By: Vikash Kumar (Vicky)
भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक और अहम अंतरिक्ष मिशन को अंजाम दिया है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV-C62/EOS-N1 मिशन के तहत ‘अन्वेषा’ (Anvesha) नामक उपग्रह का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया। यह उपग्रह रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के लिए विकसित किया गया एक गोपनीय हाइपरस्पेक्ट्रल निगरानी सैटेलाइट है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा निगरानी और रणनीतिक क्षेत्रों में उच्च स्तरीय डेटा संग्रह करना है।

हालांकि, मिशन के दौरान PS3 (तीसरे चरण) में तकनीकी खराबी आने की पुष्टि ISRO ने की है, जिसके कारण मिशन अपने निर्धारित लक्ष्यों को पूरी तरह हासिल नहीं कर सका। इसके बावजूद ISRO ने मिशन को आंशिक रूप से सफल बताया है।
क्या है ‘अन्वेषा’ सैटेलाइट की खासियत?
‘अन्वेषा’ एक अत्याधुनिक हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग उपग्रह है, जो पृथ्वी की सतह से परावर्तित होने वाले विभिन्न तरंगदैर्घ्यों (wavelengths) को रिकॉर्ड कर सकता है। यह तकनीक पारंपरिक ऑप्टिकल सैटेलाइट्स की तुलना में कहीं अधिक सटीक और विस्तृत जानकारी प्रदान करती है।
इस उपग्रह की मदद से—
सीमावर्ती क्षेत्रों की निगरानी
दुश्मन गतिविधियों पर पैनी नजर
छिपे हुए सैन्य ठिकानों की पहचान
पर्यावरणीय बदलावों का विश्लेषण
आपदा प्रबंधन में सहायता
जैसे कई अहम कार्य किए जा सकते हैं। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ‘अन्वेषा’ भारत की रणनीतिक अंतरिक्ष क्षमता को और मजबूत करने वाला उपग्रह माना जा रहा है।
PSLV-C62 मिशन में क्या हुआ?
ISRO के अनुसार, लॉन्च के शुरुआती चरण पूरी तरह सामान्य रहे। पहला और दूसरा चरण (PS1 और PS2) तय समय और अपेक्षित प्रदर्शन के अनुसार कार्य करते रहे। लेकिन जैसे ही रॉकेट तीसरे चरण यानी PS3 स्टेज में पहुंचा, वहां तकनीकी असामान्यता दर्ज की गई। ISRO के वैज्ञानिकों ने बताया कि PS3 चरण में थ्रस्ट से जुड़ी समस्या सामने आई, जिसके कारण रॉकेट उपग्रह को तय कक्षा (ऑर्बिट) में पूरी सटीकता से स्थापित नहीं कर सका। हालांकि, उपग्रह से संपर्क बना हुआ है और उसके कुछ सिस्टम सक्रिय हैं।
15 सह-उपग्रह भी थे मिशन का हिस्सा
इस मिशन की एक और खास बात यह रही कि ‘अन्वेषा’ के साथ-साथ 15 सह-उपग्रह (Co-Passengers) भी लॉन्च किए गए। इनमें—
शैक्षणिक संस्थानों के छोटे सैटेलाइट
स्टार्ट-अप्स द्वारा विकसित क्यूब सैट्स
पृथ्वी अवलोकन और संचार से जुड़े उपग्रह
शामिल थे। इनमें से अधिकांश उपग्रहों को उनकी निर्धारित कक्षाओं में सफलतापूर्वक तैनात कर दिया गया है, जिससे मिशन की उपयोगिता काफी हद तक बनी हुई है।

ISRO की प्रतिक्रिया: जांच के आदेश
ISRO प्रमुख ने मिशन के बाद कहा कि—
“PSLV-C62 मिशन के दौरान PS3 चरण में तकनीकी समस्या आई, जिसकी विस्तृत जांच की जाएगी। हमारे वैज्ञानिक डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न आए।”
ISRO ने स्पष्ट किया कि यह असफलता नहीं बल्कि सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा है और भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम इससे और अधिक मजबूत होकर उभरेगा।
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर क्या असर पड़ेगा?
अंतरिक्ष विशेषज्ञों का मानना है कि PSLV की विश्वसनीयता अब भी वैश्विक स्तर पर मजबूत है। पिछले कई दशकों में PSLV ने सैकड़ों सफल मिशन पूरे किए हैं। इस मिशन में आई तकनीकी खामी को मामूली और सुधार योग्य बताया जा रहा है।
रक्षा मामलों के जानकारों के अनुसार, ‘अन्वेषा’ जैसे निगरानी उपग्रह भारत को—
अंतरिक्ष आधारित खुफिया जानकारी
रियल-टाइम डेटा विश्लेषण
सामरिक बढ़त
प्रदान करते हैं। आने वाले समय में ISRO और DRDO मिलकर इस उपग्रह से जुड़े शेष लक्ष्यों को पूरा करने की कोशिश करेंगे।
भविष्य की तैयारी में जुटा ISRO
ISRO पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह—
आगामी PSLV मिशनों में तकनीकी सुधार
नए परीक्षण प्रोटोकॉल
और अधिक सटीक निगरानी प्रणाली
लागू करेगा। इसके साथ ही, Gaganyaan, Aditya-L1, और NISAR जैसे मिशन ISRO की प्राथमिकता में बने हुए हैं।
‘अन्वेषा’ उपग्रह का प्रक्षेपण भारत के लिए एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कदम है। भले ही PS3 स्टेज में आई तकनीकी खराबी के कारण मिशन पूरी तरह सफल न हो पाया हो, लेकिन ISRO की पारदर्शिता, त्वरित प्रतिक्रिया और सुधारात्मक दृष्टिकोण यह दिखाता है कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम लगातार प्रगति की राह पर है।

