By: Vikash Kumar (Vicky )
देवघर। झारखंड चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के आवेदन पर सिविल सर्जन देवघर डॉ. युगल किशोर चौधरी ने त्वरित और सकारात्मक निर्णय लेते हुए जिला स्तरीय कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान की दिशा में अहम पहल की है। संघ द्वारा पारित प्रस्ताव के आलोक में सिविल सर्जन से मिलकर मांग पत्र सौंपा गया था, जिस पर तत्परता दिखाते हुए उन्होंने उपाधीक्षक एवं जिले के सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। संघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि झारखंड चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ द्वारा पूर्व में एक बैठक आयोजित कर कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं पर प्रस्ताव पारित किया गया था। उसी प्रस्ताव के आलोक में संघ का एक प्रतिनिधिमंडल सिविल सर्जन से मिला और एसीपी (Assured Career Progression) एवं एमएसीपी (Modified Assured Career Progression) से संबंधित लंबित लाभ एवं बकाया राशि के भुगतान की मांग को प्रमुखता से रखा।
एसीपी–एमएसीपी का लाभ, लेकिन बकाया राशि लंबित
सिविल सर्जन द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि उनके कार्यालय से पूर्व में जारी विभिन्न आदेशों के तहत जिला स्तरीय कर्मचारियों को एसीपी एवं एमएसीपी का लाभ दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद अधिकांश कर्मियों को देय लाभ की अंतर राशि (एरियर) का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। यह स्थिति न केवल कर्मचारियों के लिए आर्थिक परेशानी का कारण बनी हुई थी, बल्कि लंबे समय से असंतोष का विषय भी रही है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई ऐसे कर्मचारी हैं, जो बिना एसीपी – एमएसीपी का पूर्ण लाभ प्राप्त किए ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं या निकट भविष्य में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे में उनके लिए बकाया भुगतान का मामला और भी संवेदनशील हो जाता है।

अविलंब भुगतान का निर्देश
सिविल सर्जन डॉ. युगल किशोर चौधरी ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए उपाधीक्षक एवं सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि सभी पात्र कर्मचारियों को एसीपी एवं एमएसीपी के तहत देय लाभ और अंतर राशि का भुगतान अविलंब सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और संबंधित कार्यालयों को इस दिशा में त्वरित कार्रवाई करनी होगी। यह निर्देश जारी होते ही स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों में उम्मीद की नई किरण जगी है। लंबे समय से बकाया भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों को अब जल्द समाधान मिलने की संभावना है।
कर्मचारियों में खुशी, संघ ने जताया आभार
झारखंड चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष ने सिविल सर्जन द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय जिला स्तरीय कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि संघ द्वारा उठाई गई मांगों पर जिस संवेदनशीलता और तत्परता के साथ निर्णय लिया गया है, उससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ा है। संघ के जिलाध्यक्ष ने जिले के सभी स्वास्थ्य कर्मियों की ओर से सिविल सर्जन डॉ. युगल किशोर चौधरी के प्रति आभार प्रकट किया और उम्मीद जताई कि भविष्य में भी कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए इसी प्रकार सकारात्मक रुख अपनाया जाएगा।
लंबे समय से लंबित था मामला
गौरतलब है कि एसीपी–एमएसीपी से संबंधित लाभ एवं बकाया भुगतान का मामला पिछले कई वर्षों से लंबित चला आ रहा था। कई बार कर्मचारियों द्वारा विभागीय स्तर पर आवेदन दिए गए, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई थी। इसके कारण कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा था और संघ को इस मुद्दे को मजबूती से उठाना पड़ा। संघ का कहना है कि यदि समय पर भुगतान नहीं किया जाता, तो कर्मचारी आंदोलन के लिए बाध्य हो सकते थे। हालांकि सिविल सर्जन के त्वरित हस्तक्षेप से फिलहाल स्थिति नियंत्रित होती दिख रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ेगा सकारात्मक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि कर्मचारियों को समय पर उनके वित्तीय अधिकार मिलने से न केवल उनका मनोबल बढ़ेगा, बल्कि इसका सीधा सकारात्मक प्रभाव स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ेगा। संतुष्ट कर्मचारी बेहतर कार्य निष्पादन करते हैं, जिसका लाभ आम जनता को मिलता है। सिविल सर्जन द्वारा लिया गया यह निर्णय प्रशासनिक संवेदनशीलता और कर्मचारियों के प्रति जिम्मेदारी का उदाहरण माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि निर्देशों के अनुरूप भुगतान की प्रक्रिया कितनी शीघ्र पूरी की जाती है।
कुल मिलाकर, झारखंड चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रयास और सिविल सर्जन की त्वरित कार्रवाई से जिला स्तरीय स्वास्थ्य कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। यदि निर्देशों का समयबद्ध पालन किया जाता है, तो यह फैसला न केवल कर्मचारियों के लिए बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग के लिए एक सकारात्मक मिसाल साबित होगा।
