कल यानी 21 दिसंबर को साल का सबसे छोटा दिन और सबसे लंबी रात होगी। इस दिन 13 घंटे 41 मिनट तक अंधेरा छाया रहेगा, जबकि दिन की अवधि सबसे कम होगी। खगोल विज्ञान की भाषा में इस खगोलीय घटना को शीत अयनांत (Winter Solstice) कहा जाता है। यह न केवल विज्ञान की दृष्टि से बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और मौसम के लिहाज से भी बेहद खास दिन माना जाता है।

क्या है शीत अयनांत (Winter Solstice)?
शीत अयनांत वह स्थिति होती है जब पृथ्वी का उत्तरी गोलार्ध सूर्य से सबसे अधिक झुका होता है। पृथ्वी अपनी धुरी पर लगभग 23.5 डिग्री झुकी हुई है और इसी झुकाव के कारण साल में दिन-रात की लंबाई बदलती रहती है।
21 दिसंबर को सूर्य की किरणें मकर रेखा (Tropic of Capricorn) पर सीधी पड़ती हैं। इस कारण उत्तरी गोलार्ध में सूर्य की रोशनी सबसे कम समय के लिए रहती है और दिन छोटा व रात लंबी हो जाती है।
कितना छोटा होगा दिन, कितनी लंबी होगी रात?
भारत समेत पूरे उत्तरी गोलार्ध में इस दिन—
दिन की अवधि: लगभग 10 घंटे 19 मिनट
रात की अवधि: करीब 13 घंटे 41 मिनट
सूर्योदय देर से और सूर्यास्त जल्दी होगा
यही वजह है कि इस दिन ठंड का असर भी ज्यादा महसूस किया जाता है।
ठंड क्यों बढ़ जाती है?
शीत अयनांत के बाद भी कुछ दिनों तक ठंड बढ़ती रहती है, क्योंकि—
सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती हैं
धरती को मिलने वाली ऊष्मा कम हो जाती है
रातें लंबी होने से जमीन अधिक ठंडी हो जाती है
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, दिसंबर के आखिरी और जनवरी के शुरुआती दिन सबसे ज्यादा सर्द होते हैं।
21 दिसंबर के बाद क्या होगा?
21 दिसंबर के बाद एक अहम बदलाव शुरू होता है—
दिन धीरे-धीरे लंबे होने लगते हैं
रातें छोटी होने लगती हैं
सूर्य उत्तर दिशा की ओर गति करता है, जिसे उत्तरायण कहा जाता है
हालांकि ठंड का असर जनवरी तक बना रहता है, लेकिन धूप की अवधि बढ़ने से धीरे-धीरे मौसम में बदलाव आने लगता है।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
भारत में शीत अयनांत का धार्मिक महत्व भी है। कई परंपराओं में इसे—
सूर्य के उत्तरायण की शुरुआत का संकेत
सकारात्मक ऊर्जा और प्रकाश की वापसी
आत्मिक जागरण का समय
माना जाता है। दक्षिण भारत में इससे जुड़ी कई परंपराएं और पर्व भी प्रचलित हैं।
पूरी दुनिया में कैसे मनाया जाता है?
शीत अयनांत सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में खास माना जाता है—
यूरोप में इसे Yule Festival
चीन में Dongzhi Festival
जापान में स्नान और शुद्धिकरण पर्व
के रूप में मनाया जाता है। यह दिन प्रकृति के संतुलन और सूर्य की अहमियत को दर्शाता है।
विज्ञान की नजर से क्यों है अहम?
खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार—
यह पृथ्वी की गति और झुकाव को समझने का बेहतरीन उदाहरण है
मौसम चक्र, जलवायु और कृषि पर इसका सीधा असर पड़ता है
किसानों के लिए यह रबी फसलों के विकास का संकेतक समय होता है
खेती और पर्यावरण पर असर
शीत अयनांत के बाद दिन बढ़ने से—
फसलों को ज्यादा धूप मिलने लगती है
सरसों, गेहूं जैसी रबी फसलों की बढ़त तेज होती है
पर्यावरण संतुलन में बदलाव आता है
21 दिसंबर यानी कल का दिन साल का सबसे छोटा दिन और सबसे लंबी रात लेकर आ रहा है। यह केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि प्रकृति, मौसम, धर्म और विज्ञान से गहराई से जुड़ा हुआ दिन है। इसके बाद दिन लंबे होने लगेंगे, जो आने वाले समय में मौसम के बदलाव का संकेत देगा।
