By: Vikash Kumar (Vicky)
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने एक बार फिर संघ को लेकर फैलाए जा रहे कथित भ्रम और गलत सूचनाओं पर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि RSS के खिलाफ जानबूझकर एक झूठा नैरेटिव गढ़ा जा रहा है, जिससे समाज में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। भागवत ने कहा कि आज के दौर में लोग सही जानकारी तक पहुंचने के लिए गहराई में जाने की बजाय सतही और अप्रमाणित स्रोतों पर निर्भर हो गए हैं, जो लोकतंत्र और सामाजिक समरसता के लिए खतरनाक संकेत है।

“सच जानने की कोशिश कम हो गई है” – भागवत
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि आज सूचना का प्रवाह तेज जरूर हुआ है, लेकिन उसकी गुणवत्ता और सत्यता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग किसी भी खबर या विचार को बिना जांचे-परखे सच मान लेते हैं और फिर उसी के आधार पर राय बना लेते हैं। इसी प्रवृत्ति का फायदा उठाकर RSS के खिलाफ एक खास एजेंडे के तहत झूठा नैरेटिव खड़ा किया जा रहा है। भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ का काम समाज को जोड़ने और राष्ट्र निर्माण में सहयोग देने का है, न कि किसी के खिलाफ नफरत फैलाने का। उन्होंने कहा कि RSS को लेकर जो बातें फैलाई जाती हैं, उनका संघ की वास्तविक गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं होता।
सोशल मीडिया और सतही जानकारी पर हमला
सरसंघचालक ने सोशल मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आजकल लोग हेडलाइन या छोटे-छोटे वीडियो देखकर ही पूरे विषय पर राय बना लेते हैं। न तो वे संदर्भ समझते हैं और न ही स्रोत की विश्वसनीयता जांचते हैं। इससे समाज में गलतफहमियां तेजी से फैलती हैं। भागवत ने कहा, “सच तक पहुंचने के लिए मेहनत करनी पड़ती है, लेकिन आज लोग उस मेहनत से बचना चाहते हैं। यही कारण है कि झूठ आसानी से सच का रूप ले लेता है।”
RSS की छवि को लेकर चिंता
भागवत ने आरोप लगाया कि RSS को एक खास छवि में पेश करने की कोशिश लंबे समय से की जा रही है। उन्होंने कहा कि संघ के स्वयंसेवक देश के हर कोने में शिक्षा, सेवा, आपदा राहत और सामाजिक कार्यों में लगे रहते हैं, लेकिन इन सकारात्मक कार्यों को जानबूझकर नजरअंदाज किया जाता है। उन्होंने कहा कि जो लोग संघ को समझना चाहते हैं, उन्हें संघ के काम को नजदीक से देखना चाहिए। “RSS कोई बंद संगठन नहीं है, यह समाज के बीच रहकर काम करता है,” उन्होंने जोड़ा।
युवाओं से की खास अपील
सरसंघचालक ने युवाओं से अपील की कि वे किसी भी विचार या संगठन के बारे में राय बनाने से पहले तथ्यों को समझें। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग देश का भविष्य है और अगर वही गलत सूचनाओं का शिकार हो गया, तो इसका असर पूरे समाज पर पड़ेगा। भागवत ने कहा कि युवाओं को सवाल पूछने चाहिए, पढ़ना चाहिए और अलग-अलग दृष्टिकोणों को समझना चाहिए। सिर्फ ट्रेंड या वायरल कंटेंट के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं है।

लोकतंत्र के लिए खतरा बताया
मोहन भागवत ने कहा कि जब समाज में संवाद की जगह भ्रम और गलतफहमी ले लेती है, तो लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने चेतावनी दी कि झूठे नैरेटिव न केवल संगठनों की छवि खराब करते हैं, बल्कि समाज में अविश्वास और विभाजन भी पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए जरूरी है कि लोग सच और झूठ में फर्क करना सीखें और जिम्मेदारी के साथ जानकारी साझा करें।
RSS का उद्देश्य दोहराया
अपने संबोधन में भागवत ने RSS के मूल उद्देश्य को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि संघ का लक्ष्य राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करना है। संघ किसी राजनीतिक दल का विरोधी या समर्थक नहीं है, बल्कि समाज के नैतिक और सामाजिक उत्थान के लिए काम करता है। उन्होंने कहा कि संघ को समझने के लिए उसके स्वयंसेवकों के कार्यों को देखना चाहिए, न कि सोशल मीडिया पर चल रहे आरोपों को।
मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय आया है जब सूचना युद्ध और नैरेटिव की राजनीति तेजी से बढ़ रही है। उनका संदेश साफ है—सतही जानकारी और अफवाहों से दूर रहकर तथ्यों की गहराई में जाना ही समाज और लोकतंत्र दोनों के हित में है। RSS के खिलाफ झूठे नैरेटिव के आरोपों के बीच भागवत ने लोगों से विवेक और समझदारी के साथ सच को परखने की अपील की है।
