By: Vikash Kumar (Vicky)
हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में गंगाजल को अत्यंत पवित्र माना गया है। मान्यता है कि गंगाजल नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और घर में सुख-शांति व सकारात्मकता बनाए रखता है। पूजा-पाठ, हवन, गृह प्रवेश और किसी भी शुभ कार्य में गंगाजल का प्रयोग अनिवार्य माना गया है। लेकिन बहुत से लोग अनजाने में गंगाजल को रखने और इस्तेमाल करने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो पुण्य के बजाय वास्तु दोष का कारण बन सकती हैं। शास्त्र और वास्तु शास्त्र में गंगाजल रखने के कुछ खास नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना बेहद जरूरी है।
गंगाजल का धार्मिक और वास्तु महत्व
शास्त्रों के अनुसार गंगा को मोक्षदायिनी माना गया है। गंगाजल को घर में रखने से वातावरण शुद्ध रहता है और नकारात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं कर पातीं। वास्तु शास्त्र में भी गंगाजल को सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत माना गया है, जो मानसिक शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि में वृद्धि करता है। लेकिन इसके प्रभाव तभी शुभ होते हैं, जब इसे सही स्थान और सही विधि से रखा जाए।
गलती नंबर 1: गंगाजल को गलत दिशा में रखना
वास्तु शास्त्र के अनुसार गंगाजल को कभी भी दक्षिण या नैऋत्य दिशा में नहीं रखना चाहिए। इससे घर में तनाव और आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं। गंगाजल रखने के लिए उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण को सबसे शुभ माना गया है। इस दिशा में रखने से देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है।
गलती नंबर 2: गंगाजल को प्लास्टिक की बोतल में रखना
अधिकतर लोग गंगाजल को प्लास्टिक की बोतल में भरकर सालों तक रख देते हैं। शास्त्रों के अनुसार गंगाजल को तांबे, पीतल या कांच के पात्र में रखना ही शुभ होता है। प्लास्टिक पात्र में रखने से उसकी पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित हो सकती है।

गलती नंबर 3: गंदे या खुले स्थान पर गंगाजल रखना
कई घरों में गंगाजल को किचन के कोने, स्टोर रूम या ऐसी जगह रख दिया जाता है जहां साफ-सफाई नहीं होती। वास्तु शास्त्र के अनुसार गंगाजल को हमेशा साफ, ऊंचे और पवित्र स्थान पर रखना चाहिए। इसे जमीन पर या जूते-चप्पल के पास रखना अशुभ माना गया है।
गलती नंबर 4: खराब या अशुद्ध गंगाजल का उपयोग करना
लंबे समय तक रखा गया गंगाजल अगर बदबू देने लगे या उसमें गंदगी दिखे, तो उसका उपयोग नहीं करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार अशुद्ध गंगाजल का प्रयोग पूजा में करने से लाभ के बजाय दोष लग सकता है। ऐसे गंगाजल को किसी पवित्र स्थान या बहते जल में प्रवाहित कर देना चाहिए।
गलती नंबर 5: बिना नियम के रोजाना इस्तेमाल करना
कुछ लोग बिना किसी नियम के रोज गंगाजल का छिड़काव करते हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि गंगाजल का प्रयोग स्नान, पूजा या विशेष अवसरों पर विधि-विधान से करना चाहिए। बिना श्रद्धा और नियम के किया गया प्रयोग उसका शुभ फल नहीं देता।
गंगाजल रखने और उपयोग करने के सही वास्तु नियम
वास्तु शास्त्र के अनुसार गंगाजल को हमेशा ढक्कन वाले पात्र में रखें और समय-समय पर उसकी स्थिति जांचते रहें। पूजा के समय गंगाजल की कुछ बूंदें जल में मिलाकर छिड़काव करना घर की नकारात्मकता को दूर करता है। गंगाजल को कभी भी शौचालय या किचन सिंक के पास नहीं रखना चाहिएयह लेख धार्मिक मान्यताओं, शास्त्रों और वास्तु शास्त्र पर आधारित सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ या विद्वान से सलाह अवश्य लें।
