गया (बिहार): बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के प्रचार अभियान में नेताओं के बयानों की तल्खी लगातार बढ़ती जा रही है। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक दिलीप जायसवाल ने बुधवार को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि “जो परिवार नहीं संभाल पाए, वो बिहार क्या संभालेंगे।” दिलीप जायसवाल ने गया में आयोजित एक चुनावी सभा के दौरान RJD और महागठबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आरजेडी शासनकाल में बिहार ने केवल भ्रष्टाचार, जंगलराज और गुंडागर्दी देखी है। उनके अनुसार, जनता अब उस दौर को कभी नहीं भूल सकती जब शाम होते ही सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता था।
जायसवाल ने कहा —
“तेजस्वी यादव जिस परिवार से आते हैं, वो आज भी आपस में एकजुट नहीं हैं। जो अपने घर और पार्टी को नहीं संभाल सके, वो बिहार के 13 करोड़ लोगों की जिम्मेदारी कैसे उठाएंगे?”
महागठबंधन पर हमला
जायसवाल ने महागठबंधन को “विकास विरोधी गठजोड़” बताते हुए कहा कि यह सिर्फ सत्ता के लिए बना हुआ एक अस्थायी समझौता है। उन्होंने दावा किया कि बिहार की जनता ने नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य को स्थिरता और विकास की राह पर आगे बढ़ते देखा है।
उन्होंने कहा, “मोदी जी के नेतृत्व में बिहार को केंद्र से करोड़ों रुपये की योजनाएं मिली हैं। चाहे सड़क हो, बिजली हो या गरीब कल्याण योजनाएं — बीजेपी सरकार ने हर वर्ग के उत्थान के लिए काम किया है। जबकि महागठबंधन की सरकारें सिर्फ घोषणाओं और वादों तक सीमित रहीं।”

RJD पर ‘परिवारवाद’ का आरोप
भाजपा नेता ने RJD पर परिवारवाद की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी में लोकतंत्र नहीं है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, “आरजेडी में हर पद पर परिवार के लोग हैं — पिता पार्टी सुप्रीमो, बेटा मुख्यमंत्री पद के दावेदार और बेटी सांसद। पार्टी के बाकी नेता सिर्फ दर्शक बनकर रह गए हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि तेजस्वी यादव को आज भी अपने पिता लालू प्रसाद यादव के नाम और छवि के सहारे ही राजनीति करनी पड़ रही है। “जो व्यक्ति खुद के दम पर जनता का विश्वास नहीं जीत सकता, वो बिहार को नई दिशा देने का दावा कैसे कर सकता है?” जायसवाल ने कहा।
विकास और सुशासन पर भरोसा
सभा में दिलीप जायसवाल ने जनता से अपील की कि वे विकास और स्थिरता के लिए फिर से एनडीए को मौका दें। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बिहार में बुनियादी ढांचे, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में जो सुधार हुए हैं, वो किसी से छिपे नहीं हैं।
उन्होंने कहा —
“बिहार को अब जाति और परिवार की राजनीति से ऊपर उठकर विकास की राजनीति करनी होगी। प्रधानमंत्री मोदी का ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ ही राज्य की असली जरूरत है।”
तेजस्वी यादव पर सीधा हमला
तेजस्वी यादव को निशाने पर लेते हुए जायसवाल ने कहा कि वे केवल वादों की राजनीति करते हैं। “तेजस्वी जी हर चुनाव में 10 लाख नौकरी देने का वादा करते हैं, लेकिन अपने वादे का कोई हिसाब नहीं देते। RJD के शासन में न कानून था न रोज़गार — सिर्फ डर और भ्रष्टाचार का माहौल था,” उन्होंने कहा।
उन्होंने आगे कहा कि आज बिहार की नई पीढ़ी उस दौर में लौटना नहीं चाहती। “नौजवानों को रोजगार चाहिए, उद्योग चाहिए, शिक्षा चाहिए — न कि पोस्टरबाजी और नारेबाजी।”
जनता का मूड एनडीए के पक्ष में
सभा में मौजूद कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने भी बीजेपी नेता की बातों का समर्थन किया। जायसवाल ने कहा कि जनता का मूड साफ है — वह स्थिर और विकासशील सरकार चाहती है।
उन्होंने कहा, “बिहार ने पिछले 15 वर्षों में जिस रफ्तार से तरक्की की है, उसे बनाए रखने के लिए जनता इस बार भी भाजपा और एनडीए को ही चुनने जा रही है।”
चुनावी समीकरण पर नजर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दिलीप जायसवाल जैसे वरिष्ठ नेताओं के बयान एनडीए की रणनीति का हिस्सा हैं। भाजपा अब सीधे तौर पर आरजेडी और तेजस्वी यादव को निशाने पर लेकर चुनावी मुद्दों को विकास बनाम परिवारवाद के फ्रेम में पेश कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि “जो परिवार नहीं संभाल पाए, वो बिहार क्या संभालेंगे” जैसी बयानबाजी आने वाले दिनों में भाजपा के प्रचार का प्रमुख नारा बन सकती है। इससे पार्टी को ग्रामीण इलाकों में फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है।
दिलीप जायसवाल के इस बयान से बिहार की सियासत में नया ताप जरूर बढ़ गया है। जहां भाजपा इसे RJD के परिवारवाद पर चोट मान रही है, वहीं महागठबंधन इसे जनता का ध्यान भटकाने की चाल बता रहा है।
अब देखना यह होगा कि जनता किसके विकास मॉडल पर भरोसा जताती है — भाजपा का सुशासन या आरजेडी का वादा।

