By: Vikash Kumar ( Vicky )
भारत ने वैश्विक आर्थिक मंच पर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए जापान को पीछे छोड़ दिया है और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का गौरव प्राप्त कर लिया है। यह उपलब्धि न सिर्फ भारत की तेज़ी से बढ़ती आर्थिक क्षमता को दर्शाती है, बल्कि आने वाले वर्षों में देश के वैश्विक प्रभाव को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकेत देती है। वर्तमान में अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, उसके बाद चीन दूसरे स्थान पर और जर्मनी तीसरे स्थान पर बना हुआ है, जबकि भारत अब चौथे स्थान पर पहुंच गया है।
GDP के आंकड़ों ने बदली वैश्विक रैंकिंग
अंतरराष्ट्रीय आर्थिक एजेंसियों और वैश्विक वित्तीय संस्थानों के ताज़ा अनुमानों के अनुसार, भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) ने जापान को पीछे छोड़ दिया है। भारत की अर्थव्यवस्था का आकार अब लगातार विस्तार कर रहा है, जबकि जापान लंबे समय से आर्थिक मंदी, जनसंख्या में गिरावट और कमजोर घरेलू मांग जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। इसके विपरीत भारत की युवा आबादी, बढ़ती खपत, मजबूत घरेलू बाजार और स्थिर नीतिगत सुधारों ने आर्थिक विकास को नई गति दी है।

तेज़ विकास दर बनी भारत की सबसे बड़ी ताकत
भारत दुनिया की उन चुनिंदा बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, जहां विकास दर लगातार मजबूत बनी हुई है। मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर, डिजिटल इकॉनमी, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप इकोसिस्टम ने मिलकर देश की आर्थिक रफ्तार को तेज किया है। ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’, ‘स्टार्टअप इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों ने घरेलू उत्पादन और निवेश को बढ़ावा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की GDP ग्रोथ रेट आने वाले वर्षों में भी वैश्विक औसत से कहीं अधिक बनी रह सकती है, जिससे भारत का लक्ष्य दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होना अब ज्यादा दूर नहीं दिखता।
जापान को क्यों करना पड़ा पीछे हटना?
जापान कई दशकों तक दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था रहा, लेकिन बीते वर्षों में उसकी आर्थिक रफ्तार सुस्त पड़ गई। वहां की वृद्ध होती जनसंख्या, कम होती कार्यशील जनशक्ति और सीमित घरेलू मांग ने विकास पर असर डाला। इसके अलावा वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और कमजोर निर्यात प्रदर्शन ने भी जापान की स्थिति को प्रभावित किया। इसके विपरीत भारत की आबादी में युवाओं की संख्या अधिक है, जो उपभोग, उत्पादन और नवाचार को बढ़ावा दे रही है। यही वजह है कि भारत ने अब जापान को पीछे छोड़ते हुए चौथे स्थान पर जगह बना ली है।
भारत की अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्तंभ
भारत की इस ऐतिहासिक छलांग के पीछे कई मजबूत स्तंभ हैं।
सेवा क्षेत्र (Service Sector): IT, फाइनेंस, हेल्थकेयर और एजुकेशन सेक्टर भारत की GDP में बड़ा योगदान दे रहे हैं।
मैन्युफैक्चरिंग: इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, फार्मा और रक्षा उत्पादन में तेज़ बढ़ोतरी देखी गई है।
डिजिटल इकॉनमी: UPI, डिजिटल पेमेंट और ई-कॉमर्स ने आर्थिक गतिविधियों को नया आयाम दिया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर विकास: हाईवे, रेलवे, एयरपोर्ट और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं ने निवेश आकर्षित किया है।
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख
दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के साथ भारत की वैश्विक कूटनीतिक और रणनीतिक ताकत भी बढ़ी है। G20, BRICS और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका अब पहले से ज्यादा प्रभावशाली हो गई है। विदेशी निवेशक भारत को एक भरोसेमंद और दीर्घकालिक निवेश गंतव्य के रूप में देख रहे हैं।
आने वाले वर्षों में क्या है लक्ष्य?
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि भारत इसी रफ्तार से विकास करता रहा, तो वह आने वाले कुछ वर्षों में जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। हालांकि इसके लिए रोजगार सृजन, शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना बेहद जरूरी होगा।
भारत का जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना देश के लिए गर्व का क्षण है। यह उपलब्धि बताती है कि भारत अब सिर्फ एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक ताकत बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। सही नीतियां, युवा शक्ति और मजबूत घरेलू बाजार भारत को आने वाले वर्षों में और ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।
