भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। क्या देश में बिटकॉइन, इथेरियम जैसी क्रिप्टोकरेंसी पर पूरी तरह से बैन लगाया जा सकता है? भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से आए हालिया बयान के बाद इस सवाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। आरबीआई ने साफ शब्दों में कहा है कि क्रिप्टोकरेंसी को किसी भी तरह से मुद्रा यानी करेंसी नहीं माना जा सकता और इसे महज “कोड का एक टुकड़ा” बताया है।
क्रिप्टोकरेंसी पर बैन पर विचार कर रहा
नई दिल्ली में शुक्रवार को दिए गए बयान में भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर टी. रवि शंकर ने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी पर पूरी तरह से बैन लगाने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस विषय पर अंतिम फैसला सरकार का होगा। सरकार सभी संबंधित पक्षों, विशेषज्ञों और हितधारकों से सलाह-मशविरा करने के बाद ही कोई ठोस निर्णय लेगी।
RBI
आरबीआई का मानना है कि क्रिप्टोकरेंसी देश की मौद्रिक स्थिरता और वित्तीय व्यवस्था के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है। यही वजह है कि केंद्रीय बैंक लगातार इसके खिलाफ सख्त रुख अपनाता रहा है।
RBI ने क्यों कहा क्रिप्टो कोई करेंसी नहीं है?
डिप्टी गवर्नर टी. रवि शंकर ने क्रिप्टोकरेंसी को लेकर कड़ा बयान देते हुए कहा कि इसमें पैसे की वे बुनियादी विशेषताएं मौजूद नहीं हैं, जो किसी मुद्रा में होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्रिप्टोकरेंसी न तो कोई वित्तीय संपत्ति है और न ही इसे किसी भी तरह की वास्तविक संपत्ति का दर्जा दिया जा सकता है।
उनके अनुसार, क्रिप्टोकरेंसी केवल एक डिजिटल कोड है, जिसकी कीमत पूरी तरह से अटकलों और सट्टेबाजी पर आधारित होती है। इसका कोई आंतरिक मूल्य नहीं होता और न ही इसके पीछे किसी संस्था या सरकार की गारंटी होती है।
क्रिप्टो टोकन को पैसा क्यों नहीं माना जा सकता?
आरबीआई के डिप्टी गवर्नर ने विस्तार से समझाया कि क्रिप्टो टोकन को पैसा क्यों नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्रा का मूल्य इस बात पर निर्भर करता है कि वह भुगतान का भरोसेमंद माध्यम हो और उसके पीछे कोई जारीकर्ता हो। जबकि क्रिप्टोकरेंसी में ऐसा कुछ भी नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि क्रिप्टो टोकन किसी भुगतान के वादे से समर्थित नहीं होते, इनका कोई आधिकारिक जारीकर्ता नहीं होता और इनकी कीमतें अत्यधिक अस्थिर रहती हैं। यही कारण है कि इन्हें मुद्रा के रूप में स्वीकार करना खतरनाक हो सकता है।
भारत में तेजी से बढ़ रहे हैं क्रिप्टो निवेशक
हालांकि आरबीआई का रुख सख्त है, लेकिन भारत में क्रिप्टो निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। खासतौर पर 18 से 25 वर्ष के युवा निवेशक इस बाजार में सबसे ज्यादा सक्रिय हैं। आसान निवेश विकल्प और तेजी से मुनाफे की उम्मीद युवाओं को क्रिप्टो की ओर आकर्षित कर रही है।
फिलहाल भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर कोई स्पष्ट रेगुलेटरी फ्रेमवर्क मौजूद नहीं है। न तो इसे आधिकारिक मान्यता मिली है और न ही इसे पूरी तरह अवैध घोषित किया गया है।
क्रिप्टो पर बैन नहीं, लेकिन टैक्स भारी
भारत में फिलहाल क्रिप्टोकरेंसी में ट्रेडिंग या लेन-देन करना गैरकानूनी नहीं है, लेकिन सरकार ने इस पर सख्त टैक्स नियम लागू किए हैं। क्रिप्टो से होने वाली कमाई पर 30 प्रतिशत टैक्स और हर ट्रांजैक्शन पर 1 प्रतिशत TDS लिया जाता है। इससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार इस सेक्टर पर नजर बनाए हुए है।
आने वाले समय में क्या होगा?
आरबीआई के हालिया बयान से यह साफ है कि क्रिप्टोकरेंसी को लेकर आने वाले समय में सरकार कोई बड़ा फैसला ले सकती है। बैन, सख्त नियम या पूरी तरह नई नीति—इनमें से क्या रास्ता चुना जाएगा, यह सरकार के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा। लेकिन इतना तय है कि क्रिप्टो को लेकर अनिश्चितता अभी खत्म होने वाली नहीं है।
यह लेख मीडिया रिपोर्ट्स और आरबीआई के बयानों पर आधारित है। क्रिप्टोकरेंसी में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार की राय अवश्य लें।

