By: Vikash Kumar (Vicky)
जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में स्थित उरी सेक्टर में सोमवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब श्रीनगर-बारामूला-उरी नेशनल हाईवे (NH-1) पर अचानक पहाड़ों से भारी मात्रा में पत्थर और मलबा गिरने लगा। भूस्खलन इतना अचानक हुआ कि हाईवे पर चल रही कई गाड़ियों को बीच रास्ते में ही रोकना पड़ा। हालात बिगड़ते देख वाहन चालकों और यात्रियों ने गाड़ियों से उतरकर सुरक्षित स्थान की ओर भागकर अपनी जान बचाई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उरी के पास पहाड़ी इलाके में सुबह के समय तेज आवाज के साथ पत्थर गिरने शुरू हुए। कुछ ही मिनटों में सड़क का बड़ा हिस्सा मलबे से ढक गया, जिससे हाईवे पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया। गनीमत रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन कई वाहन मलबे की चपेट में आने से बाल-बाल बचे।
यात्रियों में दहशत, सड़क पर फंसे वाहन
भूस्खलन के समय हाईवे पर सैकड़ों वाहन मौजूद थे, जिनमें निजी कारें, टैक्सियां, ट्रक और सुरक्षाबलों के वाहन भी शामिल थे। अचानक पत्थर गिरते देख लोगों में दहशत फैल गई। कई यात्री अपने बच्चों और बुजुर्गों को लेकर गाड़ियों से बाहर निकले और सुरक्षित दूरी बनाकर खड़े हो गए।
एक स्थानीय यात्री ने बताया,
“हम उरी से बारामूला की ओर जा रहे थे, तभी अचानक ऊपर से पत्थर गिरने लगे। कुछ समझ नहीं आया और लोग गाड़ियों से निकलकर भागने लगे। यह बहुत डरावना मंजर था।”
प्रशासन ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और सीमा सड़क संगठन (BRO) की टीमें मौके पर पहुंच गईं। हाईवे को तुरंत दोनों ओर से बंद कर दिया गया ताकि किसी तरह का बड़ा हादसा न हो। BRO ने मलबा हटाने के लिए जेसीबी और अन्य भारी मशीनरी तैनात कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि लगातार बारिश और पहाड़ी इलाकों में कमजोर चट्टानों के कारण भूस्खलन की घटनाएं बढ़ जाती हैं। सुरक्षा कारणों से जब तक सड़क पूरी तरह साफ नहीं हो जाती, तब तक वाहनों की आवाजाही बहाल नहीं की जाएगी।
मौसम बना बड़ी वजह
मौसम विभाग के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से कश्मीर घाटी में रुक-रुक कर बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हो रही है। इससे पहाड़ों की मिट्टी और चट्टानें ढीली हो जाती हैं, जो भूस्खलन का कारण बनती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि NH-1 जैसे पहाड़ी हाईवे पर इस मौसम में खतरा और बढ़ जाता है।
NH-1 का सामरिक और स्थानीय महत्व
श्रीनगर-बारामूला-उरी नेशनल हाईवे न केवल आम नागरिकों के लिए बल्कि सुरक्षा बलों और सीमावर्ती इलाकों की आपूर्ति के लिए भी बेहद अहम है। यह हाईवे नियंत्रण रेखा (LoC) के पास स्थित इलाकों को जोड़ता है। ऐसे में सड़क बंद होने से स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हाईवे बंद होने से उरी और आसपास के इलाकों में जरूरी सामान की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। प्रशासन ने लोगों को वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।

पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
यह पहली बार नहीं है जब उरी या बारामूला क्षेत्र में भूस्खलन हुआ हो। हर साल मानसून और सर्दियों के मौसम में इस इलाके में कई बार पहाड़ों से मलबा गिरने की घटनाएं सामने आती हैं। पिछले वर्षों में भी NH-1 पर भूस्खलन के कारण घंटों से लेकर कई दिनों तक यातायात बाधित रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहाड़ी ढलानों को मजबूत करने और समय रहते सुरक्षात्मक उपाय करने की जरूरत है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
प्रशासन की अपील
जिला प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि मौसम खराब रहने की स्थिति में पहाड़ी इलाकों की यात्रा करने से पहले ट्रैफिक और मौसम अपडेट जरूर लें। साथ ही भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रुकने से बचें। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि मलबा हटाने का काम तेजी से किया जा रहा है और हालात सामान्य होते ही हाईवे को आंशिक रूप से खोल दिया जाएगा।
स्थिति पर नजर
फिलहाल प्रशासन और BRO की टीमें मौके पर मौजूद हैं और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें अलर्ट मोड पर हैं।
