By Vikash Kumar ( Vicky )
डिजिटल युग में जहां ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई और मोबाइल ऐप्स ने लोगों की जिंदगी आसान बना दी है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी ठगी के नए-नए तरीके खोज लिए हैं। आज के समय में एक छोटी सी लापरवाही आपकी जीवनभर की कमाई को पलभर में खत्म कर सकती है। साइबर फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और शिकार बनने वालों में बुजुर्ग, युवा ही नहीं बल्कि पढ़े-लिखे लोग भी शामिल हैं।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल हजारों करोड़ रुपये की ठगी ऑनलाइन फ्रॉड के जरिए की जा रही है। ठग खुद को बैंक कर्मचारी, पुलिस अधिकारी, केवाईसी एजेंट या फिर सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को झांसे में लेते हैं। ऐसे में जरूरी है कि हर नागरिक साइबर ठगी के तरीकों और उससे बचाव के उपायों को अच्छी तरह समझे।
कैसे होता है साइबर फ्रॉड?
साइबर ठग आमतौर पर लोगों की जल्दबाजी और डर का फायदा उठाते हैं। वे फोन कॉल, मैसेज, ईमेल या सोशल मीडिया के जरिए संपर्क करते हैं। कई बार वे कहते हैं कि आपका बैंक अकाउंट बंद होने वाला है, केवाईसी अपडेट नहीं है या आपके नाम पर कोई शिकायत दर्ज हुई है। डर के माहौल में लोग बिना सोचे-समझे ओटीपी, पिन या अन्य निजी जानकारी साझा कर देते हैं और यहीं से ठगी की शुरुआत हो जाती है।
साइबर फ्रॉड के सबसे आम तरीके
फर्जी कॉल और मैसेज – खुद को बैंक या सरकारी कर्मचारी बताकर कॉल करना।
OTP फ्रॉड – ओटीपी मांगकर खाते से पैसे निकाल लेना।
UPI कलेक्ट स्कैम – पैसे पाने के बहाने भुगतान रिक्वेस्ट भेजना।
फर्जी लिंक – इनाम, लोन या सब्सिडी के नाम पर लिंक भेजना।
सोशल मीडिया हैकिंग – फेसबुक या व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर पैसे मांगना।
फर्जी ऐप्स – नकली लोन या गेमिंग ऐप डाउनलोड करवाना।
एक छोटी गलती कैसे बन जाती है बड़ा नुकसान
अक्सर लोग सोचते हैं कि “बस एक बार ओटीपी बता देने से क्या होगा” या “लिंक खोलने से नुकसान नहीं होगा”, लेकिन यही छोटी सी गलती आपके पूरे बैंक बैलेंस को साफ कर सकती है। साइबर अपराधी बेहद शातिर होते हैं और सेकेंडों में अकाउंट खाली कर देते हैं। कई मामलों में पीड़ित को पता भी नहीं चलता कि पैसा कब और कैसे उड़ गया।
साइबर फ्रॉड से बचने के जरूरी तरीके
OTP कभी साझा न करें
बैंक, पुलिस या कोई भी सरकारी एजेंसी कभी फोन पर ओटीपी नहीं मांगती।
अनजान लिंक पर क्लिक न करें
SMS, व्हाट्सएप या ईमेल में आए संदिग्ध लिंक से दूर रहें।
UPI रिक्वेस्ट को ध्यान से देखें
पैसे पाने के लिए नहीं, बल्कि देने के लिए रिक्वेस्ट आती है – यह बात याद रखें।
ऐप्स सिर्फ ऑफिशियल स्टोर से डाउनलोड करें
थर्ड पार्टी वेबसाइट से ऐप डाउनलोड करना खतरनाक हो सकता है।
सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा न करें
डेट ऑफ बर्थ, मोबाइल नंबर और बैंक डिटेल्स सार्वजनिक न करें।
फोन पर डराने वाली बातों में न आएं
अगर कोई अकाउंट बंद होने या गिरफ्तारी की धमकी दे, तो तुरंत कॉल काट दें।
दो-स्तरीय सुरक्षा (2FA) चालू रखें
अपने बैंकिंग और सोशल मीडिया अकाउंट में अतिरिक्त सुरक्षा जरूर रखें।
अगर साइबर फ्रॉड हो जाए तो क्या करें?
अगर आपके साथ ऑनलाइन ठगी हो जाती है तो घबराएं नहीं। तुरंत कार्रवाई करना बेहद जरूरी है।
1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें
cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें
अपने बैंक को तुरंत सूचित करें
नजदीकी पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दें
समय पर शिकायत करने से पैसे वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
सरकार और बैंकों की चेतावनी
सरकार और बैंक समय-समय पर लोगों को अलर्ट जारी करते रहते हैं कि किसी भी अनजान कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) भी साफ कह चुका है कि बैंक कभी भी फोन पर गोपनीय जानकारी नहीं मांगते।
जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार
साइबर फ्रॉड से बचने का सबसे बड़ा उपाय जागरूकता है। जब तक लोग सतर्क नहीं होंगे, ठग नए-नए तरीके अपनाते रहेंगे। जरूरी है कि परिवार के बुजुर्गों, बच्चों और कम तकनीकी ज्ञान रखने वालों को भी इन खतरों के बारे में बताया जाए।
डिजिटल सुविधाओं का इस्तेमाल जितना आसान है, उतना ही जोखिम भरा भी हो सकता है। एक छोटी सी गलती आपकी मेहनत की कमाई को पलभर में खत्म कर सकती है। इसलिए सतर्क रहें, जागरूक बनें और किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या लिंक से दूरी बनाए रखें। याद रखें—सावधानी ही सुरक्षा है
