By: Vikash Kumar (Vicky)
प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
प्रदोष व्रत भगवान शिव जी को समर्पित एक अत्यंत पवित्र उपवास माना जाता है। हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है और शिवजी की पूजा से भक्त की मनोकामनाएं मान्यता के अनुसार पूरी होती हैं। धार्मिक मान्यताओं में कहा गया है कि प्रदोष व्रत से जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है तथा नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं।

जनवरी 2026 में प्रदोष व्रत की तिथि
साल 2026 में माघ मास का प्रदोष व्रत शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को पड़ेगा। पंचांग के अनुसार त्रयोदशी तिथि 15 जनवरी की रात 8:16 बजे से शुरू होकर 16 जनवरी की रात 10:21 बजे तक रहेगी, इसलिए भक्तों को 16 जनवरी को प्रदोष व्रत की पूजा करनी चाहिए। इस व्रत को “शुक्र प्रदोष” व्रत भी कहा जाता है क्योंकि यह शुक्रवार को पड़ रहा है।
प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत के समय पूजा का सबसे महत्वपूर्ण भाग है प्रदोष काल। 16 जनवरी 2026 को इसका शुभ मुहूर्त शाम लगभग 05:47 बजे से रात लगभग 08:29 बजे तक होगा। यही वह समय है जब भगवान शिव की पूजा करना और व्रत रखकर मंत्रों का जाप करना सर्वाधिक फलदायी माना जाता है। भक्त इस दौरान शिवलिंग पर जल, दूध, फल और बेलपत्र अर्पित कर सकते हैं।
प्रदोष व्रत पूजा विधि
प्रदोष व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, साफ वस्त्र धारण करें और भगवान शिव को ध्यान में रखते हुए पूजा का संकल्प लें। दिनभर फलाहार या उपवास रख सकते हैं तथा शाम को प्रदोष काल के दौरान शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र और बाती से विधिवत पूजा-अर्चना करें। मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जप इस दिन विशेष फलदायी माना जाता है।

व्रत का पारण (उपवास तोड़ने का समय)
व्रत का पारण (उपवास समाप्त करना) आमतौर पर परान समय के अनुसार किया जाता है, जो प्रातः के समय कुछ देर बाद होता है। यह पारण भले ही अगली सुबह हो, लेकिन परान से पहले श्रद्धा और पूजा को पूर्ण करना आवश्यक है। पारण के समय से पहले शिव पूजा और मंत्र जाप पूरा कर लें तो शुभ फल मिलता है।
प्रदोष व्रत से जुड़ी मान्यताएं और लाभ
हिंदू धर्मग्रंथों और पुराणों के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से ब्रह्मांडीय ऊर्जा सक्रिय होती है और भक्त को भौतिक तथा आध्यात्मिक दोनों क्षेत्रों में लाभ प्राप्त होता है। कहा जाता है कि प्रदोष व्रत से व्यक्ति के जीवन की कठिनाइयाँ कम होती हैं और उसके मन की इच्छाएँ पूर्ण होती हैं। भक्तों का मानना है कि यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद होता है जो धन, स्वास्थ्य और मानसिक शांति की प्राप्ति चाहते हैं।
यह लेख सामान्य धार्मिक जानकारी पर आधारित है और इसे चिकित्सा, वित्तीय या विशेषज्ञ सलाह के रूप में न लिया जाए। किसी भी विशेष पूजा विधि, स्वास्थ्य या धार्मिक निर्णय से पहले स्थानीय पुरोहित, पंडित या विशेषज्ञ ज्योतिषी से मार्गदर्शन अवश्य लें।

