देवघर। धार्मिक सौहार्द्र और सामाजिक एकजुटता की मिसाल पेश करते हुए देवघर के मुस्लिम समुदायों ने छठ पर्व के अवसर पर एक अनोखी पहल की। अंजुमन इस्लामिया की ओर से स्थानीय सरकारी बस स्टैंड से बड़ी मस्जिद के रास्ते गुजरने वाली छठ व्रतियों के लिए विशेष तैयारी की गई। इस दौरान मुस्लिम समाज के लोगों ने न केवल रास्ते की साफ-सफाई की, बल्कि पानी का छिड़काव कर मार्ग को शुद्ध भी किया। इस नेक कार्य में सैफ अली मुख्य रूप से मौजूद रहे, जिन्होंने लोगों को आपसी भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब का संदेश दिया।
छठ पर्व पूरे पूर्वी भारत में आस्था का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। इस पर्व में महिलाएं और पुरुष 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत रखते हैं और अस्ताचलगामी तथा उदयमान सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। ऐसे में व्रतियों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना हर कोई अपना दायित्व समझता है। इसी कड़ी में देवघर के मुस्लिम भाइयों ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए यह कदम उठाया है।
सामाजिक सद्भाव का यह दृश्य देखकर हर कोई भावुक हो उठा। स्थानीय लोगों ने इस पहल की जमकर सराहना की और कहा कि यही है देवघर की पहचान—जहाँ हर धर्म, हर समुदाय मिलकर संस्कृति को संजोने में अपनी अहम भूमिका निभाता है। छठ पर्व सिर्फ हिंदू समाज तक सीमित नहीं, बल्कि यह क्षेत्रीय परंपरा है जिसमें सभी वर्ग बराबर की भागीदारी निभाते हैं।
अंजुमन इस्लामिया के सदस्यों ने बताया कि हर वर्ष छठ व्रतियों का यह मार्ग उपयोग में आता है। बड़ी मस्जिद के पास से बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाशय की ओर प्रस्थान करते हैं। इसलिए पहले से ही इसकी साफ-सफाई और रास्ते को सुगम बनाना आवश्यक था। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म का मूल संदेश प्रेम, सहयोग और भाईचारे को बढ़ावा देना है। इसी सोच के साथ यह पहल की गई है।
सैफ अली ने कहा कि छठ महापर्व हम सभी की सांस्कृतिक धरोहर है। यह पर्व हमें प्रकृति, पर्यावरण और जीवन के मूल तत्वों के प्रति आदर और सम्मान का पाठ पढ़ाता है। उन्होंने कहा, “हम सब एक ही मिट्टी से बने हैं। धर्म कोई दीवार नहीं, बल्कि जोड़ने का कार्य करता है। आज इस कार्यक्रम का उद्देश्य भी यही है कि समाज में एकता बनी रहे और हर त्योहार मिल-जुलकर मनाया जाए।”
कार्यक्रम के दौरान मुस्लिम समुदाय की नवयुवक टीम ने हाथों में झाड़ू उठाकर पूरे रास्ते की सफाई की। कई स्थानों पर पानी छिड़काव कर छठ की पवित्रता और स्वच्छता का ध्यान रखा गया। कुछ लोगों ने व्रतियों को आवश्यक सहयोग देने के लिए जल और प्रसाद सेवा केंद्र भी लगाने की बात कही है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
स्थानीय नागरिकों ने कहा कि यह पहल धार्मिक सहिष्णुता की मिसाल है। जिस प्रकार छठी मैया सबके लिए वरदान देती हैं, उसी प्रकार समाज भी बिना भेदभाव के सबको अपनाकर ही आगे बढ़ सकता है। देवघर जैसे धार्मिक और पर्यटन शहर में इस तरह की एकता और सहयोग की भावना हमेशा ही सौहार्द का संदेश देती रही है।
छठ व्रती महिलाओं ने भी इस कार्य के लिए मुस्लिम समाज का धन्यवाद दिया। उनका कहना था कि व्रत के दौरान पवित्रता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। रास्ते में सफाई और छिड़काव किए जाने से उन्हें काफी सुविधा मिलेगी और मनोबल भी बढ़ा है।
छठ के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था और स्वच्छता को लेकर प्रशासन भी सक्रिय रहता है। ऐसे में सामाजिक संगठनों और समुदायों का सहयोग प्रशासन के प्रयासों को और मजबूती प्रदान करता है। कार्यक्रम में अंजुमन इस्लामिया के कई सदस्य, स्थानीय लोग और युवा बड़ी संख्या में उपस्थित थे, जिन्होंने छठ व्रतियों की सेवा को अपने लिए सौभाग्य बताया।
अंत में आयोजकों ने कहा कि आगे भी हर त्यौहार में इसी प्रकार सभी समुदायों की एकजुटता और सहयोग देखने को मिले, ताकि देवघर प्रेम, आस्था और भाईचारे का संदेश पूरे देश में फैलाता रहे। आज का यह दृश्य आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा है कि धर्म के नाम पर भेदभाव नहीं, बल्कि एकजुटता होनी चाहिए।
छठ पर्व का यह अद्भुत दृश्य यह साबित करता है कि भारत में त्योहार केवल पूजा-पाठ का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक रिश्तों को मजबूत करने का जरिया भी है। मुस्लिम समुदाय की यह पहल देवघर की शान और हमारी सांस्कृतिक विरासत की पहचान है।

