नई दिल्ली: अगर आप रटकर पढ़ाई करने के आदी हैं, तो सावधान हो जाइए! केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने देशभर के लाखों स्कूलों में पढ़ाई का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत अब प्राइमरी कक्षाओं में बच्चों को “रटने” की बजाय “समझकर सीखने” पर जोर दिया जाएगा। बोर्ड ने इसके लिए एक नया टीचिंग-लर्निंग मॉड्यूल तैयार किया है, जो नवंबर 2025 से लागू होगा।
अब कंसेप्ट बेस्ड लर्निंग पर फोकस
CBSE के मुताबिक, नई नीति का मकसद बच्चों को “लाइफ स्किल्स” और “प्रॉब्लम सॉल्विंग एप्रोच” सिखाना है। इसके तहत शिक्षकों को बच्चों को प्रैक्टिकल और एक्टिविटी बेस्ड तरीके से पढ़ाने का निर्देश दिया गया है। कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को अब हर विषय में ‘कंसेप्ट क्लियर’ करने के लिए प्रयोग, कहानी, रोल-प्ले और इंटरएक्टिव सेशन कराने होंगे।
CBSE अधिकारी ने बताया —
“हम चाहते हैं कि बच्चे केवल किताबों तक सीमित न रहें। उन्हें यह समझना जरूरी है कि वे जो पढ़ रहे हैं, उसका वास्तविक जीवन में क्या उपयोग है।”
रटने वाली पढ़ाई खत्म — “सीखो और समझो” मॉडल शुरू
अब तक छोटे बच्चों को परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए रटने की आदत डाली जाती थी। लेकिन नई प्रणाली में इस पर रोक लगा दी गई है। अब छात्रों को ‘थिंकिंग, एनालिसिस और एप्लिकेशन बेस्ड’ प्रश्नों से जोड़ा जाएगा। CBSE के अनुसार, शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम (Teacher Training Modules) भी अपडेट किए गए हैं ताकि सभी शिक्षक नए मॉडल के अनुरूप बच्चों को गाइड कर सकें।
स्कूलों को नए निर्देश
सीबीएसई ने सभी संबद्ध स्कूलों को सर्कुलर जारी करते हुए कहा है कि वे बच्चों के दैनिक शिक्षण में “क्रिटिकल थिंकिंग”, “टीमवर्क” और “क्रिएटिविटी” को प्राथमिकता दें। इसके लिए ‘क्लासरूम एक्सपेरिमेंट्स’, ‘प्रोजेक्ट वर्क’ और ‘स्टोरी-बेस्ड टीचिंग’ को अनिवार्य किया गया है।
अब बच्चों को साप्ताहिक टेस्ट की जगह ‘लर्निंग असेसमेंट’ कराया जाएगा, जिसमें देखा जाएगा कि बच्चा सीखा हुआ ज्ञान कहां और कैसे लागू कर पा रहा है।
रिपोर्ट कार्ड में भी बड़ा बदलाव
नई व्यवस्था में रिपोर्ट कार्ड अब सिर्फ अंकों पर आधारित नहीं होगा। इसमें बच्चे के व्यवहार, रचनात्मकता, समूह में काम करने की क्षमता और सोचने के तरीके को भी शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों का समग्र मूल्यांकन करना है।
CBSE की नई गाइडलाइन के मुताबिक,
“हर बच्चे में कुछ न कुछ विशेष होता है। हमारी कोशिश है कि उसकी क्षमताओं को सही दिशा में विकसित किया जाए।”
शिक्षा विशेषज्ञों की राय
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव लंबे समय से जरूरी था। भारत में दशकों से बच्चों को परीक्षा पास करने के लिए ‘रटकर सीखने’ की संस्कृति रही है, जिससे उनकी क्रिटिकल थिंकिंग विकसित नहीं हो पाती। नई नीति इस कमी को दूर करेगी।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. मनीष शर्मा कहते हैं —
“अगर बच्चों को शुरू से ही समझने और सवाल पूछने की आदत डाल दी जाए, तो वे आगे चलकर बेहतर निर्णय लेने वाले नागरिक बनेंगे।”
बच्चों के लिए क्या फायदे होंगे?
नई शिक्षा पद्धति के तहत बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे बिना डर के अपनी बात रख सकेंगे। इससे रचनात्मकता, तर्कशक्ति और समस्या सुलझाने की क्षमता में वृद्धि होगी।
बच्चे अब प्रयोग के जरिए सीखेंगे।
शिक्षक उन्हें सवाल पूछने के लिए प्रेरित करेंगे।
होमवर्क की जगह प्रैक्टिकल एक्टिविटी होगी।
रिपोर्ट कार्ड में भावनात्मक और सामाजिक कौशल भी जोड़े जाएंगे।
अभिभावकों के लिए भी जिम्मेदारी बढ़ी
CBSE ने अभिभावकों से भी कहा है कि वे बच्चों पर रटने का दबाव न डालें। घर पर सीखने के माहौल को सहज और रचनात्मक बनाएं। बच्चों के सवालों के जवाब देने की कोशिश करें और उन्हें प्रयोग करने की आज़ादी दें।
नई प्रणाली कब से लागू होगी?
सीबीएसई के अनुसार, यह नई लर्निंग पॉलिसी पायलट प्रोजेक्ट के रूप में 15 राज्यों के चुनिंदा स्कूलों में शुरू हो चुकी है। 2025-26 के शैक्षणिक सत्र से इसे देशभर के सभी CBSE स्कूलों में लागू कर दिया जाएगा।
शिक्षक बोले – “बच्चों का बोझ घटेगा, समझ बढ़ेगी”
कई शिक्षकों ने इस बदलाव का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इस प्रणाली से बच्चों का मानसिक बोझ कम होगा और वे पढ़ाई का आनंद लेंगे।
नोएडा की शिक्षिका पूजा श्रीवास्तव कहती हैं —
“अब बच्चे कॉपी में याद किए वाक्य नहीं लिखेंगे, बल्कि अपने विचार साझा करेंगे। यह बदलाव भविष्य के लिए सकारात्मक कदम है।”
CBSE का यह फैसला भारत की शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में बच्चों का फोकस “अच्छे अंक” से हटकर “अच्छी समझ” पर होगा। शिक्षा अब परीक्षा के अंकों की दौड़ नहीं, बल्कि सीखने और सोचने की यात्रा बनेगी।

