By: Vikash Kumar (Vicky)
पलामू प्रमंडल में इन दिनों प्रकृति अपने सबसे खूबसूरत रंग में नजर आ रही है। विदेशी प्रजाति के प्रवासी पक्षियों के आगमन से पलामू, गढ़वा और लातेहार जिलों का इलाका गुलजार हो उठा है। खासकर पलामू टाइगर रिजर्व के अंतर्गत स्थित कमलदह झील प्रवासी पक्षियों का सबसे बड़ा और पसंदीदा ठिकाना बनकर उभरी है। हजारों किलोमीटर का लंबा सफर तय कर आए ये मेहमान पक्षी न केवल इलाके की सुंदरता बढ़ा रहे हैं, बल्कि जैव विविधता के लिए भी शुभ संकेत माने जा रहे हैं।

वन विभाग के अनुसार, नवंबर महीने से प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो जाता है, जो ठंड के मौसम में यहां डेरा डालते हैं। ये पक्षी आमतौर पर मार्च महीने तक पलामू क्षेत्र में रहते हैं और उसके बाद गर्मी बढ़ते ही वापस अपने मूल स्थानों की ओर लौट जाते हैं।
180 से अधिक प्रजातियों का बसेरा
पलामू, गढ़वा और लातेहार क्षेत्र में वन विभाग द्वारा किए गए सर्वे में 180 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। इनमें बड़ी संख्या में वे पक्षी शामिल हैं, जो साइबेरिया, रूस, यूरोप, तिब्बत, मंगोलिया, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान जैसे ठंडे इलाकों से आते हैं। झील, तालाब, नदियां और डैम इन पक्षियों के लिए सुरक्षित और अनुकूल आवास प्रदान करते हैं।
कौन-कौन से विदेशी पक्षी पहुंचे पलामू
इस बार पलामू क्षेत्र में कई दुर्लभ और आकर्षक विदेशी पक्षियों का जमावड़ा देखा जा रहा है। इनमें यूरेशियन गौरैया, नॉर्दन पिनटेल, कॉमन टील, गैडवाल, शोवलर (स्लिंग डक), किंगफिशर, बार-हेडेड गूज और लार्क प्रमुख हैं। स्थानीय भाषा में लार्क को ‘बगेरी’ कहा जाता है, जो खासतौर पर धान के खेतों में देखी जाती है। ठंड के मौसम में यूरोप और तिब्बत क्षेत्र से सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय कर ये पक्षी पलामू पहुंचते हैं।
कमलदह झील का ऐतिहासिक और पर्यावरणीय महत्व
कमलदह झील, जो बेतला नेशनल पार्क के भीतर स्थित है, प्रवासी पक्षियों का सबसे बड़ा केंद्र मानी जाती है। इसका निर्माण चेरो राजवंश के शासनकाल में हुआ था। तभी से यह झील विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों के लिए एक सुरक्षित आश्रय स्थल बनी हुई है। इसके अलावा सोन, कोयल, अमानत नदी, अनराज डैम और मलय डैम में भी प्रवासी पक्षियों की अच्छी-खासी संख्या देखी जा रही है। कमलदह झील में ही इस समय 12 से 15 विदेशी प्रजातियों के पक्षियों की मौजूदगी दर्ज की गई है।

वन विभाग अलर्ट, सुरक्षा बढ़ाई गई
प्रवासी पक्षियों के आगमन को देखते हुए वन विभाग ने अलर्ट जारी किया है। झील और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पक्षियों की मूवमेंट पर निगरानी, ट्रेल का आकलन और गणना कार्य भी लगातार किया जा रहा है। वन विभाग का उद्देश्य है कि किसी भी तरह का शिकार या अवैध गतिविधि न हो और पक्षियों को सुरक्षित वातावरण मिल सके।
शिकार बना सबसे बड़ा खतरा
हालांकि, यह भी चिंता का विषय है कि पिछले एक दशक में प्रवासी पक्षियों की संख्या में लगातार गिरावट देखी गई है। खासतौर पर बार-हेडेड गूज, जिसे स्थानीय भाषा में चकवा-चकई कहा जाता है, सबसे अधिक शिकार का शिकार हुआ है। यह शाकाहारी पक्षी घास, अनाज और पत्तियों पर निर्भर रहता है और नदियों के किनारे रहना पसंद करता है। कभी कोयल नदी इनके लिए सबसे बड़ा ठिकाना हुआ करती थी, लेकिन शिकार और मानवीय दखल के कारण अब इनकी संख्या काफी कम हो गई है।
पर्यटन और पर्यावरण के लिए शुभ संकेत
प्रवासी पक्षियों का आगमन न केवल पर्यावरण संतुलन के लिए जरूरी है, बल्कि इससे इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिल सकता है। कमलदह झील और बेतला नेशनल पार्क भविष्य में बर्ड वॉचिंग के बड़े केंद्र के रूप में उभर सकते हैं, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
यह समाचार उपलब्ध स्थानीय सूचनाओं, वन विभाग के सर्वे और सामान्य जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। पक्षियों की संख्या और प्रजातियों में समय-समय पर परिवर्तन संभव है।

