
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर
Pollution Effects On Kids Brain And Health: दिल्ली-एनसीआर, खासकर दिल्ली और नोएडा में वायु प्रदूषण बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। हालात ऐसे बन गए हैं कि लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है और आंखों में जलन आम समस्या बन गई है। सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर देखा जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
बच्चों के दिमाग पर पड़ रहा गहरा असर
डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कण बच्चों के फेफड़ों के जरिए शरीर में प्रवेश कर दिमाग तक पहुंच सकते हैं। इससे बच्चों की याददाश्त, एकाग्रता और सीखने की क्षमता प्रभावित हो रही है, जो उनके मानसिक विकास के लिए बेहद नुकसानदेह है।
व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
कई अध्ययनों में सामने आया है कि प्रदूषित वातावरण में रहने वाले बच्चों में चिड़चिड़ापन, ध्यान की कमी और व्यवहार संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। लंबे समय तक जहरीली हवा में रहने से बच्चों के न्यूरोलॉजिकल सिस्टम पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
फेफड़ों और शारीरिक सेहत को नुकसान
बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण की वजह से बच्चों में अस्थमा, एलर्जी, सांस की तकलीफ और बार-बार सर्दी-खांसी की समस्या बढ़ रही है। इसके अलावा फेफड़ों की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने का भी खतरा बना रहता है।
डॉक्टरों की सलाह, बरतें ये सावधानियां
डॉक्टरों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों को खुले में खेलने से फिलहाल बचाएं, बाहर निकलते समय मास्क का इस्तेमाल कराएं और घर के अंदर स्वच्छ हवा बनाए रखने के लिए एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें। साथ ही पौष्टिक आहार और पर्याप्त पानी देना भी जरूरी बताया गया है।
समय रहते कदम न उठाए तो बढ़ेगा खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर प्रदूषण पर जल्द नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले समय में बच्चों की सेहत पर इसका दीर्घकालिक और गंभीर असर देखने को मिल सकता है। इसलिए व्यक्तिगत स्तर के साथ-साथ सरकारी और सामाजिक स्तर पर भी ठोस कदम उठाना जरूरी है।
यह खबर सामान्य जानकारी और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या या लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।
