By: Vikash Kumar (Vicky)
पूजा के समय आंसू आना कितना सामान्य है
कई बार ऐसा होता है कि हम मंदिर में पूजा करते समय, आरती सुनते हुए या भगवान का नाम जपते हुए अचानक भावुक हो जाते हैं और आंखों से आंसू बहने लगते हैं। बहुत से लोग इस स्थिति में घबरा जाते हैं और सोचने लगते हैं कि कहीं यह किसी अशुभ संकेत या पाप का नतीजा तो नहीं। लेकिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो पूजा के दौरान आंसू आना अक्सर एक शुभ संकेत माना जाता है, क्योंकि यह मन, आत्मा और ईश्वर के बीच गहरे जुड़ाव को दर्शाता है।

आत्मा की शुद्धि का संकेत होते हैं आंसू
जब कोई व्यक्ति सच्चे मन से भगवान की भक्ति करता है, तो उसका अहंकार, भय, तनाव और दुख धीरे-धीरे पिघलने लगता है। उस समय जो भावनाएं अंदर दबकर बैठी होती हैं, वे आंसुओं के रूप में बाहर निकलती हैं। पंडितों और आध्यात्मिक गुरुओं के अनुसार इसे भाव शुद्धि कहा जाता है, यानी आत्मा का शुद्ध होना। यह ठीक उसी तरह है जैसे लंबे समय से भरे मन को हल्का करने के लिए रोना जरूरी हो जाता है।
ईश्वर के सामने आत्मसमर्पण की अवस्था
पूजा के दौरान रोने का एक कारण यह भी हो सकता है कि व्यक्ति अपने जीवन की परेशानियों, दुखों और गलतियों को भगवान के सामने रख रहा होता है। जब मन पूरी तरह खुल जाता है और इंसान खुद को ईश्वर के सामने समर्पित कर देता है, तब आंखों से आंसू बहना स्वाभाविक होता है। इसे आत्मसमर्पण की अवस्था कहा जाता है, जहां व्यक्ति अपने सारे बोझ भगवान को सौंप देता है।
भक्ति रस में डूबा हुआ हृदय
कुछ लोग सोचते हैं कि पूजा के समय रोना कमजोरी या नकारात्मकता का प्रतीक है, लेकिन शास्त्रों में इसे भक्ति रस की अवस्था कहा गया है। जब मन पूरी तरह प्रभु की भक्ति में डूब जाता है, तो हृदय में एक अलग तरह की तरंग पैदा होती है, जिससे आंखों से आंसू स्वतः निकल आते हैं। यह स्थिति बहुत दुर्लभ और पवित्र मानी जाती है, क्योंकि इसमें व्यक्ति पूरी तरह भगवान के प्रेम में डूब जाता है।
मानसिक तनाव भी हो सकता है कारण
हालांकि हर बार पूजा के दौरान रोना केवल आध्यात्मिक कारणों से ही नहीं होता। कभी-कभी यह मानसिक तनाव, दबे हुए दुख या लंबे समय से चली आ रही चिंता का भी परिणाम हो सकता है। जब हम शांत माहौल में बैठते हैं और मन को एकाग्र करते हैं, तब भीतर छुपी भावनाएं बाहर आने लगती हैं। ऐसे में आंसू आना एक तरह का मानसिक उपचार भी माना जा सकता है, जिससे व्यक्ति हल्का और शांत महसूस करता है।

आंसुओं के बाद मिलने वाली शांति का अर्थ
पंडितों का मानना है कि यदि पूजा के समय रोने के बाद मन में शांति, हल्कापन और सकारात्मक ऊर्जा महसूस होती है, तो यह ईश्वर की कृपा और आत्मा की शुद्धि का संकेत है। लेकिन अगर रोने के साथ बेचैनी, घबराहट या भारीपन बना रहता है, तो यह मन में किसी गहरे तनाव या भावनात्मक समस्या की ओर इशारा कर सकता है, जिस पर ध्यान देना जरूरी होता है।
यह शुभ है या अशुभ इसका फैसला कैसे करें
इसलिए पूजा के दौरान आंसू आना अपने आप में न तो अच्छा है और न ही बुरा, बल्कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपके भीतर किस तरह की भावना चल रही है। अगर आंसू प्रेम, श्रद्धा और समर्पण से निकल रहे हैं, तो यह आपकी भक्ति की गहराई को दिखाते हैं। और अगर ये दुख या तनाव से आ रहे हैं, तो यह संकेत है कि आपको अपने मन और जीवन की परेशानियों को समझने और सुलझाने की जरूरत है।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं और सामान्य मानसिक अनुभवों पर आधारित है। किसी भी तरह की मानसिक परेशानी या लंबे समय तक बनी रहने वाली भावनात्मक समस्या में विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

