देवघर। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र कामना लिंग के रूप में प्रतिष्ठित बाबा बैद्यनाथ धाम न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यहां की प्राचीन परंपराएं भी भक्तों को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करती हैं। इन्हीं परंपराओं में से एक है बाबा बैद्यनाथ का संध्या श्रृंगार, जो प्रतिदिन संध्या काल में विशेष विधि-विधान के साथ संपन्न किया जाता है। यह श्रृंगार न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि बाबा धाम की सांस्कृतिक और वैदिक परंपरा को भी जीवंत बनाए रखता है।
क्या है संध्या श्रृंगार की परंपरा
संध्या श्रृंगार का अर्थ है—दिन भर की पूजा-अर्चना के उपरांत संध्या समय में भगवान शिव को विश्राम और दिव्य अलंकरण प्रदान करना। देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम में यह परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है। मान्यता है कि संध्या श्रृंगार के दर्शन से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।

संध्या श्रृंगार का समय
बाबा बैद्यनाथ धाम में संध्या श्रृंगार सामान्यतः
संध्या आरती के बाद किया जाता है। यह प्रक्रिया लगभग 30 से 45 मिनट तक चलती है, जिसके बाद गर्भगृह के पट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं।
संध्या श्रृंगार की विधि-विधान
1. गर्भगृह की शुद्धि
संध्या श्रृंगार से पूर्व गर्भगृह की विशेष शुद्धि की जाती है। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ जल और गंगाजल से शिवलिंग एवं परिसर को पवित्र किया जाता है।
2. पंचामृत स्नान
बाबा बैद्यनाथ को
दूध
दही
घी
शहद
शर्करा
से बने पंचामृत से स्नान कराया जाता है। इसके बाद शुद्ध जल से अभिषेक किया जाता है।
3. चंदन और भस्म लेपन
अभिषेक के पश्चात बाबा को चंदन, भस्म और सुगंधित द्रव्यों से अलंकृत किया जाता है। यह शिव के वैराग्य और तपस्वी स्वरूप का प्रतीक माना जाता है।
दिव्य वस्त्र और आभूषणों से श्रृंगार
संध्या श्रृंगार के दौरान बाबा बैद्यनाथ को
विशेष वस्त्र
रुद्राक्ष माला
पुष्प हार
बिल्व पत्र
से सजाया जाता है। श्रृंगार में प्रयुक्त सामग्री मंदिर परंपरा के अनुसार चयनित होती है और इसे केवल अधिकृत पंडा एवं पुरोहित ही संपन्न करते हैं।

संध्या आरती का विशेष महत्व
श्रृंगार से पूर्व और पश्चात संध्या आरती होती है, जिसमें
शंख
घंटा
दीप
मंत्रोच्चार
से पूरा मंदिर परिसर शिवमय हो जाता है। इस दौरान “ॐ नमः शिवाय” और वैदिक मंत्रों की गूंज से भक्त भाव-विभोर हो उठते हैं।
संध्या श्रृंगार के दर्शन का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,
संध्या श्रृंगार दर्शन से रोगों से मुक्ति
मानसिक शांति
पारिवारिक सुख
कार्यों में सफलता
प्राप्त होती है। विशेषकर सावन माह, महाशिवरात्रि और श्रावणी मेले के दौरान संध्या श्रृंगार के दर्शन का महत्व और बढ़ जाता है।
बाबा बैद्यनाथ धाम और सांस्कृतिक विरासत
देवघर का बाबा धाम केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि भारत की सनातन संस्कृति और आस्था का जीवंत प्रतीक है। संध्या श्रृंगार जैसी परंपराएं यह दर्शाती हैं कि कैसे सदियों से चली आ रही धार्मिक विधियां आज भी उसी श्रद्धा और नियम के साथ निभाई जा रही हैं।
श्रद्धालुओं में दिखता है विशेष उत्साह
संध्या श्रृंगार के समय देश-विदेश से आए श्रद्धालु मंदिर परिसर में उपस्थित रहते हैं। कई भक्त सुबह की पूजा के बाद विशेष रूप से संध्या श्रृंगार दर्शन के लिए रुकते हैं। मंदिर प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए जाते हैं।
बाबा बैद्यनाथ धाम की संध्या श्रृंगार परंपरा न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह शिवभक्ति, वैदिक संस्कृति और आस्था का संगम है। यह परंपरा श्रद्धालुओं को ईश्वर से जोड़ने के साथ-साथ आत्मिक शांति और ऊर्जा प्रदान करती है। देवघर आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु के लिए संध्या श्रृंगार दर्शन एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बन जाता है।

