पटना: बिहार की राजनीति में एक बार फिर लालू प्रसाद यादव के परिवार के भीतर की कलह खुलकर सामने आ गई है। राजद (RJD) के दो सबसे प्रमुख चेहरे — तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव — के बीच अब मतभेद सड़कों पर उतर आए हैं। महुआ विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान तेज प्रताप यादव ने अपने छोटे भाई और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने न केवल तेजस्वी को “दूधमुंहा बच्चा” बताया बल्कि खुद को “मुख्यमंत्री पद का असली हकदार” घोषित कर दिया।
महुआ की रैली में गरजे तेज प्रताप यादव
महुआ में आयोजित जनसभा में तेज प्रताप यादव ने कहा,
“मैंने पार्टी के लिए सब कुछ किया, लेकिन अब मेरी उपेक्षा की जा रही है। जो लोग राजनीति का ‘दूध’ भी नहीं पीए हैं, उन्हें नेता बना दिया गया है।”
तेज प्रताप के इस बयान ने न सिर्फ राजद कार्यकर्ताओं को हैरान कर दिया, बल्कि पार्टी नेतृत्व को भी असहज स्थिति में डाल दिया है। महुआ विधानसभा क्षेत्र वही सीट है, जहां से तेज प्रताप 2015 में विधायक चुने गए थे। हालांकि, 2020 के चुनाव में उन्होंने यह सीट छोड़ दी थी।
तेजस्वी यादव पर सीधा हमला
तेज प्रताप यादव ने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें पार्टी में “दरकिनार” किया जा रहा है और कुछ लोग “परिवार की राजनीति” को अपने हिसाब से चलाना चाहते हैं।
“मैं लालू यादव का बड़ा बेटा हूं। पार्टी का असली वारिस मैं हूं। मुख्यमंत्री बनने की दावेदारी मेरी है, किसी दूधमुंहे बच्चे की नहीं।”
इस बयान के बाद तेजस्वी समर्थकों में नाराजगी फैल गई है। सोशल मीडिया पर तेजस्वी यादव के समर्थक तेज प्रताप के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। वहीं, तेज प्रताप के समर्थक कह रहे हैं कि “अब समय आ गया है कि पार्टी में असली नेता को पहचान मिलनी चाहिए।”

पार्टी के अंदर बढ़ रही खींचतान
राजद सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों से तेज प्रताप और तेजस्वी के बीच मतभेद बढ़ते जा रहे हैं। तेज प्रताप यादव को लगता है कि पार्टी में उनकी भूमिका सीमित कर दी गई है, जबकि तेजस्वी यादव को “एकमात्र चेहरा” के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता इस विवाद को शांत करने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच अब यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।
लालू यादव की मुश्किलें बढ़ीं
लालू प्रसाद यादव के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है। एक ओर पार्टी को चुनावी मोड में रखना है, वहीं दूसरी ओर अपने दोनों बेटों के बीच चल रही खींचतान को संभालना भी है।
पार्टी के सूत्र बताते हैं कि लालू यादव ने दोनों बेटों को “आपसी मतभेद भुलाकर” एकजुट होकर काम करने की सलाह दी है, लेकिन तेज प्रताप के हालिया बयान ने उस कोशिश पर पानी फेर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषण: पारिवारिक कलह का राजनीतिक असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान का असर राजद की चुनावी रणनीति पर जरूर पड़ेगा।
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. अजय मिश्रा कहते हैं —
“तेजस्वी यादव वर्तमान में विपक्ष का चेहरा बन चुके हैं। ऐसे में पार्टी के भीतर से इस तरह के बयान पार्टी की एकता पर चोट करते हैं। जनता के बीच यह संदेश जा रहा है कि राजद परिवार में एकता नहीं है।”
उन्होंने आगे कहा कि “अगर लालू परिवार इस विवाद को जल्द नहीं सुलझाता, तो इसका फायदा एनडीए को मिल सकता है।”
एनडीए ने साधा निशाना
तेज प्रताप यादव के बयान पर एनडीए नेताओं ने भी चुटकी ली है। भाजपा प्रवक्ता अरविंद सिंह ने कहा,
“जब परिवार ही बिखरा हुआ है, तो जनता क्या भरोसा करेगी? लालू परिवार की राजनीति अब सिर्फ सत्ता की लड़ाई बनकर रह गई है।”
जेडीयू नेताओं ने भी कहा कि राजद के भीतर चल रहा यह घमासान बताता है कि पार्टी में अनुशासन की कमी है और जनता इसका असर चुनाव में जरूर दिखाएगी।
जनता के बीच चर्चा
महुआ और आसपास के क्षेत्रों में तेज प्रताप यादव का यह बयान चर्चा का विषय बन गया है। कई स्थानीय लोगों का कहना है कि “तेज प्रताप का गुस्सा वाजिब हो सकता है, लेकिन इस वक्त ऐसे बयान से पार्टी को नुकसान होगा।”
वहीं कुछ लोग इसे “भाई-भाई की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा” बता रहे हैं।
बिहार की राजनीति में लालू परिवार की एकता हमेशा राजद की ताकत रही है, लेकिन अब यही एकता उसकी कमजोरी बनती दिख रही है। तेज प्रताप और तेजस्वी के बीच खुला टकराव पार्टी के भविष्य पर सवाल खड़े कर रहा है।
अगर लालू यादव इस मतभेद को जल्द नहीं सुलझाते, तो यह विवाद राजद के चुनावी प्रदर्शन पर भारी पड़ सकता है।

