नई दिल्ली, देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर ‘गैस चैंबर’ में तब्दील हो गई है। रविवार की सुबह दिल्लीवासियों ने जब घरों से बाहर कदम रखा तो उन्हें सांस लेना भी भारी लगने लगा। आसमान में धुंध और स्मॉग की मोटी परत छाई रही, जिससे दृश्यता बेहद कम हो गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार पहुंच गया है, जो ‘बेहद खराब’ (Severe) श्रेणी में आता है।
दिल्ली का प्रदूषण स्तर खतरनाक सीमा पर
CPCB के मुताबिक, रविवार सुबह 8 बजे तक आनंद विहार में AQI 452, अशोक विहार में 438, वजीरपुर में 445, और आईटीओ में 428 रिकॉर्ड किया गया। नरेला, पंजाबी बाग, द्वारका और रोहिणी जैसे इलाकों में भी हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई।
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत में हवा की गति बहुत धीमी है और तापमान में गिरावट के कारण प्रदूषक तत्व जमीन के पास जमा हो रहे हैं। यही वजह है कि हवा की गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है।
स्मॉग से घिरी राजधानी — लोगों में बढ़ी चिंता
दिल्ली के कई हिस्सों में इतनी घनी धुंध है कि वाहन चालकों को दिन में भी हेडलाइट जलाकर चलना पड़ रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों को सांस लेने में कठिनाई हो रही है।
मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे हालात में प्रदूषित हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 कण सीधे फेफड़ों में जाकर नुकसान पहुंचाते हैं। इससे दमा, एलर्जी, और आंखों में जलन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ती हैं।
एम्स के डॉक्टरों के अनुसार, “दिल्ली की हवा फिलहाल इतनी खराब है कि यह एक दिन में कई सिगरेट पीने के बराबर फेफड़ों पर असर डाल रही है। जिन लोगों को पहले से श्वसन संबंधी बीमारियां हैं, उन्हें ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।”
स्कूलों में छुट्टी और निर्माण कार्यों पर रोक की संभावना
दिल्ली सरकार ने इस स्थिति पर तुरंत समीक्षा बैठक बुलाई है। पर्यावरण मंत्री ने कहा कि ‘ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP)’ के तहत कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
स्कूलों में छुट्टी पर विचार
निर्माण कार्यों पर अस्थायी रोक
डीजल वाहनों की निगरानी
सड़क पर पानी का छिड़काव
हॉटस्पॉट इलाकों में एंटी-स्मॉग गन का प्रयोग
दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में पहले से ही निर्माण कार्य बंद हैं, लेकिन अब नियमों को और सख्ती से लागू किया जाएगा।
वाहनों और पराली जलाने से बढ़ी परेशानी
विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय हवा की गति 3 किमी प्रति घंटा से भी कम है। ऐसे में पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने का असर सीधे दिल्ली की हवा पर पड़ रहा है।
CPCB के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के कुल प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान करीब 30% है, जबकि बाकी हिस्सा वाहनों के धुएं, औद्योगिक गतिविधियों और सड़क की धूल से आता है।
पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. आर.के. सिंह के अनुसार, “जब तक दिल्ली-एनसीआर में वाहनों की संख्या पर नियंत्रण और कचरा प्रबंधन व्यवस्था मजबूत नहीं होगी, तब तक हवा साफ होना मुश्किल है।”
लोगों से अपील – स्वास्थ्य का रखें ध्यान
सरकार और डॉक्टरों ने जनता से अपील की है कि अनावश्यक बाहर न निकलें, मास्क का प्रयोग करें और सुबह की वॉक या आउटडोर एक्सरसाइज से परहेज करें।
यदि किसी को सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द या आंखों में जलन महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख इलाकों का AQI (2 नवंबर 2025, सुबह 8 बजे तक):
क्षेत्र AQI स्तर श्रेणी
आनंद विहार 452 बेहद खराब
वजीरपुर 445 बेहद खराब
अशोक विहार 438 बेहद खराब
द्वारका सेक्टर-8 417 बेहद खराब
आईटीओ 428 बेहद खराब
पंजाबी बाग 421 बेहद खराब
नरेला 439 बेहद खराब
गुरुग्राम 392 खराब से बेहद खराब
नोएडा 405 बेहद खराब
केंद्रीय एजेंसियों की चेतावनी
सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (SAFAR) के अनुसार, अगले 48 घंटे में हालात और बिगड़ सकते हैं।
यदि हवा की दिशा या गति में सुधार नहीं हुआ तो दिल्ली का AQI 450 से ऊपर जा सकता है।
सरकार ने शुरू की ‘क्लीन एयर ड्राइव’
दिल्ली सरकार ने ‘क्लीन एयर ड्राइव 2025’ की शुरुआत की है, जिसके तहत सड़कों पर सफाई, धूल नियंत्रण, वाहन चेकिंग और हरियाली बढ़ाने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
पर्यावरण मंत्री ने कहा, “यह वक्त राजनीति नहीं बल्कि जिम्मेदारी का है। प्रदूषण से निपटने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।”
राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर हर साल सर्दियों में चिंता का कारण बनता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक क्षेत्रीय स्तर पर समन्वय नहीं होगा और प्रदूषण के स्रोतों पर स्थायी नियंत्रण नहीं लगाया जाएगा, तब तक यह स्थिति दोहराई जाती रहेगी।

