By: Vikash Kumar (Vicky )
ओडिशा के कंधमाल जिले में सुरक्षाबलों को माओवाद के खिलाफ बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। बेलघर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गुम्मा जंगल में पुलिस और माओवादियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में चार माओवादी मारे गए हैं। मारे गए माओवादियों में दो महिला और दो पुरुष शामिल हैं। इस मुठभेड़ में ओडिशा का टॉप माओवादी नेता गणेश उइके भी ढेर हो गया है, जिस पर 1.1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह मुठभेड़ उस समय शुरू हुई जब सुरक्षाबलों को गुम्मा जंगल इलाके में माओवादियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिली थी। इसके बाद जिला पुलिस, विशेष अभियान समूह (SOG) और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की संयुक्त टीम ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। जैसे ही सुरक्षाबल जंगल के अंदर आगे बढ़े, माओवादियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभालते हुए माओवादियों को घेर लिया।

करीब कई घंटे तक चली इस मुठभेड़ के बाद चार माओवादी मारे गए। घटनास्थल से बड़ी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद, विस्फोटक सामग्री और माओवादी साहित्य बरामद किया गया है। पुलिस का कहना है कि मुठभेड़ स्थल की गहन तलाशी ली जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई अन्य माओवादी वहां छिपा न हो।
मारे गए माओवादियों में सबसे अहम नाम गणेश उइके का है, जिसे ओडिशा और आसपास के राज्यों में माओवादी गतिविधियों का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता था। गणेश उइके लंबे समय से सुरक्षाबलों की हिट लिस्ट में था और उस पर कुल 1.1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वह कई बड़े माओवादी हमलों, सुरक्षाबलों पर घात लगाकर किए गए हमलों और विकास कार्यों में बाधा डालने की घटनाओं में शामिल रहा है।
गणेश उइके की मौत को माओवादी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि उसकी मौजूदगी से कंधमाल, बौध और आसपास के जिलों में माओवादी संगठन को मजबूती मिल रही थी। अब उसके मारे जाने से इलाके में माओवादियों की कमर टूट सकती है और संगठन की गतिविधियों पर असर पड़ने की पूरी संभावना है।
ओडिशा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस ऑपरेशन को सटीक खुफिया जानकारी और सुरक्षाबलों की रणनीतिक तैयारी का परिणाम बताया है। अधिकारियों के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों से कंधमाल जिले के घने जंगलों में माओवादियों की गतिविधियां बढ़ी थीं। इसे देखते हुए सुरक्षाबलों ने इलाके में गश्त और सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया था।
इस मुठभेड़ के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। कंधमाल जिले के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और आसपास के गांवों में भी निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की है।
राज्य सरकार ने इस सफलता पर सुरक्षाबलों की सराहना की है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार माओवाद के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति पर काम कर रही है और सुरक्षाबलों को हर जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य न केवल माओवादी हिंसा को खत्म करना है, बल्कि प्रभावित इलाकों में विकास कार्यों को तेज कर लोगों को मुख्यधारा से जोड़ना भी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गणेश उइके जैसे बड़े माओवादी नेता के मारे जाने से संगठन की रणनीति और नेतृत्व पर गहरा असर पड़ेगा। हालांकि, माओवादी संगठन अक्सर ऐसे नुकसान के बाद फिर से खुद को संगठित करने की कोशिश करता है, इसलिए सुरक्षाबलों के सामने चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है।
फिलहाल, पुलिस मारे गए माओवादियों की पहचान की औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर रही है और उनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। आने वाले दिनों में इस ऑपरेशन से जुड़ी और भी अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं।
