By Vikash Kumar ( Vicky )
अस्थमा एक ऐसी सांस से जुड़ी बीमारी है, जिसमें मरीज को अचानक सांस फूलने, सीने में जकड़न, घरघराहट और खांसी की समस्या होने लगती है। अस्थमा के मरीजों के लिए सबसे भरोसेमंद और तुरंत राहत देने वाला साधन होता है अस्थमा पंप, जिसे आम भाषा में इनहेलर कहा जाता है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर इस छोटी सी डिब्बी में ऐसा क्या होता है, जो कुछ ही सेकंड में सांसें सामान्य कर देता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि अस्थमा पंप कैसे काम करता है और इसमें मौजूद दवाएं शरीर पर क्या असर डालती हैं।

अस्थमा क्या है और सांस क्यों रुकने लगती है
अस्थमा फेफड़ों की एक पुरानी बीमारी है, जिसमें फेफड़ों की वायुनलिकाओं यानी एयरवे में सूजन आ जाती है। ये वही रास्ते होते हैं, जिनसे होकर हवा अंदर जाती है और बाहर निकलती है। जब इन नलिकाओं में सूजन आती है, तो वे संकरी हो जाती हैं और उनमें म्यूकस यानी बलगम भी बनने लगता है। इसका नतीजा यह होता है कि हवा का आना-जाना मुश्किल हो जाता है और मरीज को घुटन जैसी स्थिति महसूस होती है।
धूल, धुआं, ठंडी हवा, पराग कण, संक्रमण, तनाव या एलर्जी जैसी चीजें अस्थमा अटैक को ट्रिगर कर सकती हैं। ऐसे समय पर अस्थमा पंप तुरंत राहत देने में मदद करता है।
अस्थमा पंप में क्या होता है
अस्थमा पंप के अंदर विशेष प्रकार की दवाएं भरी होती हैं, जिन्हें सीधे फेफड़ों तक पहुंचाने के लिए बनाया गया है। आमतौर पर इनहेलर दो तरह के होते हैं।
पहला, रिलीवर इनहेलर और दूसरा, कंट्रोलर इनहेलर।
रिलीवर इनहेलर में ब्रोंकोडायलेटर दवाएं होती हैं, जैसे सल्बुटामोल। ये दवाएं फेफड़ों की सिकुड़ी हुई नलिकाओं की मांसपेशियों को ढीला कर देती हैं। जैसे ही ये मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं, नलिकाएं फैल जाती हैं और हवा का रास्ता खुल जाता है। इसी वजह से कुछ ही मिनटों में सांस लेने में राहत महसूस होने लगती है।
कंट्रोलर इनहेलर में स्टेरॉइड दवाएं होती हैं, जो फेफड़ों की सूजन को धीरे-धीरे कम करती हैं। ये तुरंत राहत नहीं देतीं, लेकिन लंबे समय तक अस्थमा को नियंत्रण में रखने में मदद करती हैं।
अस्थमा पंप इतनी जल्दी असर क्यों करता है
अस्थमा पंप का सबसे बड़ा फायदा यह है कि दवा सीधे फेफड़ों तक पहुंचती है। जब दवा गोली या सिरप के रूप में ली जाती है, तो उसे पेट, आंत और खून के जरिए फेफड़ों तक पहुंचने में समय लगता है। लेकिन इनहेलर से ली गई दवा सांस के साथ सीधे एयरवे में पहुंच जाती है और तुरंत असर दिखाने लगती है।इसी कारण अस्थमा अटैक के समय डॉक्टर सबसे पहले इनहेलर का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं।
क्या अस्थमा पंप की आदत लग जाती है
यह एक आम भ्रम है कि अस्थमा पंप की लत लग जाती है। सच्चाई यह है कि इनहेलर न तो नशे की चीज है और न ही इसकी लत लगती है। यह एक मेडिकल डिवाइस है, जो सही समय पर सही मात्रा में दवा पहुंचाने का काम करता है। हां, अगर बिना डॉक्टर की सलाह के जरूरत से ज्यादा रिलीवर इनहेलर का इस्तेमाल किया जाए, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि अस्थमा ठीक से कंट्रोल में नहीं है।
अस्थमा पंप का सही इस्तेमाल क्यों जरूरी है
अस्थमा पंप तभी असरदार होता है, जब उसका सही तरीके से उपयोग किया जाए। गलत तकनीक से दवा फेफड़ों तक नहीं पहुंच पाती और पूरा लाभ नहीं मिल पाता। इसलिए डॉक्टर या हेल्थ वर्कर से इनहेलर इस्तेमाल करने का सही तरीका सीखना बेहद जरूरी होता है।
अस्थमा मरीजों के लिए जरूरी सावधानियां
अस्थमा पंप के साथ-साथ ट्रिगर से बचाव भी बहुत जरूरी है। धूल-धुएं से दूरी बनाएं, ठंडी हवा में मुंह ढककर रखें, समय पर दवाएं लें और नियमित जांच कराते रहें। इससे अस्थमा को लंबे समय तक नियंत्रित रखा जा सकता है।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी दवा या इनहेलर का उपयोग डॉक्टर की सलाह के बिना न करें। अस्थमा से जुड़ी समस्या होने पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
