By: Vikash Kumar (Vicky)
देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हरियाणा के मानेसर स्थित नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) परिसर में नेशनल IED डेटा मैनेजमेंट सिस्टम (NIDMS) का वर्चुअल शुभारंभ किया। यह अत्याधुनिक प्रणाली देश में होने वाले आईईडी विस्फोटों और आतंकवादी घटनाओं से जुड़े डेटा का वैज्ञानिक, तकनीकी और विश्लेषणात्मक अध्ययन करेगी, जिससे जांच एजेंसियों को बड़ी मदद मिलेगी।

क्या है नेशनल IED डेटा मैनेजमेंट सिस्टम (NIDMS)?
NIDMS एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे खास तौर पर इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) से जुड़े मामलों के विश्लेषण के लिए तैयार किया गया है। इस सिस्टम के तहत देश में कहीं भी होने वाले आईईडी ब्लास्ट से संबंधित सभी तकनीकी जानकारियां—जैसे विस्फोट का प्रकार, इस्तेमाल की गई सामग्री, ट्रिगर मैकेनिज्म, धमाके का पैटर्न और नुकसान का स्तर—एक ही प्लेटफॉर्म पर संग्रहित की जाएंगी। इस डेटा के आधार पर जांच एजेंसियां यह पता लगा सकेंगी कि किसी विस्फोट में किस तरह की तकनीक और नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया है, जिससे आतंकियों तक पहुंचना आसान होगा।
आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में बड़ी उपलब्धि
गृह मंत्री अमित शाह ने उद्घाटन के दौरान कहा कि आतंकवाद और नक्सलवाद से निपटने के लिए तकनीक आधारित सुरक्षा तंत्र समय की जरूरत है। NIDMS न केवल घटनाओं की जांच को तेज करेगा, बल्कि भविष्य में होने वाले हमलों को रोकने में भी मददगार साबित होगा। उन्होंने कहा कि यह सिस्टम “डेटा ड्रिवन सिक्योरिटी अप्रोच” का उदाहरण है, जिसमें सबूतों के आधार पर निर्णय लिए जाएंगे। इससे न केवल जांच की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि दोषियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया भी मजबूत होगी।
जांच एजेंसियों को कैसे मिलेगा फायदा?
अब तक आईईडी धमाकों की जांच में अलग-अलग राज्यों और एजेंसियों के पास बिखरा हुआ डेटा होता था। NIDMS के जरिए:
सभी राज्यों का डेटा एक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा
पुराने मामलों से नए केस को जोड़ा जा सकेगा
विस्फोट के पैटर्न से आतंकी संगठनों की पहचान आसान होगी
फॉरेंसिक जांच अधिक सटीक और वैज्ञानिक बनेगी
इस सिस्टम से एनआईए, राज्य पुलिस, सेना, सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियां सीधे जुड़ी रहेंगी।
NSG की भूमिका और बढ़ी
नेशनल सिक्योरिटी गार्ड पहले से ही देश की सबसे प्रशिक्षित काउंटर टेरर फोर्स मानी जाती है। अब NIDMS के संचालन से NSG डेटा एनालिसिस और फॉरेंसिक एक्सपर्टाइज का भी राष्ट्रीय केंद्र बन जाएगा। मानेसर स्थित यह बम डेटा सेंटर आईईडी से जुड़े हर पहलू—डिजाइन, निर्माण, विस्फोट और प्रभाव—का अध्ययन करेगा। इससे NSG के प्रशिक्षण मॉड्यूल भी और प्रभावी होंगे।

भविष्य की सुरक्षा रणनीति में अहम भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में आतंकी संगठन पारंपरिक हथियारों के बजाय तकनीकी रूप से उन्नत IED का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में NIDMS जैसी प्रणाली:
नए ट्रेंड्स की पहचान करेगी
आतंकियों की बदलती रणनीति पर नजर रखेगी
सुरक्षा बलों को पहले से अलर्ट करेगी
यह सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स के जरिए भविष्य के खतरों का आकलन करने में भी सक्षम होगा।
आम नागरिकों की सुरक्षा होगी और मजबूत
IED धमाकों का सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर पड़ता है। NIDMS के जरिए समय पर जांच और दोषियों की गिरफ्तारी से ऐसे हमलों में कमी आने की उम्मीद है। इसके साथ ही संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा प्लानिंग को और मजबूत किया जा सकेगा।
‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का तकनीकी विस्तार
सरकार की आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को NIDMS एक ठोस तकनीकी आधार प्रदान करता है। यह दिखाता है कि देश अब केवल प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि पूर्व-नियोजित और विश्लेषण आधारित सुरक्षा नीति पर काम कर रहा है।
नेशनल IED डेटा मैनेजमेंट सिस्टम का शुभारंभ भारत की सुरक्षा व्यवस्था में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह न केवल आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को और मजबूत करेगा, बल्कि जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीक से लैस कर देश को एक सुरक्षित भविष्य की ओर ले जाएगा।

