रंगों का जीवन पर प्रभाव: वास्तु शास्त्र की मान्यता
वास्तु शास्त्र में रंगों को केवल सजावट का हिस्सा नहीं बल्कि ऊर्जा के प्रवाह को प्रभावित करने वाला तत्व माना जाता है। घर या ऑफिस के अंदर इस्तेमाल किए जाने वाले रंगों से सकारात्मक या नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिसका असर जीवन के विभिन्न पहलुओं पर पड़ सकता है। ऐसे में कुछ रंगों के प्रयोग से बचने की सलाह दी जाती है ताकि वातावरण में संतुलन बना रहे।
काला रंग और वास्तु: क्या वास्तु में अशुभ माना जाता है?
काला रंग (Black) वास्तु शास्त्र में अक्सर निगेटिव ऊर्जा, अँधकार और भारीपन से जोड़ा जाता है। कई वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार घर की दीवारों, मुख्य दरवाज़े या उत्तर दिशा में काले रंग का अत्यधिक उपयोग घर के सकारात्मक ऊर्जा प्रवाह को अवरुद्ध कर सकता है और मानसिक तनाव, आर्थिक मंदी या पारिवारिक अशांति जैसी समस्याएं उत्पन्न कर सकता है।

नीला रंग और वास्तु: कब शुभ, कब अशुभ?
नीला रंग (Blue) को आमतौर पर शांत, एकाग्रता और संयम का प्रतीक माना जाता है और सही स्थान पर इसका उपयोग सकारात्मक भी माना जाता है। परंतु वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि गहरे नीले रंग का अत्यधिक उपयोग, विशेष रूप से घर के मुख्य स्थानों पर किया जाए तो यह वातावरण में भारीपन या उदासी की भावना ला सकता है। हल्के नीले रंग को जीवन के संतुलन और शांति के लिए सुझाया जाता है, लेकिन गहरा नीला और उससे अधिक गहरा रंग कुछ परिस्थितियों में अशुभ प्रभाव भी दे सकता है।
कहेते क्या हैं वास्तु विशेषज्ञ? उपयोग की सावधानियां
वास्तु के अनुसार, किसी भी रंग का उपयोग दिशा, कमरे के उद्देश्य और संतुलन के अनुसार होना चाहिए। उदाहरण के लिए, काले रंग को जल तत्व से जुड़ी दिशाओं में सीमित मात्रा में उपयोग करने से नकारात्मक प्रभाव कम हो सकता है, जबकि घर के केंद्रीय या उत्तर-पूर्व दिशा में गहरे रंगों से बचना बेहतर होता है। इसी प्रकार नीले रंग का चयन करते समय उसकी छाया और कमरे के ऊर्जा संतुलन पर ध्यान देना आवश्यक है।

कभी-कभी रंगों के फायदे भी होते हैं
ध्यान देने वाली बात यह है कि काले और नीले रंग को हमेशा अशुभ मानना ठीक नहीं है। कुछ वास्तु और ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि काले रंग का सही उपयोग वास्तु दोषों को संतुलित करने में भी मदद कर सकता है, और नीला रंग शांति तथा सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी बन सकता है जब इसे सही दिशा, स्थान और संतुलन के साथ अपनाया जाए।
रंगों का संतुलित उपयोग: वास्तु का मुख्य उपाय
सभ्य वास्तु सलाह यही है कि केवल किसी रंग को अच्छे या बुरे के रूप में न देखें, बल्कि संतुलन, प्रकाश, तत्वों का मेल और दिशा के अनुसार रंगों का चयन करना चाहिए। उदाहरण के लिए हल्का नीला, सफेद, पीला या हरा रंग आम तौर पर सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं, जबकि गहरे रंगों को मर्यादित उपयोग में रखना चाहिए ताकि जीवन में समृद्धि, शांति और खुशहाली बनी रहे।

