By: Vikash Kumar (Vicky)
आज की तिथि और पंचांग विवरण
आज 15 जनवरी 2026, गुरुवार माघ मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है, जिसे विशेष धार्मिक मान्यता के साथ तिल द्वादशी के रूप में मनाया जाएगा। इस पावन दिन का पंचांग धार्मिक एवं ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि पूजा, दान तथा अन्य शुभ कर्म सही समय पर सम्पन्न करने से अधिक फलदायी प्रभाव मिलता है। आज का विक्रम संवत 2082 और शक संवत 1947 है। सूर्य मकर राशि में तथा चंद्रमा ज्येष्ठा नक्षत्र में है, जो दैनिक क्रिया-कलापों में शुभ ऊर्जा का संयोग बनाता है।

तिथि विस्तार और संयोग
द्वादशी तिथि आज प्रातः से 08:16 बजे तक रहेगी, उसके बाद त्रयोदशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। इस द्वादशी तिथि में विशेष रूप से तिल का दान, तिल से होने वाले यज्ञ तथा भगवान नारायण की पूजा का शुभ समय अत्यंत फलदायी माना जाता है। तिलदान करने से पितृ दोष शांत होता है और आयु, स्वास्थ्य तथा समृद्धि में वृद्धि का मान्यता प्राप्त है।
सूर्य एवं चंद्र स्थिति
आज सूर्योदय लगभग 07:15 बजे से 07:20 बजे तक और सूर्यास्त 05:45 PM से 06:00 PM के बीच रहेगा, जो दिन का सामान्य सूर्य चक्र दर्शाता है। चंद्रमा ज्येष्ठा नक्षत्र में संचार करता रहेगा, जिससे मानसिक शांति तथा आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि की संभावना बनती है।
राहुकाल, यमगंड तथा गुलिक काल
आज राहुकाल दोपहर लगभग 01:30 बजे से 03:00 बजे तक रहेगा, जब किसी भी शुभ कार्य की शुरूआत नहीं करनी चाहिए। इसी प्रकार यमगंड काल सुबह 07:15 बजे से 08:30 बजे तक तथा गुलिक काल लगभग 09:55 बजे से 11:15 बजे तक रहेगा। इन समयों में शुभ कार्य टालना श्रेष्ठ माना जाता है।
शुभ मुहूर्त और अनुष्ठान समय
आज के सबसे महत्वपूर्ण शुभ मुहूर्त में अभिजीत मुहूर्त लगभग दोपहर 12:10 बजे से 12:50 बजे तक रहेगा, जो किसी भी शुभ कार्य, विवाह, खरीद-फरोख्त, यात्रा या पूजा के लिए अत्यंत फायदेमंद समय है। इसके अतिरिक्त सुबह के ब्रह्म मुहुर्त (05:30 बजे से 06:20 बजे तक) में ध्यान, प्रार्थना और योग करना शुभ परिणाम देगा। शाम के अमृत काल (07:55 PM – 09:45 PM) में भी पूजा तथा शांति कर्म करना विशेष लाभदायक माना जाता है।

आज का धार्मिक महत्व: तिल द्वादशी एवं उपवास
आज का दिन तिल द्वादशी के रूप में प्रसिद्ध है। पौराणिक मान्यता के अनुसार तिल का दान, तिल से बने व्यंजन (विशेष रूप से तिल-गुड़ से बनी मिठाइयां) तथा भगवान विष्णु की पूजा से जीवन में समृद्धि, स्वास्थ्य, पितृ तर्पण और दोष निवारण में विशेष फल मिलता है। उपवास रखने वाले आज तिल द्वादशी का उपवास रखकर भगवान नारायण की विधिवत पूजा कर सकते हैं।
चौघड़िया (दिन के भाग)
दिन भर के चौघड़िया समयों में लाभ, अमृत, शुभ एवं चर जैसे भाग आते हैं, जिन्हें शुभ कार्यों में ध्यान में रखते हुए अपना कार्यक्रम बनाना चाहिए। शाम के समय भी चौघड़िया का शुभ योग उपलब्ध रहेगा, जो पारिवारिक और सामाजिक कार्यों में सहायता करेगा।
यह पंचांग और मुहूर्त जानकारी सामान्य ज्योतिषीय पंचांग पर आधारित है और धार्मिक संदर्भ में उपयोगी है। इसे व्यक्तिगत निर्णय या अंतिम सत्य न माना जाए। किसी भी महत्वपूर्ण कर्म या अनुष्ठान से पहले स्थानीय पुजारी या अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श लेना श्रेष्ठ रहता है।

