By: Vikash Kumar (Vicky )
2025 में भारत के बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर में लोन संबंधी महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं, जो लाखों गृहिणी, व्यवसायी, गृह-खरीदार और छोटे-मध्यम उद्योगों (MSMEs) को सीधे प्रभावित कर रहे हैं। देश के केंद्रीय बैंक RBI (Reserve Bank of India) के फैसलों के साथ ही प्रमुख बैंकों ने अपनी ब्याज दरों में कटौती और नियमों में बदलाव किए हैं, जिससे कर्ज़ लेने और चुकाने के तरीकों में बदलाव आया है।
RBI की नीतिगत दरों में बदलाव और बैंकों की प्रतिक्रिया
2025 के अंत में RBI ने एक बार फिर रेपो रेट (policy repo rate) में कटौती की है, जिसका असर बैंकों के लेंडिंग रेट्स पर दिखना शुरू हो गया है। RBI की इस नीति से उधार लेने की लागत घटने की संभावना है, जिससे EMI (Equated Monthly Installments) में राहत मिल सकती है।
इस फैसले के बाद देश के बड़े बैंकों ने भी लेंडिंग रेट स्लैश (lending rate cuts) की घोषणा की है:
HDFC बैंक ने MCLR (Marginal Cost of Funds-based Lending Rate) को कम कर 9.00%-9.20% तक सीमित कर दिया है, जिससे उसके लिंक्ड लोन पर ब्याज दर में कमी आई है।
Canara Bank, PNB, SBI, IOB, और अन्य बैंकों ने Repo Linked Lending Rates (RLLR) और EBLR (External Benchmark Lending Rate) में 0.10%-0.25% तक की कटौती की है, ताकि ग्राहक को जल्दी-से-जल्दी रिलीफ मिल सके।
LICousing Finance ने दिसंबर 2025 में होम लोन पर ब्याज दर को 7.15% तक घटा दिया है, जो गृह खरीदारों के लिये एक महत्वपूर्ण राहत है।
इन बदलावों से अनुमान है कि होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की लागत अगले कुछ महीनों में और भी सस्ती हो सकती है।

गृह लोन पर बदलाव: ब्याज दरें और राहत
2025 में ब्याज दरों पर केंद्रित खबरों में प्रमुख है होम लोन की ब्याज दरों में गिरावट, जिससे घर खरीदने का सपना सस्ता होने लगा है। कई बैंकों ने विभिन्न होम लोन श्रेणियों पर ब्याज दरों में कटौती की है, जैसे:
कुछ बैंकों ने होम लोन की ब्याज दरें 7% के नीचे तक पेश की हैं, जिससे EMI भारी रूप से घट सकती है।
ब्याज दरों में कटौती के कारण EMI पर बड़ा असर पड़ा है — उदाहरण के लिये 75 लाख रुपये के होम लोन पर EMI लगभग 50,000 रुपये के आस-पास आ सकती है।
इससे घर खरीदने वाले प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे, खासतौर पर नए गृह खरीदार और पहली बार निवेश करने वाले।
लोन मार्केट और क्रेडिट ऐक्सपोज़र में वृद्धि
साल 2025 में भारत की लोन मार्केट में विस्तार हुआ है, जिससे अर्थव्यवस्था में उधारी का स्तर बढ़ा है। CRIF-SIDBI की रिपोर्ट के अनुसार MSME (Micro, Small and Medium Enterprises) सेक्टर का कर्ज़ 2025 में लगभग ₹46 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जो पिछले साल की तुलना में करीब 12% की वृद्धि दर्शाता है।
इस वृद्धि से स्पष्ट होता है कि छोटे व्यवसायों ने वित्तीय सहायता के लिये बैंकिंग सिस्टम तथा NBFCs पर भरोसा बढ़ाया है, जिससे उधारी-उद्योग (credit growth) मजबूत हुआ है।
गोल्ड लोन में तेजी और नए RBI नियम
साल 2025 की एक अन्य खास खबर है गोल्ड लोन की बढ़ती मांग। RBI की रिपोर्ट के मुताबिक, गोल्ड लोन के लिये गिरवी रखने की प्रवृत्ति बढ़ी है, खासकर ग्रामीण तथा छोटे शहरों में।
इसके साथ ही RBI ने गोल्ड लोन के LTV (Loan-to-Value) रेश्यो को 75% से बढ़ाकर 85% कर दिया है, जिससे अब ग्राहक अपने सोने के मूल्य का अधिक प्रतिशत लोन के रूप में प्राप्त कर सकते हैं।
ये बदलाव उन लोगों के लिये महत्वपूर्ण हैं जो बिना भारी कागजी प्रक्रिया के तेज़ लोन चाहते हैं।
क्रेडिट स्कोर से जुड़ी राहत और नियमों में बदलाव
एक बड़ी राहत यह है कि अब कई बैंकों ने CIBIL स्कोर की कड़ी आवश्यकता को घटा दिया है, ताकि पहले-बार लोन लेने वाले भी आसानी से क्रेडिट तक पहुंच सकें।
इसके अलावा RBI ने फ्लोटिंग रेट लोन के प्री-पेमेंट चार्जेज़ को भी कम करने की दिशा में बदलाव किये हैं, जिससे ग्राहक जल्दी लोन चुकाने पर अतिरिक्त शुल्क से बचेंगे (नया नियम प्रभावी 2026 में लागू होना है)।
2025 लोन बाजार के लिये एक महत्वपूर्ण वर्ष रहा है। RBI की नीतिगत दरों में कटौती और बैंकों की प्रतिक्रिया के कारण ब्याज दरों में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। इससे होम लोन, पर्सनल लोन तथा बिजनेस लोन अधिक सस्ते और सुलभ बने हैं। विशेष रूप से MSME सेक्टर का क्रेडिट विस्तार, गोल्ड लोन की मांग में उछाल तथा लोन रिलेटेड नियमों में सुधार ने कर्ज़ लेने और चुकाने के व्यवहार को बदल दिया है।
आने वाले 2026 में लोन मार्केट में और सुधार देखने की उम्मीद है, जहां ब्याज दर, पॉलिसी बदलाव और क्रेडिट स्कोर से जुड़ी शर्तों में और बदलाव संभव हैं।
