देवघर। देवभूमि की पावन धरती देवघर में इस वर्ष भी भगवान श्री चित्रगुप्त की पूजा बड़ी ही श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुई। नंदन पहाड़ स्थित सार्वजनिक चित्रगुप्त मंदिर में आयोजित यह वार्षिक पूजा समारोह पिछले कई वर्षों से समाज में एकता और संस्कार का प्रतीक बन चुका है। इस वर्ष भी आयोजन में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी और पूरे परिसर में भक्ति और उल्लास का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।
कार्यक्रम में यजमान के रूप में डॉ. गोपाल जी शरण ने विधिवत पूजा-अर्चना की अगुवाई की। उन्होंने भगवान चित्रगुप्त से समाज के कल्याण, सुख, समृद्धि और ज्ञान के प्रसार की कामना की। पूजा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी थी। भक्ति गीतों, शंखनाद और मंत्रोच्चारण के साथ वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक बन गया था।
देवघर शहर समेत आसपास के इलाकों से भी बड़ी संख्या में चित्रांश परिवार के सदस्य, महिलाएं, पुरुष, युवा और बच्चे एकत्र हुए और भगवान चित्रगुप्त की आराधना में शामिल हुए। यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक समरसता और संगठन की भावना को भी मजबूत करता है।
दोपहर तक पूजा-अर्चना और हवन सम्पन्न होने के बाद, शाम 5:00 बजे संध्या आरती का भव्य आयोजन रखा गया। आरती के दौरान मंदिर प्रांगण दीपमालाओं से जगमगा उठा। आरती के समय मौजूद सैकड़ों श्रद्धालुओं ने एक साथ “जय चित्रगुप्त भगवान की” के जयकारे लगाए जिससे पूरा वातावरण गूंज उठा।
इसके उपरांत समाज के बच्चों, बच्चियों और युवाओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मंच पर गीत-संगीत, नृत्य और नाटक की सुंदर प्रस्तुतियों ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर समाज के कई वरिष्ठ सदस्य, महिलाएं और युवा एक साथ बैठकर “बिरादरी मिलन एवं भोज” में भी सम्मिलित हुए। यह आयोजन आपसी एकता और भाईचारे का जीवंत उदाहरण बना।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से समाज के कई पदाधिकारी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे जिनमें –
अध्यक्ष विनय कुमार सिन्हा, कार्यकारी अध्यक्ष राजेश्वर सिन्हा, सचिव शशि भूषण निराला, कोषाध्यक्ष नंदन कुमार, आरसी सिन्हा, सोना सिन्हा, निर्मल प्रकाश दीपक, डॉ. रंजन सिन्हा, ओम प्रकाश सिन्हा, श्याम सिन्हा, शशि शेखर, शिवेंद्र किशोर, मनोज कुमार सिन्हा, विल्सन सिन्हा, आकाश सिन्हा सहित समाज के सैकड़ों सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने भगवान चित्रगुप्त की शिक्षाओं और उनके आदर्शों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चित्रगुप्त जी समाज में न्याय, सत्य और लेखा-जोखा के प्रतीक हैं। उनका स्मरण हमें ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और समाजसेवा की भावना की ओर प्रेरित करता है।
अध्यक्ष विनय कुमार सिन्हा ने कहा कि
“हर वर्ष इस पूजा के माध्यम से हमारा समाज एक सूत्र में बंधता है। यह न केवल धार्मिक आयोजन है बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का उत्सव भी है।”
कार्यकारी अध्यक्ष राजेश्वर सिन्हा ने कहा कि देवघर में चित्रांश समाज लगातार शिक्षा, सेवा और सामाजिक उत्थान के कार्यों में अग्रणी रहा है। उन्होंने युवा पीढ़ी से आग्रह किया कि वे भगवान चित्रगुप्त के आदर्शों को अपनाकर समाज के विकास में योगदान दें।
पूजा के सफल आयोजन में मंदिर समिति के सभी सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मंच संचालन के दौरान युवाओं ने पूरे उत्साह से कार्यभार संभाला। आयोजन समिति की ओर से यह भी बताया गया कि आगामी वर्ष में मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और भक्तों की सुविधाओं के लिए कई योजनाएं बनाई जा रही हैं।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी लोगों ने एक-दूसरे को चित्रगुप्त पूजा की शुभकामनाएं दीं और समाज की एकजुटता के लिए संकल्प लिया। बिरादरी भोज के दौरान पारंपरिक व्यंजनों की सुगंध ने माहौल को और भी आनंदमय बना दिया।
देवघर का यह सार्वजनिक चित्रगुप्त मंदिर वर्षों से चित्रांश समाज की आस्था का केंद्र रहा है। यहां हर वर्ष कार्तिक शुक्ल द्वितीया (यम द्वितीया) के दिन पूजा आयोजित की जाती है, जिसमें चित्रगुप्त भगवान की आराधना के साथ पारिवारिक सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
समाज के लोगों का कहना है कि इस तरह के आयोजन से नई पीढ़ी को अपने संस्कार और परंपरा से जोड़ने का अवसर मिलता है।
इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने कहा कि “यह आयोजन केवल पूजा का नहीं बल्कि समाज के आत्मबल और एकता का प्रतीक है।”
पूरे कार्यक्रम में अनुशासन, श्रद्धा और सौहार्द का संदेश झलकता रहा। देवघर के नंदन पहाड़ स्थित सार्वजनिक चित्रगुप्त मंदिर में इस वर्ष का आयोजन हर मायने में ऐतिहासिक और प्रेरणादायी रहा।

