By:Vikash Kumar (Vicky)
नई दिल्ली। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने पाकिस्तान को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने पाकिस्तान को आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला ‘खराब पड़ोसी’ बताते हुए साफ कहा कि भारत अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है और इस मामले में किसी भी तरह के बाहरी दबाव या सलाह को स्वीकार नहीं करेगा। जयशंकर के इस बयान को भारत की स्पष्ट और दोटूक विदेश नीति के तौर पर देखा जा रहा है।

विदेश मंत्री ने यह टिप्पणी एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की सुरक्षा नीति और आतंकवाद के खिलाफ उसकी रणनीति पर सवालों के जवाब में दी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान वर्षों से सीमा पार आतंकवाद को एक नीति के रूप में इस्तेमाल करता रहा है, जिसका खामियाजा भारत को भुगतना पड़ा है। जयशंकर ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब कोई देश आतंकवाद को प्रायोजित करता है, तो उससे अच्छे पड़ोसी जैसा व्यवहार करने की उम्मीद नहीं की जा सकती।
आतंकवाद पर भारत का स्पष्ट रुख
डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत आतंकवाद को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “भारत अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा। आतंकवाद से निपटने के हमारे तरीकों पर किसी बाहरी दबाव या सलाह को स्वीकार नहीं किया जाएगा।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। विदेश मंत्री के अनुसार, भारत ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ देश अब भी आतंकवाद को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। जयशंकर ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि ऐसे देशों की वजह से पूरे क्षेत्र की शांति और स्थिरता खतरे में रहती है।
पाकिस्तान पर सीधा आरोप
जयशंकर ने पाकिस्तान को सीधे तौर पर आतंकवाद का समर्थन करने वाला देश बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने न केवल आतंकवादी संगठनों को पनाह दी है, बल्कि उन्हें प्रशिक्षण, फंडिंग और रणनीतिक समर्थन भी दिया है। भारत लंबे समय से इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक मंचों पर उठाता रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को पहले अपने अंदर झांकने की जरूरत है और यह समझना होगा कि आतंकवाद को बढ़ावा देने की नीति अंततः उसी के लिए घातक साबित होगी। जयशंकर के अनुसार, जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को अपनी विदेश नीति का हिस्सा बनाए रखेगा, तब तक भारत-पाक संबंधों में सुधार की कोई संभावना नहीं है।

भारत की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा है। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा संयम और जिम्मेदारी के साथ कदम उठाए हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि देश अपनी सुरक्षा से समझौता करेगा। जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत को यह तय करने का पूरा अधिकार है कि वह अपनी रक्षा कैसे करेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के लिए सभी जरूरी विकल्प खुले रखता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब सीमा पार से आतंकवादी गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां लगातार सतर्क हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संदेश
जयशंकर के बयान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरे मानदंड नहीं अपनाए जाने चाहिए। अगर दुनिया वास्तव में आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होना चाहती है, तो उसे उन देशों के खिलाफ ठोस कदम उठाने होंगे जो आतंकवाद को संरक्षण देते हैं। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी देश की संप्रभुता का सम्मान करता है, लेकिन जब भारत की सुरक्षा को खतरा होता है, तो वह चुप नहीं बैठ सकता। जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत वैश्विक शांति और स्थिरता के पक्ष में है, लेकिन यह शांति आतंकवाद को सहन करके नहीं लाई जा सकती।
राजनीतिक और रणनीतिक महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि जयशंकर का यह बयान भारत की बदली हुई रणनीतिक सोच को दर्शाता है। अब भारत आतंकवाद के मुद्दे पर केवल कूटनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि ठोस और प्रभावी कदम उठाने के लिए तैयार है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बयान उन देशों को भी संदेश देता है जो भारत को संयम बरतने की सलाह देते रहे हैं। जयशंकर ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपनी सुरक्षा नीति किसी और के दबाव में तय नहीं करेगा।
कुल मिलाकर, विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यह बयान भारत की आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दोहराता है। पाकिस्तान को खराब पड़ोसी बताकर उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि जब तक आतंकवाद खत्म नहीं होता, तब तक संबंधों में सुधार संभव नहीं है। भारत ने साफ कर दिया है कि उसकी सुरक्षा और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं और इन्हें लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
