैठ जाएंगे, जिससे कुछ दिनों के लिए हवा की गुणवत्ता सुधर सकती है।
हालांकि यह राहत अस्थायी होगी, क्योंकि स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालिक नीतियों और सख्त क्रियान्वयन की जरूरत होगी।
दीपावली के बाद दिल्ली की हवा एक बार फिर से जहरीली हो गई है। इस स्थिति से निपटने के लिए आर्टिफिशियल रेन को एक आपात समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार, वैज्ञानिक संस्थान और मौसम विभाग मिलकर इस योजना को सफल बनाने में जुटे हैं। अगर मौसम अनुकूल रहा, तो नवंबर की शुरुआत में दिल्लीवासियों को कृत्रिम बारिश से बड़ी राहत मिल सकती है।

