नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान सरकार को एक और अहम विधेयक पारित कराने में सफलता मिली है। लोकसभा के बाद अब राज्यसभा में भी ‘जी राम जी’ बिल पास हो गया है। हालांकि, इस दौरान सदन में जमकर हंगामा देखने को मिला। विपक्षी दलों ने बिल का तीखा विरोध करते हुए नारेबाजी की और अंततः वॉकआउट कर दिया।

राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह बिल जनहित के बजाय राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए लाया गया है। विपक्षी सांसदों का कहना था कि सरकार बिना व्यापक चर्चा और सहमति के जल्दबाजी में इस विधेयक को पास करा रही है।
क्या है ‘जी राम जी’ बिल?
सरकार की ओर से पेश किए गए ‘जी राम जी’ बिल का उद्देश्य मौजूदा एक प्रमुख सरकारी योजना के नाम और स्वरूप में बदलाव करना बताया गया है। सरकार का दावा है कि इससे योजना की पहचान और प्रभावशीलता दोनों में सुधार होगा।
हालांकि, विपक्ष इसे इतिहास और सामाजिक संतुलन से छेड़छाड़ करार दे रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि नाम बदलने से न तो ज़मीनी स्तर पर समस्याएं सुलझेंगी और न ही गरीबों और मजदूरों को कोई अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
राज्यसभा में क्यों हुआ हंगामा?
राज्यसभा में बिल पर चर्चा के दौरान विपक्षी सांसदों ने सरकार पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अनदेखी का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना था कि बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजा जाना चाहिए था, ताकि सभी पक्षों की राय ली जा सके।
लेकिन सरकार ने इन मांगों को खारिज करते हुए कहा कि इस पर पहले ही पर्याप्त चर्चा हो चुकी है। इसके बाद विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। अंततः विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया और बहुमत के आधार पर बिल पास हो गया।
मनरेगा का नाम बदलने से भड़की टीएमसी
‘जी राम जी’ बिल के तहत मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के नाम में बदलाव को लेकर सबसे तीखा विरोध तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ओर से देखने को मिला।
टीएमसी सांसदों ने इसे महात्मा गांधी के योगदान का अपमान बताया। पार्टी के सांसदों का कहना है कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के करोड़ों गरीबों और मजदूरों की जीवनरेखा है। ऐसे में इसका नाम बदलना अस्वीकार्य है।
संसद भवन के मुख्य द्वार पर धरना
राज्यसभा से बिल पास होने के बाद टीएमसी सांसदों का गुस्सा और बढ़ गया। पार्टी के कई सांसद संसद भवन के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए। इस दौरान उन्होंने हाथों में तख्तियां लेकर नारे लगाए और सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग की।
टीएमसी नेताओं ने कहा कि यह केवल नाम बदलने का मामला नहीं है, बल्कि यह संविधान, लोकतंत्र और महात्मा गांधी की विचारधारा से जुड़ा सवाल है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया, तो विरोध और तेज किया जाएगा।
सरकार का क्या कहना है?
सरकार की ओर से कहा गया है कि बिल का उद्देश्य किसी की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं है। सरकार का दावा है कि नाम बदलने से योजना की पहुंच और प्रभाव बेहतर होगा और प्रशासनिक स्तर पर सुधार आएगा।
सरकार ने यह भी कहा कि विपक्ष बिना तथ्यों के भ्रम फैला रहा है और जनता के हित में किए जा रहे सुधारों का विरोध कर रहा है।
राजनीतिक मायने
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ‘जी राम जी’ बिल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और गहरा सकता है। मनरेगा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर नाम बदलने का फैसला आगामी चुनावों में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, विपक्ष इसे गरीब और ग्रामीण मतदाताओं से जोड़कर सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश करेगा, जबकि सरकार इसे प्रशासनिक सुधार और नई पहचान से जोड़कर पेश करेगी।
आगे क्या?
अब जबकि लोकसभा और राज्यसभा दोनों से बिल पास हो चुका है, अगला कदम राष्ट्रपति की मंजूरी का होगा। मंजूरी मिलने के बाद यह कानून का रूप ले लेगा।
वहीं विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे इस मुद्दे को सड़क से लेकर संसद और अदालत तक ले जा सकते हैं। आने वाले दिनों में इस बिल को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और विरोध प्रदर्शन तेज होने की संभावना है।
