देवघर। खेलो इंडिया और फिट इंडिया अभियान को धरातल पर मजबूती देने के उद्देश्य से क्रीड़ा भारती झारखंड प्रांत द्वारा आज देवघर के एक निजी स्कूल के सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक का मुख्य विषय “गांव की मिट्टी से ओलंपिक के मंच तक कबड्डी को पहुंचाना” रहा। इस बैठक में झारखंड के विभिन्न जिलों से आए क्रीड़ा भारती के पदाधिकारी और खेल प्रेमी शामिल हुए।

बैठक को संबोधित करते हुए क्रीड़ा भारती झारखंड प्रांत के महासचिव संजीत कुमार राय ने कहा कि वर्ष 2036 में ओलंपिक खेलों का आयोजन भारत में हो, यह देशवासियों की सामूहिक अभिलाषा है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार भी 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए गंभीर प्रयास कर रही है और इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को तैयार किया जा रहा है।
उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि 1936 के बर्लिन ओलंपिक के दौरान पहली बार कबड्डी का प्रदर्शन खेल के रूप में किया गया था, जिसमें महाराष्ट्र के खिलाड़ियों की अहम भूमिका रही थी। वर्ष 2036 में उस ऐतिहासिक क्षण के 100 वर्ष पूरे होंगे, ऐसे में कबड्डी को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का यह सुनहरा अवसर है।
झारखंड के 24 जिलों में कबड्डी का महासंग्राम
बैठक के दौरान यह जानकारी दी गई कि क्रीड़ा भारती झारखंड प्रांत द्वारा राज्य के 24 जिलों में लगभग 3000 कबड्डी टीमों को शामिल करने का लक्ष्य तय किया गया है। इस अभियान के तहत 100 से अधिक स्थानों पर अगले दो महीनों के भीतर कबड्डी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा।
इन प्रतियोगिताओं को चार आयु वर्गों में विभाजित किया गया है—
1. 10 से 14 वर्ष
2. 14 से 19 वर्ष
3. 19 से 35 वर्ष
4. 35 वर्ष से अधिक
इस पहल का उद्देश्य हर आयु वर्ग के खिलाड़ियों को खेल से जोड़ना और फिट इंडिया अभियान को जन-आंदोलन बनाना है।
ऑनलाइन ऐप से होगा रजिस्ट्रेशन
क्रीड़ा भारती द्वारा खिलाड़ियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन ऐप आधारित रजिस्ट्रेशन प्रणाली शुरू की गई है। इच्छुक खिलाड़ी मोबाइल ऐप के माध्यम से आसानी से पंजीकरण कर सकते हैं। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के प्रतिभावान खिलाड़ियों को बराबर का अवसर मिलेगा।
कबड्डी को गांव से ग्लोबल मंच तक ले जाने की तैयारी
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि कबड्डी भारत की पारंपरिक खेल विरासत है, जो गांवों की मिट्टी में पली-बढ़ी है। अब समय आ गया है कि इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जाए। झारखंड जैसे राज्यों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस सही मंच और मार्गदर्शन की आवश्यकता है।
बैठक के अंत में सभी सदस्यों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि कबड्डी को ओलंपिक खेलों में शामिल कराने के लक्ष्य को लेकर वे पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे और युवाओं को खेल के प्रति जागरूक करेंगे।

